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क्या राजस्थान में परिवहन मंत्री बनाना 'दूध की रखवाली बिल्ली को' देने जैसा साबित हुआ!

जयपुर (राजस्थान). कांग्रेस की वर्तमान सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे चर्चित और बड़ी कार्रवाई में परिवहन विभाग के कई बड़े अधिकारी, दलाल तो फंसे ही पर क्या खुद विभाग के मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास भी इसमें फंस गए हैं! कांग्रेस के ही अंदर अपने ही मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास के खिलाफ विधायक और मंत्री खुलकर सामने आ गए हैं. कारण साफ है मंत्री जी खुद के विभाग में हुई कार्रवाई से इतने हतोत्साहित और खफा नजर आ रहे हैं कि वो एंटी करप्शन ब्यूरो की इस कार्रवाई पर ही सवाल उठा रहे हैं. और तो और उनके बयान कहीं ना कहीं पकड़े गए दलालों और अधिकारियों के प्रति सहानुभूति प्रकट करने जैसे नजर आ रहे हैं. राजस्थान विधानसभा में जब मामला गर्माया तो प्रताप सिंह ने कहा 'एसीबी की ऐसी कार्रवाई से अधिकारियों में भय का माहौल है, भ्रष्टाचार के मामलों में पकड़े गए कई आईएएस, आईपीएस आज भी ऑन रोल हैं...

अंग्रेज भी घबराते थे इस कवि के देशभक्ति गीतों से, गिरफ्तारी के दे दिए थे आदेश

मुंबई. बात 1943 की है जब हिंदुस्तान में फिल्म 'किस्मत' रिलीज हुई. फिल्म में एक गाना उस वक्त बहुत पॉपुलर हुआ जब हिंदुस्तान अंग्रेजी हुकूमत की गुलामी का दंश झेल रहा था और दूसरी तरफ हिंदुस्तान की आजादी की जंग के लिए देश एक हो रहा था. फिल्म का गाना था 'आज हिमालय की चोटी से फिर हमने ललकरा है, दूर हटो ऐ दुनिया वालों हिन्दुस्तान हमारा है...' यह गाना उस वक्त हर हिंदुस्तानी की जुबान पर कुछ ऐसा चढ़ा की राष्ट्रीय एकता, आजादी की मांग के बीच हर देशवासी की जुबान पर चढ़ गया. अंग्रेजी हुकुमत को यह देशभक्ति गीत इतना नागवार गुजरा की उन्होने इस गीत के लेखक की गिरफ्तारी के आदेश दे दिए. इसके चलते कई सालों तक इस महान गीतकार को भूमिगत रहना पड़ा. यह महान शख्स कोई और नहीं बल्कि हिंदी कविता और हिंदी सिनेमा में देशभक्ति और मानवीय मूल्यों का अलख जगाने वाले गीतकार कवि स्वर्गीय प्रदीप उर्फ रामचंद्र न...

भारत में 2020-21 के बजट की 10 प्रमुख क्षेत्रों से जुड़ी बड़ी घोषणाएं, कहीं खुशी-कहीं गम

नई दिल्ली. वर्तमान में लड़खड़ाती, बीमार और बेरोजगार भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती का डोस देने के लिए केन्द्रीय वित्त मंत्री ने भारत देश का बजट पेश किया. बजट में कहीं खुशी तो कहीं गम देखने को मिला. इस हाथ दे दे, उस हाथ ले ले, यह है बजट का दस्तूर' कुछ ऐसा ही इस बजट में देखने को मिला. हालांकि ठंडी पड़ी अर्थव्यवस्था को रिवाइव करने के पूरे प्रयास मोदी सरकार ने इस बजट में किए हैं लेकिन परिणामों लेकर लोगों के मन में आशंकाएं भी हैं. भारत की केन्‍द्रीय वित्‍त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्‍त वर्ष 2020-21 के इस बजट में क्या खास घोषणाएं की इसको आइए इन दस बिंदुओं से संक्षेप्त में समझते हैं.   10 प्रमुख क्षेत्र और बजट घोषणाएं:   1- टैक्स स्लैब: - टैक्‍स स्‍लैब 4 भागों में बांटकर पहले स्‍लैब में 2.5 लाख की आमदनी वालों को टैक्‍स से छूट दी गई. - 2.5 लाख से 5 लाख तक ...

ब्रेग्जिट: ब्रिटेन यूरोपियन संघ से अलग, 10 फैक्ट से समझे आखिर क्या है पूरा मसला

लंदन (सौम्यता मिश्रा). बात दूसर विश्व युद्ध की समाप्ति की है, जब पश्चिमी यूरोप देशों ने महसूस किया कि लडाई झगड़ों में कुछ नहीं रखा है. यूरोपियन देशों में एकता होनी बेहद जरुरी है. विभिन्न यूरोपियन देशों में राष्ट्रवाद और एकता की भावना पनपने लगी, आवाम के अच्छे, खुशहाल जीवन के साथ आर्थिक उन्नति की ओर यूरोपियन देशों ने मिलकर सोचना शुरु किया. इस भावना का ही नतीजा था कि यूरोप के एकीकरण का सबसे पहला सफल प्रस्ताव 1951 में आया जब यूरोप के कोयला और स्टील उद्योग लाबी ने लामबंदी शुरु कर दी. जिसके तहत खासकर फ्रांस और पश्चिमी जर्मनी के इस उद्योग को एकीकृत नियंत्रण में लाने का प्रयास हुआ, ताकि इन दो राष्ट्रों में संघर्ष की स्थिति भविष्य में उत्पन्न न हो. इस लाबी के कर्ता धर्ता ने तभी इसे संयुक्त राज्य यूरोप की परिकल्पना के रूप में प्रचारित किया था. यूरोपीय संघ के अन्य संस्थापक राष्ट्रों में बेल्जिय...

बजट में इनकम टैक्स के 4 स्लैब प्रस्तावित, आयकरदाताओं के लिए पिछले 10(TEN) बजट कैसे रहे ?

नई दिल्ली. फरवरी माह के पहले दिन भारत देश का केन्द्रीय बजट पेश होगा. बजट को लेकर उम्मीदें, आशाएं और शंकाएं सब का एक मिश्रण आवाम के जहन में देखने को मिल रहा है. सबसे बड़ी बात है बेरोजगारी, मंदी और ठप हो चुके व्यापार, उद्वोग धंधों के बीच हर माह वेतन पाने वाले लोगों में चिंताएं सबसे ज्यादा देखने को मिल रही है. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बाद भारत में मोदी सरकार मौजूदा 3 टैक्स स्लैब की जगह 4 टैक्स स्लैब ला सकती है. इन चार स्लैब को लेकर हर कोई अपने अपने मायने निकाल रहा है. इस मामले में बनी टास्क फोर्स ने अगस्त, 2019 में अपनी रिपोर्ट केन्द्र सरकार को पेश करते हुए 4 टैक्‍स स्‍लैब के सुझाव दिए थे जिसमें 2.5 से 10 लाख रुपये के बीच सालाना आय वालों के लिए 10% टैक्स रेट प्रस्तावित की गई. इसके साथ ही 10 लाख से लेकर 20 लाख रुपये के बीच आय वालों के लिए 20% और 20 लाख से 2 करोड़ रुपये की ...

एक सरकारी स्कूल में पढ़ा हिंदी मीडियम युवा बना देश का टॉप IAS, पढें कौन है यह शख्स?

नई दिल्ली. बेटर इंडिया ने देश के टॉप टेन IAS की लिस्ट जारी की है. लिस्ट में असम कैडर के IAS अधिकारी राज यादव, तमिलनाडु कैडर के संदीप नंदूरी, छत्तीसगढ़ कैडर के अविनाश शरण, मध्यप्रदेश कैडर के आशीष सिंह के साथ राजस्थान कैडर के दो IAS अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं. राजस्थान कैडर के IAS डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी और अतहर आमिर खान का नाम भी इस लिस्ट में शामिल किया गया है. बेहतर काम, जवाबदेह और जिम्मेदार प्रशासन, नवाचार के साथ वंचितों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलवाने और सुशासन देने वाले अधिकारियों के नाम इस लिस्ट में शामिल किए गए हैं. इस लिस्ट में शामिल डॉ. जितेन्द्र सोनी के नाम का जिक्र खास तौर पर इसलिए किया जाना महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि अभावों में एक सरकारी और हिंदी मीडियम स्कूल में पले बडे होने के बावजूद सोनी ने देश और दुनिया में अपनी अलग पहचान स्थापित की. मुश्किलें भी बहुत आईं लेकिन डॉ. सो...

अमेरिका और ईरान क्यों हैं एक दूसरे की जान के दुश्मन? जानिए 10 बड़ी वजह

अमेरिका/ईरान. यह बात 1953 की है, जब अमेरिकी गुप्तचर एजेंसी सीआइए (CIA) ने ब्रिटेन के साथ मिलकर तेल के खेल में ईरान के निर्वाचित प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसादेक को अपदस्थ करा दिया था. बताया जाता है कि धर्मनिरपेक्ष छवी वाले प्रधानमंत्री मोसादेक तेल उद्योग का ईरान के हित में राष्ट्रीयकरण करना चाहते थे लेकिन अमेरिका को यह कतई मंजूर नहीं थी और यहीं से दोनों देशों के बीच दुश्मनी के बीज बोए गए. दुश्मनी के यह बीज भी ऐसे पड़े की अब तक दोनों देशों के बीच रिश्तों की मिठास के सभी प्रयास विफल ही नजर आए. डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में रिश्ते और बुरे हो गए हैं. हाल में ईरान के सर्वोच्च नेता के बाद दूसरा स्थान रखने वाले कुद्स फोर्स के प्रमुख जनरल कासिम सुलेमानी को अमेरिका ने ड्रोन हमले में मौत के घाट उतार दिया. जिसका कहीं विरोध तो कहीं समर्थन हो रहा है, पर दोनों देशों के बीच तनाव अब परवान पर है अब अमेरिका के ...

अलविदा 'मिग-27', पढें दुनिया का इतिहास बने 'मिग-27' से जुड़े 10 बड़े फैक्ट

जोधपुर. कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मनों के होश फाख्ता करने देने वाला, खतनाक 'बहादुर' मिग-27 अब पूरी तरह से भारतीय वायुसेना से विदा हो चुका है. मिग-27 की जोधपुर स्थित स्क्वाड्रन न सिर्फ दक्षिण पश्चिमी वायु कमान, बल्कि समूचे देश की मिग-27 की अंतिम स्क्वाड्रन थी. दुनिया में इतिहास बन चुका लडाकू विमान मिग-27. जानकारों के मुताबिक जोधपुर वायुसेना स्टेशन में मिग-27 की अंतिम स्क्वाड्रन की सेवानिवृत्ति के बाद, यह विमान न सिर्फ भारत (India), बल्कि पूरे विश्व में एक इतिहास बन गया है.   मिग-27 से जुड़े 10 बड़े फैक्ट: 1- मिग-27 को भारतीय वायु सेना के बेड़े में 1985 में शामिल किया गया था. 2- यह अत्यंत सक्षम लड़ाकू विमान ज़मीनी हमले की क्षमता का आधार रहा है. वायु सेना के सभी प्रमुख ऑपरेशन्स में भाग लेने के साथ मिग-27 ने 1999 के कारगिल युद्ध में भी एक अभूतपूर्व भूमिका निभाई थी. कार...

अशोक गहलोत के वो 10 मजबूत पक्ष जो बनाते हैं उन्हें राजस्थान का सबसे ताकतवर नेता

जयपुर (राजस्थान). अशोक गहलोत ना केवल राजस्थान के बल्कि देश के सबसे मजबूत नेताओं में शुमार हैं. वो मुख्यमंत्री के तौर पर अपने तीसरे कार्यकाल का पहला साल पूरा कर चुके हैं. कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई से राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले गहलोत 1973 से 1979 तक राजस्थान एनएसयूआई के अध्यक्ष रहे. गहलोत 7वीं लोकसभा के लिए 1980 में पहली बार जोधपुर से कांग्रेस के टिकट पर जीतकर संसद पहुंचे. इसके बाद जोधपुर से ही 8वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं लोकसभा में चुनाव जीता. यह उनके लगातार शानदार प्रदर्शन का ही नतीजा था कि बतौर इनाम उन्हें केंद्रीय मंत्री बनाया गया. गहलोत को इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और पी.वी.नरसिम्हा राव के मंत्रिमंडल में सेवाएं देने का मौका मिला. इसके अलावा वह तीसरी बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बने. अशोक गहलोत पांच बार सांसद रह चुके हैं और पांचवीं बार विधायक चुने गए हैं. वे केंद्र और राज...

भारत में कानून बना नागरिकता संशोधन विधेयक. 10 फैक्ट्स से समझें पूरे इतिहास और भावी चुनौतियों को

नई दिल्ली (सुभद्र पापड़ीवाल). देशभर में विरोध और समर्थन की राजनीतिक रस्म अदायगी के बीच नागरिकता संशोधन विधेयक कानून बन गया है. लोकसभा और राज्यसभा से पास होने के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी इसे मंजूरी दे दी. नागरिकता संशोधन बिल नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों को बदलने के लिए पेश किया गया था. नागरिकता बिल में इस संशोधन से बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदुओं के साथ ही सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों के लिए बगैर वैध दस्तावेजों के भी भारतीय नागरिकता हासिल करने का रास्ता साफ हो अब साफ हो गया है. इसके अलावा भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए देश में 11 साल निवास की बाध्यता घटाकर अब इसे 6 साल करने का प्रावधान हो गया है. बड़ी बात यह है कि ऐसे अवैध प्रवासी भारतीय नागरिकता के लिए सरकार के पास आवेदन कर सकेंगे, जिन्होंने 31 दिसंबर 2014 की निर्णायक तारीख तक भारत में प्रवेश...