India

महाराष्ट्र की सियासत में अब आगे क्या होने वाला है? 10 फैक्ट से समझिए

महाराष्ट्र (सुभद्र पापड़ीवाल). राजनीति संभावनाओं का खेल है. और यहां बाप बड़ा है ना भैया सबसे बड़ा रुपैया का गेम चलता है. शायद इसीलिए कहा जाता है यह लोकतंत्र की सड़कें हैं इन पर जरा संभल कर चलिए कब आपके साथ क्या हादसा हो जाए पता नहीं. जो चीज आपको दूर से बहुत बेहतर नजर आ रही हो बाद में पता चलता है वही सबसे बड़ी मृग मरीचिका थी. ऐसा ही कुछ महाराष्ट्र की राजनीति में देखने को मिला जहां बीजेपी को मुख्यमंत्री की रेस से लोगों ने बाहर समझ लिया था वहीं मोदी और अमित शाह के मास्टर स्ट्रोक ने राजनीति का सबसे बड़ा खेल करके ना केवल खुद को साबित कर दिया, बल्कि यह भी साबित कर दिया की राजनीति में इस दिग्गज जोड़ी का कोई मुकाबला नहीं. इसे 'पॉलिटिकल सर्जिकल स्ट्राइक' कहा जाए तो कम नहीं होगा. अब यह समझना बहुत जरूरी है क्या आगे क्या होने वाला है. क्योंकि किसी ने खूब कहा है कि 'सियासत की अपनी अलग इक जु...

'महाराष्ट्र की महाभारत' के वो 10 बारीक दाव पेंच जो जानना जरुरी है

महाराष्ट्र/नई दिल्ली. विधानसभा चुनावों के बाद महाराष्ट्र की महाभारत में Political Crisis का सबसे बड़ा उदाहरण देखने को मिला.चुनाव परिणाम से लेकर राष्ट्रपति शासन तक यहां देखने को मिला तो राजनीति में महत्वाकांक्षा और जनादेश के अपमान के बेहतर उदाहरण भी सामने आए. भारतीय लोकतंत्र का दुखद पक्ष भी यहां के राजनैतिक दलों ने पेश किया. जनादेश का अपमान, सिद्धांतों की तिलांजलि के बीच बनते बिगड़ते समीकरणों ने किसी बड़ी राजनीति आपदा का उदाहरण यहां पेश किया. इस बीच हर कोई जानना चाहता है कि आखिर महाराष्ट्र में चल क्या रहा है. देश के जाने-माने राजनीतिक विश्लेषक सुभद्र पापड़ीवाल के नजरिए से समझिए 10 वो बड़ी बातें जो आपको महाराष्ट्र की राजनीति को समझने में मदद करेंगे.   महाराष्ट्र की राजनीति के 10 बारीक दाव पेंच?   1- कांग्रेस हमेशा यह चाहेगी कि सरकार नहीं बना सकने का आरोप उस पर नहीं ल...

क्या है वो 'कालापानी' विवाद, जिसे लेकर नेपाल ने दिखाई भारत को आंख?

भारत/काठमांडू. भारत ने हाल में नवगठित जम्मू कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश को उनकी सीमाओं के साथ अपने नए नक्शे में दिखाया. नक्शे में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को नवगठित जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के हिस्से के रूप में जबकि गिलगित-बाल्टिस्तान को लद्दाख के हिस्से के रूप में प्रदर्शित किया गया है. नेपाल को इस मानचित्र के उस हिस्से से आपत्ति है, जहां विवादित कालापानी क्षेत्र को भारतीय सीमा में रखा गया है. नेपाल का दावा है कि कालापानी क्षेत्र नेपाल के दार्चुला जिले का हिस्सा है. दार्चुला नेपाल के सुदुरपश्चिम प्रोविंस का एक जिला है. नेपाल का कहना है कि कालापानी को लेकर भारत और नेपाल के बीच बातचीत जारी है लेकिन मसला अभी सुलझा नहीं है. इस बीच नेपाल ने भारत को आंख दिखाने की कोशिश की है. नेपाल में भारत के नए मानचित्र को लेकर विरोध-प्रदर्शन जोरों पर है. प्रधानमंत्री केपी ओली ने भी ...

अयोध्या में किसी और जगह मस्जिद मंजूर नहीं - AIMPLB, अयोध्या विवाद फिर जाएगा कोर्ट में

यूपी. AIMPLB को दूसरी जगह मस्जिद मंजूर नहीं है. अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंदिर के हक में जाने के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती दी जाएगी और उन्हें किसी और जगह मस्जिद मंजूर नहीं है. बोर्ड के सचिव मोहम्मद महफूज रहमानी ने कहा कि हम मस्जिद के बदले जमीन नहीं लेंगे. शरीयत के हिसाब से हमें ऐसा कोई हक नहीं है क्योंकि शरीयत के मुताबिक एक बार मस्जिद हो गई तो वो आखिरी तक मस्जिद होती है. रविवार को लखनऊ में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड की बैठक में यह भी सर्वसम्मति से लिया गया कि राजीव धवन ही सुप्रीम कोर्ट में AIMPLB की तरफ से केस की पैरवी करेंगे. बोर्ड के सचिव मोहम्मद महफूज रहमानी ने कहा कि हमें वही जमीन चाहिए, जिसके लिए हमनें लड़ाई लड़ी थी. मस्जिद के बदले में मुसलमान कोई भी दूसरी जमीन नहीं लेंगे. हम दूसरी मस्जिद लेने सुप्रीम कोर्ट नहीं...

कुरकुरे के साथ बच्चे ने खिलौना खाया, बच्चे की मौत

नीमच, मध्यप्रदेश. सावधान हो जाएं. कुरकुरे में निकलने वाले खिलौने आपके बच्चे की कभी भी जान ले सकते हैं. ऐसा ही एक वाकया हुआ है मध्यप्रदेश के नीमच में, जहां तीन साल के मासूम बच्चे रोहित बंजारा ने अंजाने में कुरकुरे के साथ उसमें निकलने वाला खिलौना खा लिया. खिलौना बच्चे की आहार नली में अटक गया, जिसके कारण बच्चे को सांस लेने में लगातार तकलीफ हुई और उसकी मौत हो गई. इससे पहले मध्यप्रदेश के ही रीवा में भी सितम्बर माह में ऐसा ही एक वाकया सामने आया था. जिसमें आठ माह का मासूम बच्चा कुरकुरे खाते समय खिलौना भी निगल गया. खिलौना उसके गले में फंस गया, जिससे वह परेशान हो गया. यह देख परिजनों के होश उड़ गए है. इसके बाद उसको इलाज के लिए संजय गांधी चिकित्सालय लाया गया, जहां डॉक्टरों ने दो घंटे की मशक्कत के बाद उसके गले में फंसा खिलौना निकालने में सफलता प्राप्त की. बच्चे की जान जाने से बमुश्किल बची. 2017 में...

महाराष्ट्र की सियासत में 'महाभारत कथा', राष्ट्रपति शासन लागू, जानें राष्ट्रपति शासन से जुड़े 10 फैक्ट

महाराष्ट्र/नई दिल्ली.महाराष्ट्र में सियासत की महाभारत का अंत कैसे होगा यह सबके लिए बड़ा सवाल बन गया. द ग्रेट इंडियन पॉलिटिकल शो का सबसे बड़ा नजारा महाराष्ट्र में देखने को मिला. इस बीच मोदी कैबिनेट ने महाराष्ट्र में मंगलवार को राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश की. जिसके बाद महाराष्ट्र की सियासी अनिश्चितता का फिलहाल पटाक्षेप हो गया. राज्यपाल की सिफारिश पर महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सिफारिश पर मुहर लगाई. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक बुलाई गई थी, जहां यह फैसला लिया गया. कैबिनेट की बैठक ऐसे समय पर बुलाई गई थी, जब महाराष्ट्र में पिछले महीने विधानसभा के लिये हुए चुनाव के बाद अब तक कोई भी पार्टी सरकार नहीं बना पाई है और इसके कारण प्रदेश में राजनीतिक संकट की स्थिति बन रही है.   महाराष्ट्र की 288 सदस्यीय विधानसभ...

राम मंदिर विवाद का THE END, फैसले के बाद अब ट्रस्ट का इंतजार

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट में 40 दिनों तक लगातार चली सुनवाई के बाद शनिवार को फैसला आया. फैसले में कहा गया कि राम मंदिर विवादित स्थल पर बनेगा और मस्जिद निर्माण के लिए अयोध्या में पांच एकड़ जमीन अलग से दी जाएगी. अदालत ने कहा कि विवादित 2.77 एकड़ जमीन केंद्र सरकार के अधीन रहेगी. केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को मंदिर बनाने के लिए तीन महीने में एक ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया गया है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई में पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने फैसला सुनाते हुए विवादित जमीन रामलला को सौंप दी है. जबकि मुस्लिम पक्ष को अलग स्थान पर जगह देने के लिए कहा गया है. यानी सुन्नी वफ्फ बोर्ड को कोर्ट ने अयोध्या में ही अलग जगह 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अब सरकार 3 महीने के भीतर ही राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने में जुट गई है. ऐसा माना जा रहा है कि गुजरात के...

केयर्न पिंकसिटी हाफ मैराथन के ट्रेनिंग कैम्प स्टार्ट... चल दौड़

जयपुर(राजस्थान). THE END NEWS की डिजिटल मीडिया पार्टनरशिप में 15 दिसम्बर 2019 को आयोजित होने वाली केयर्न पिंकसिटी हाफ मैराथन (CAIRN PINK CITY HALF MARATHON) को लेकर क्रेज परवान पर है. रनर्स ने जीत की जोर आजमाइश के लिए अभी से वर्जिश शुरु कर दी है. ऐसा लग रहा है मानो हर कोई कह रहा हो 'चल दौड़'. देश और दुनिया के धावकों को बेहतर मंच सुविधा इस मैराथन में दी जा सके और रनर्स को दौड़ से जुड़े आवश्यक नियमों, सावधानियों को लेकर ट्रेनिंग कैम्प की शुरुआत भारत के राज्य राजस्थान की राजधानी जयपुर में कर दी गई है. केयर्न पिंकसिटी हाफ मैराथन के फाउण्डर मनोज सोनी ने कहा- 'जयपुर के सबसे बड़े सेंट्रल पार्क में ट्रेनिंग कैम्प की शुरुआत की गई है. युवाओं में इस कैम्प को लेकर खासा क्रेज दिख रहा है. जहां रनिंग एक्सपर्ट की गाइडेंस में यह पूरा कैम्प चल रहा है. अब आयोजन की हर तैयारियों को अंतिम रुप देने क...

'कांग्रेस विलुप्त हो रही है, सोनिया के पुत्रमोह के चक्कर में सबकुछ बिखर गया है'- पंकज शंकर

नई दिल्ली. 'राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस धीरे-धीरे खत्म हो रही है. सोनिया गांधी के पुत्रमोह के चक्कर में सबकुछ बिखर गया है' यह कहना है गांधी परिवार के सबसे करीबी लोगों में शामिल पंकज शंकर का. गांधी परिवार के करीबी रहे पंकज शंकर ने राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए जमकर कांग्रेस लीडरशिप को कोसा और कहा कि यही हालात रहे तो कहीं कांग्रेस पार्टी विलुप्त ना हो जाए. राजीव गांधी, इंदिरा गांधी के बाद एक्टिव रुप से 1991 से गांधी परिवार से जुड़े पंकज शंकर ने एबीपी न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में पहली बार गांधी परिवार के खिलाफ जुबान खोलते हुए ऐसे कड़वा सच बोला कि कई लोगों की नींद उड़ गई है. बड़ी बात यह है कि गांधी परिवार और कांग्रेस की इस दुर्गति पर जल्द ही पंकज शंकर एक बेव सीरिज भी ला रहे हैं. पंकज शंकर ने कहा कि 'अपनी बातें एक छोटी फिल्म के माध्यम से रखूंगा, जिसमें बताउं...

बड़ा सवाल, आखिर लोकतंत्र में अंतत: पार्टियों, उनके सांसदों और विधायकों की जवाबदेही किसके प्रति हो?

नई दिल्ली (विशेष आलेख) . हरियाणा के राजनैतिक घटनाक्रम के बाद एक फिर ये प्रश्न ज्वलन्त हो गया है कि लोकतंत्र में पार्टियों, उनके सांसदों और विधायकों की जवाबदेही अंततः किसके प्रति होनी चाहिए? कैम्पेन के दौरान आवाम के सामने रखे वायदों, योजनाओं, नीतियों के प्रति जिनके दम पर सदन में जीत कर आये हैं अथवा अपनी निजी महत्वाकांक्षा के प्रति या हाईकमान की सत्ता लोलुपता के प्रति? विधायकों और सांसदों की निजी महत्वाकांक्षा पर तो हमने दल-बदल अधिनियम के दम पर अंकुश लगा दिया है. जिस दल से वे जीत कर आये हैं उससे दीगर वो कुछ भी नही सोच सकते. जैसे ही हाउस में हाईकमान द्वारा तय पार्टी लाइन से कुछ डिफरेंट एक्ट किया नहीं कि सांसद या विधायक रहने की पात्रता समाप्त. लगातार इस कानून को सख्त से सख्त बनाने की कोशिश भी की गई है. 52 वें संशोधन के तहत बने इस कानून में एक तिहाई सदस्य मिलकर तय पार्टी लाइन से दीगर भी सोच सकत...