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डॉ. वीरेन्द्र लेजर आई हॉस्पिटल का कारनामा, करना था लेफ्ट आंख का ऑपरेशन, ​कर दिया राइट साइड का, पीड़िता ने पुलिस में दी शिकायत

डॉ. वीरेन्द्र अग्रवाल और उनके हॉस्पिटल के खिलाफ बजाज नगर थाना पुलिस जांच में जुटी। परिजनों ने सख्त कार्रवाई की मांग की। पीड़िता की गलत ऑपरेशन से आंख की रोशनी की भी क्षति हुई।  जयपुर। प्राइवेट अस्पतालों में इलाज की लापरवाही के मामले तो खूब देखे हैं लेकिन जयपुर के जाने माने डॉ. वीरेन्द्र लेजर आई हॉस्पिटल का कारनामा अलग ही है। जहां एक बालिका का उसके परिजन लेफ्ट आई का ऑपरेशन कराने गए थे और डॉक्टर साहब ने कर दिया राइट आई का। इतना ही नहीं ऑपरेशन थिएटर में मरीज को पहले ही अस्पताल प्रशासन की लापरवाही और गलती का अहसास हो गया था, उसने भी टोका कि शायद आप राइट साइड की आंख का ऑपरेशन करने जा रहे हो लेकिन मेरी लेफ्ट आंख का ऑपरेशन होना है लेकिन डॉक्टर और उनकी टीम ने एक ना सुनी और लेफ्ट के बजाए राइट आंख का ऑपरेशन कर दिया। “सेक्स पावर” बढाने के नाम पर डॉ. चिराग भंडारी पर फर्जीवाड़े का आ...

पथरी के ऑपरेशन में किडनी कर दी डैमेज, युवक की मौत के बाद डॉक्टर ने स्वीकारी लापरवाही

मध्य प्रदेश. सतना जिले में किडनी स्टोन के इलाज के दौरान एक युवक की मौत के बाद गंभीर हंगामा खड़ा हो गया। पन्ना जिले के देवेंद्रनगर निवासी रवि रजक को किडनी में पथरी की शिकायत थी, जिसके इलाज के लिए परिजन उसे सतना के मुख्तियारगंज स्थित पाठक नर्सिंग होम लेकर पहुंचे थे। जांच के बाद डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह दी और 4 अप्रैल को करीब पांच घंटे तक सर्जरी की गई। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने लापरवाही बरती और जिस किडनी का इलाज किया जा रहा था, उसके अलावा दूसरी स्वस्थ किडनी पर भी कट लगा दिया, जिससे मरीज की हालत बिगड़ गई। परिजनों के मुताबिक, ऑपरेशन के बाद जब स्थिति गंभीर हुई तो डॉक्टरों ने आनन-फानन में टांका लगाकर मरीज को रीवा के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल रेफर कर दिया। वहां जांच में सामने आया कि दूसरी किडनी पर गहरा कट था और लगातार खून बहने तथा संक्रमण के कारण उसे भी निकालना पड़...

“सेक्स पावर” बढाने के नाम पर डॉ. चिराग भंडारी पर फर्जीवाड़े का आरोप, पहले रिश्वत लेते हुए भी हो चुके हैं एसीबी ट्रेप

जयपुर: राजधानी जयपुर से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां यौन क्षमता बढ़ाने के नाम पर कथित तौर पर अवैध दवाओं का कारोबार किया जा रहा था। यह पूरा नेटवर्क ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए संचालित हो रहा था, जिसे हाल ही में ड्रग विभाग और केंद्रीय एजेंसियों ने उजागर किया है। इस कार्रवाई ने ऑनलाइन हेल्थ प्रोडक्ट्स की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। छापेमारी में खुली पोल खुद को सेक्सोलॉजिस्ट बताने वाले डॉ चिराग भंडारी के गोपालपुरा स्थित भंडारी हॉस्पिटल में यह सेक्स पावर बढाने का गोरखधंधा चल रहा था। ड्रग कंट्रोल विभाग और सेंट्रल एजेंसियों ने संयुक्त कार्रवाई की। जांच के दौरान सामने आया कि अस्पताल के पते का इस्तेमाल कर एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से “ट्राइमेक्स” नाम से दवाओं का मिश्रण बेचा जा रहा था, जो नियमों के खिलाफ है। खतरनाक दवा कॉम्बिनेशन पर सवाल ...

निविक अस्पताल का संचालक डॉ. सोनदेव बंसल गिरफ्तार, पुलिस बोली आरजीएचएस दस्तावेज में फर्जीवाड़ा करने के मामले में एक्शन

जयपुर डीसीपी साउथ राजर्षि राज ने स्पष्ट किया कि अस्पताल के खिलाफ इलाज में लापरवाही के मामले में कार्रवाई नहीं की गई है। दस्तावेज में फर्जीवाड़ा करने के मामले में यह एक्शन लिया गया है। मामले में विभाग ने भी फर्जीवाड़े की शिकायत की थी। जिस पर जांच के बाद निजी अस्पताल संचालक को गिरफ्तार किया गया है। उधर प्राइवेट हॉस्पिटल्स एंड नर्सिंग होम्स एसोसिएशन ने जताई नाराजगी जयपुर। जयपुर। यह खबर जयपुर के मानसरोवर इलाके से सामने आई है, जहां एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान महिला की मौत के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया। दरअसल, निविक अस्पताल के संचालक डॉ. सोनदेव  बंसल को पुलिस ने हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई उस मामले में की गई है, जिसमें कुछ दिन पहले अस्पताल में भर्ती एक महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। मृतका के परिजनों ने डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए थ...

5 दिन का विराम या रणनीतिक चाल? अमेरिका-ईरान तनाव पर उठते सवाल

मध्य-पूर्व की राजनीति एक बार फिर अनिश्चितता के दौर में है। हाल ही में United States ने Iran पर अगले 5 दिनों तक हमला न करने की घोषणा की है। इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है—क्या यह वास्तव में युद्ध विराम की दिशा में कदम है या केवल एक रणनीतिक विराम? कुछ विश्लेषक इसे पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump की संभावित राजनीतिक चाल के रूप में भी देख रहे हैं। क्या यह सच में युद्ध विराम है? सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि “हमला न करने की घोषणा” और “औपचारिक युद्ध विराम” (Ceasefire) दो अलग-अलग चीजें हैं। युद्ध विराम आमतौर पर दोनों पक्षों की सहमति से होता है और इसमें शर्तें तय होती हैं। एकतरफा हमला रोकने की घोषणा केवल सामरिक (tactical) निर्णय भी हो सकता है। इस मामले में अभी तक ऐसी कोई पुष्टि नहीं है कि ईरान ने भी औपचारिक रूप से जवाबी कार्...

ईरान की फायर रेंज से दूर मीडिल ईस्ट में अमेरिका खेल रहा “सेफ गेम”? संघर्ष की भट्टी में तप रहे पड़ोसी मुल्क

वॉशिंगटन। (आलोक शर्मा) मध्य-पूर्व के तनाव में अक्सर यह धारणा बनती है कि अमेरिका सीधे ईरान की फायर रेंज से बाहर रहकर “सेफ गेम” खेल रहा है। दरअसल, यह स्थिति कई सैन्य, तकनीकी और कूटनीतिक परतों का परिणाम है। और हाल में चल रहे ईरान वॉर में भी यही साबित हो रहा है। पहले की तरह ही मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच यह सवाल बार-बार उठ रहा है कि अमेरिका सीधे ईरान की फायर रेंज में क्यों नहीं दिखता, जबकि जवाबी कार्रवाई अधिकतर पड़ोसी देशों या क्षेत्रीय ठिकानों के आसपास ही हो रही है। दरअसल, यह दूरी संयोग नहीं बल्कि रणनीति है। अमेरिका अपनी सैन्य मौजूदगी को इस तरह तैनात करता है कि वह सीधे हमले की जद से बाहर रहे, लेकिन जरूरत पड़ने पर तेज और सटीक जवाब देने की क्षमता भी बनाए रखे। यानि खुद एक सेफ गेम खेलता है और दूसरे मुल्कों के कंधे पर बंदूर रखकर चलाने की पुरानी आदत है। ऐसा ही मीडिल ईस्ट वॉर में दे...

सुपरपावर से सुपर कंट्रोवर्सी तक: क्यों घिरा है अमेरिका ‘दादागीरी’ के आरोपों में?

​वाशिंगटन। (आलोक शर्मा) हाल ही में ईरान पर संयुक्त राज्य अमेरिका की सैन्य कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई देशों, विश्लेषकों और मानवाधिकार संगठनों ने इस कदम की आलोचना की है। इस निंदा के पीछे कई राजनीतिक, कानूनी और मानवीय कारण बताए जा रहे हैं। सबसे बड़ा मुद्दा अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता का है। आलोचकों का कहना है कि किसी भी देश पर सैन्य हमला तभी उचित माना जाता है जब वह आत्मरक्षा की स्पष्ट स्थिति में हो या उसे अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की मंजूरी प्राप्त हो। यदि यह कार्रवाई एकतरफा मानी जाती है, तो इससे वैश्विक नियमों और संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं। दूसरा कारण क्षेत्रीय अस्थिरता का खतरा है। मध्य पूर्व पहले से ही राजनीतिक तनाव और संघर्षों से प्रभावित रहा है। ऐसे में किसी बड़े देश की सीधी सैन्य कार्रवाई से व...

वियतनाम युद्ध: कैसे अमेरिका की सबसे लंबी लड़ाई बनी उसकी सबसे बड़ी रणनीतिक हार

US-Israel Attacks Iran : (आलोक शर्मा) क्या ट्रंप की हठधर्मिता अमेरिका के नाम वियतनाम युद्ध जैसी एक और रणनीतिक असफलता की कहानी लिखने जा रही है। विदेश और युद्ध मामलों के जानकार लगातार यह सवाल उठा रहे हैं। कारण साफ है जिस ईरान में अमेरिका इजरायल के साथ 2 से 3 तीन के युद्ध को ध्यान में रखकर आगे बढा था अब वही युद्ध एक माह से ज्यादा चलने की आशंका जताई जाने लगी है। ट्रंप अपने इरादों में सफल हो या न हों लेकिन मीडिल ईस्ट के कई देशों को ट्रंप की हठधर्मिता ने बैठे बिठाएं युद्ध में धकेल दिया है, जबकि अमेरिका खुद के देश को इससे बचाए हुए हजारों किलामीटर दूर बैठा हुआ है। उसके देश में अभी तक एक भी ईरानी हमला नहीं हुआ है या यों कहें उसकी सीमाओं के आसपास भी नहीं पहुंचा है। लेकिन क्या सिर्फ हठधर्मिता के चलते ट्रंप ने एक गलत समय पर एक गलत फैसला कर लिया जिसे अब वह लाखों करोड़ों लोगों की जान युद्ध में धकेल...

हिंद महासागर में ईरान पर ट्रैजिक स्ट्राइक, 80 लोगों की मौत

ग्लोबल तनाव और मध्य-पूर्व संघर्ष के बीच अंतरराष्ट्रीय समुद्र में एक बड़ा सैन्य घटनाक्रम हुआ है। एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत IRIS Dena को हिंद महासागर में टॉरपीडो से डुबा दिया, जिससे कम से कम 80 ईरानी नौसैनिक मारे गए और दर्जनों लापता हैं। यह घटना श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास हुई, अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में जहां दोनों देश सक्रिय तौर पर तैनात थे। साथ ही, अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने यह भी बताया कि इस तरह का पनडुब्बी से टॉरपीडो हमला किसी अन्य युद्धपोत पर किए गए महत्वाकांक्षी हमले के बाद पहली बार हुआ है — 1945 के बाद. क्या था IRIS Dena? IRIS Dena एक Moudge-class फ्रिगेट है — ईरान की नौसेना का आधुनिक युद्धपोत — जिसमें लगभग 180 नाविक सवार थे। यह जहाज भारत के विशाखापत्तनम में आयोजित बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास MILAN 2026 में भाग लेने के बाद अपने देश लौट रहा था...

दुबई में धमाकों के बाद भारतीय रियल एस्टेट बाजार को मिलेगा फायदा, जानें क्यों होने लगी जयपुर और जेडीए की चर्चा?

जयपुर/दुबई. (आलोक शर्मा) दुनिया की सबसे ऊंची इमारत Burj Khalifa के आसपास धमाकों और प्रतिष्ठित Palm Jumeirah इलाके में मिसाइल हमलों की खबरों ने वैश्विक निवेशकों को चौंका दिया है। वर्षों से सुरक्षित निवेश और लग्जरी लाइफस्टाइल का प्रतीक रहा दुबई अचानक अस्थिरता के घेरे में नजर आने लगा है। अब बड़ा सवाल यह है—क्या इस बदले माहौल का फायदा भारत को मिल सकता है? क्या दुबई से निकलने वाला निवेश भारतीय रियल एस्टेट बाजार की ओर रुख करेगा? आइए समझते हैं पूरे समीकरण को। दुबई पर हमला क्यों है बड़ी बात? दुबई को लंबे समय से मध्य पूर्व का सबसे स्थिर और सुरक्षित निवेश केंद्र माना जाता रहा है। जियोपॉलिटिकल तनाव के बावजूद UAE का रियल एस्टेट बाजार अपेक्षाकृत अछूता रहता था। लेकिन हालिया घटनाओं ने “सेफ हेवन” की उस छवि को झटका दिया है। कई रियल एस्टेट कंपनियों ने अस्थायी रूप से ...