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शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी का याराना नया नहीं बहुत पुराना है! 10 फैक्ट से समझिए आखिर कैसे?

महाराष्ट्र (सुभद्र पापड़ीवाल). क्या शिवसेना,एनसीपी और कांग्रेस का मेल सिर्फ मौका परस्ती का गठबंधन है! यह सवाल आज सबके जहन में है. या इन दलों के बीच सच में कुछ दशकों पुरानी गहरी जड़ें भी हैं जो आज संकट की घडी में महाराष्ट्र की महाभारत में साथ नजर आ रहे हैं. सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या हिंदुत्व का विषय शिवसेना के जन्म और अंतरात्मा से जुड़ा है अथवा यह उनके लिए एक प्रोडक्ट की मार्केटिंग मात्र है. शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के बीच पॉलिटिकल कैमैस्ट्री के दस रोचक तथ्य आपको बताएं उससे पहले जरा यह भी जान लें कि अपने उग्र हिंदुवादी तेवरों के लिए जानी जाने वाली शिव सेना को कांग्रेस के साथ गठबंधन में भी परहेज क्यों नहीं है. जब तक शरद पवार कांग्रेस में रहे तब भी बाला साहब ठाकरे को कांग्रेस से परहेज नहीं था, और कांग्रेस छोडकर एनसीपी बनाने के बाद भी परहेज नहीं रहा. ज्यादा पुराने इतिहास पर जाने...

70 हजार करोड़ के सिंचाई घोटाले के आरोपी अजित पवार को ACB से क्लीन चिट

'सियासत की अपनी अलग इक जुबां है, लिखा हो जो इक़रार, इनकार पढ़ना' महाराष्ट्र. कभी एक दूसरे के नम्बर वन राजनीतिक दुश्मन बने देवेन्द्र फडनवीस और एनसीपी के अजित पवार आज इतने करीबी हैं कि हर कोई दांतों तले अंगुली दबाने को मजबूर है. यही कारण है कि एनसीपी नेता अजित पवार बीजेपी के साथ हाथ मिलाकर महाराष्ट्र के नए-नवेले उप मुख्यमंत्री बने तो 70 हजार करोड के सिंचाई घोटाले के आरोपी अजित पवार को ACB से क्लीन चिट भी मिल गई बताए. कांग्रेसी इसे बीजेपी के प्रति वफादारी और जनादेश के साथ धोखे की पहली किश्त बता रहे हैं. बड़ी बात यह है कि जो फडनवीस कहते थे कि 'अजित पवार को जेल में डालेंगे, अब उन्हीं पवार साहब को क्लीन चिट मिल गई.' पवार पर महाराष्ट्र में राजनेताओें, नौकरशाहों और कॉन्ट्रैक्टर्स की मिलीभगत से 1999 से 2009 के बीच कथित तौर पर 70 हजार करोड़ रुपये के सिंचाई घोटाले...

महाराष्ट्र की सियासत में अब आगे क्या होने वाला है? 10 फैक्ट से समझिए

महाराष्ट्र (सुभद्र पापड़ीवाल). राजनीति संभावनाओं का खेल है. और यहां बाप बड़ा है ना भैया सबसे बड़ा रुपैया का गेम चलता है. शायद इसीलिए कहा जाता है यह लोकतंत्र की सड़कें हैं इन पर जरा संभल कर चलिए कब आपके साथ क्या हादसा हो जाए पता नहीं. जो चीज आपको दूर से बहुत बेहतर नजर आ रही हो बाद में पता चलता है वही सबसे बड़ी मृग मरीचिका थी. ऐसा ही कुछ महाराष्ट्र की राजनीति में देखने को मिला जहां बीजेपी को मुख्यमंत्री की रेस से लोगों ने बाहर समझ लिया था वहीं मोदी और अमित शाह के मास्टर स्ट्रोक ने राजनीति का सबसे बड़ा खेल करके ना केवल खुद को साबित कर दिया, बल्कि यह भी साबित कर दिया की राजनीति में इस दिग्गज जोड़ी का कोई मुकाबला नहीं. इसे 'पॉलिटिकल सर्जिकल स्ट्राइक' कहा जाए तो कम नहीं होगा. अब यह समझना बहुत जरूरी है क्या आगे क्या होने वाला है. क्योंकि किसी ने खूब कहा है कि 'सियासत की अपनी अलग इक जु...

भारतीय क्रिकेट के इतिहास में नया अध्याय लिखेगी पिंक बॉल, जानें पिंक बॉल से जुड़े 10 रोचक फैक्ट

कोलकाता (THE END NEWS). 22 नवम्बर को भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया. भारत अपना डे-नाइट टेस्ट मैच पिंक बॉल (Pink Ball) से खेल रहा है. कोलकाता के ईडन गार्डन में खेले जा रहे इस मैच का क्रेज दुधिया रोशनी में खेले जाने वाले टेस्ट मैच से ज्यादा पिंक बॉल से मैच खेलना है. भारत में पहली बार डे-नाइट टेस्ट क्रिकेट खेला जाएगा और यह 540वां टेस्ट मैच होगा. जहां यह मैच होगा वो ईडन गार्डन एशिया का सबसे पुराना टेस्ट ग्राउंड है और 1934 से यहां टेस्ट मुकाबले हो रहे हैं. पहला टेस्ट इंग्लैंड के खिलाफ 5 से 8 जनवरी 1934 तक पहले भारतीय कप्तान सीके नायडू के नेतृत्व में खेला गया. भारत बांग्लादेश के बीच होने वाले मैच के लिए मेरठ की संसपैरेल्स ग्रीनलैंड्स यानी एसजी कंपनी ने 120 से ज्यादा पिंक बॉल बनाई है.   पिंक बॉल से जुड़े 10 रोचक फैक्ट- 1- पहली गु...

'महाराष्ट्र की महाभारत' के वो 10 बारीक दाव पेंच जो जानना जरुरी है

महाराष्ट्र/नई दिल्ली. विधानसभा चुनावों के बाद महाराष्ट्र की महाभारत में Political Crisis का सबसे बड़ा उदाहरण देखने को मिला.चुनाव परिणाम से लेकर राष्ट्रपति शासन तक यहां देखने को मिला तो राजनीति में महत्वाकांक्षा और जनादेश के अपमान के बेहतर उदाहरण भी सामने आए. भारतीय लोकतंत्र का दुखद पक्ष भी यहां के राजनैतिक दलों ने पेश किया. जनादेश का अपमान, सिद्धांतों की तिलांजलि के बीच बनते बिगड़ते समीकरणों ने किसी बड़ी राजनीति आपदा का उदाहरण यहां पेश किया. इस बीच हर कोई जानना चाहता है कि आखिर महाराष्ट्र में चल क्या रहा है. देश के जाने-माने राजनीतिक विश्लेषक सुभद्र पापड़ीवाल के नजरिए से समझिए 10 वो बड़ी बातें जो आपको महाराष्ट्र की राजनीति को समझने में मदद करेंगे.   महाराष्ट्र की राजनीति के 10 बारीक दाव पेंच?   1- कांग्रेस हमेशा यह चाहेगी कि सरकार नहीं बना सकने का आरोप उस पर नहीं ल...

क्या है वो 'कालापानी' विवाद, जिसे लेकर नेपाल ने दिखाई भारत को आंख?

भारत/काठमांडू. भारत ने हाल में नवगठित जम्मू कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश को उनकी सीमाओं के साथ अपने नए नक्शे में दिखाया. नक्शे में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को नवगठित जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के हिस्से के रूप में जबकि गिलगित-बाल्टिस्तान को लद्दाख के हिस्से के रूप में प्रदर्शित किया गया है. नेपाल को इस मानचित्र के उस हिस्से से आपत्ति है, जहां विवादित कालापानी क्षेत्र को भारतीय सीमा में रखा गया है. नेपाल का दावा है कि कालापानी क्षेत्र नेपाल के दार्चुला जिले का हिस्सा है. दार्चुला नेपाल के सुदुरपश्चिम प्रोविंस का एक जिला है. नेपाल का कहना है कि कालापानी को लेकर भारत और नेपाल के बीच बातचीत जारी है लेकिन मसला अभी सुलझा नहीं है. इस बीच नेपाल ने भारत को आंख दिखाने की कोशिश की है. नेपाल में भारत के नए मानचित्र को लेकर विरोध-प्रदर्शन जोरों पर है. प्रधानमंत्री केपी ओली ने भी ...

अयोध्या में किसी और जगह मस्जिद मंजूर नहीं - AIMPLB, अयोध्या विवाद फिर जाएगा कोर्ट में

यूपी. AIMPLB को दूसरी जगह मस्जिद मंजूर नहीं है. अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंदिर के हक में जाने के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती दी जाएगी और उन्हें किसी और जगह मस्जिद मंजूर नहीं है. बोर्ड के सचिव मोहम्मद महफूज रहमानी ने कहा कि हम मस्जिद के बदले जमीन नहीं लेंगे. शरीयत के हिसाब से हमें ऐसा कोई हक नहीं है क्योंकि शरीयत के मुताबिक एक बार मस्जिद हो गई तो वो आखिरी तक मस्जिद होती है. रविवार को लखनऊ में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड की बैठक में यह भी सर्वसम्मति से लिया गया कि राजीव धवन ही सुप्रीम कोर्ट में AIMPLB की तरफ से केस की पैरवी करेंगे. बोर्ड के सचिव मोहम्मद महफूज रहमानी ने कहा कि हमें वही जमीन चाहिए, जिसके लिए हमनें लड़ाई लड़ी थी. मस्जिद के बदले में मुसलमान कोई भी दूसरी जमीन नहीं लेंगे. हम दूसरी मस्जिद लेने सुप्रीम कोर्ट नहीं...

कुरकुरे के साथ बच्चे ने खिलौना खाया, बच्चे की मौत

नीमच, मध्यप्रदेश. सावधान हो जाएं. कुरकुरे में निकलने वाले खिलौने आपके बच्चे की कभी भी जान ले सकते हैं. ऐसा ही एक वाकया हुआ है मध्यप्रदेश के नीमच में, जहां तीन साल के मासूम बच्चे रोहित बंजारा ने अंजाने में कुरकुरे के साथ उसमें निकलने वाला खिलौना खा लिया. खिलौना बच्चे की आहार नली में अटक गया, जिसके कारण बच्चे को सांस लेने में लगातार तकलीफ हुई और उसकी मौत हो गई. इससे पहले मध्यप्रदेश के ही रीवा में भी सितम्बर माह में ऐसा ही एक वाकया सामने आया था. जिसमें आठ माह का मासूम बच्चा कुरकुरे खाते समय खिलौना भी निगल गया. खिलौना उसके गले में फंस गया, जिससे वह परेशान हो गया. यह देख परिजनों के होश उड़ गए है. इसके बाद उसको इलाज के लिए संजय गांधी चिकित्सालय लाया गया, जहां डॉक्टरों ने दो घंटे की मशक्कत के बाद उसके गले में फंसा खिलौना निकालने में सफलता प्राप्त की. बच्चे की जान जाने से बमुश्किल बची. 2017 में...

'कांग्रेस विलुप्त हो रही है, सोनिया के पुत्रमोह के चक्कर में सबकुछ बिखर गया है'- पंकज शंकर

नई दिल्ली. 'राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस धीरे-धीरे खत्म हो रही है. सोनिया गांधी के पुत्रमोह के चक्कर में सबकुछ बिखर गया है' यह कहना है गांधी परिवार के सबसे करीबी लोगों में शामिल पंकज शंकर का. गांधी परिवार के करीबी रहे पंकज शंकर ने राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए जमकर कांग्रेस लीडरशिप को कोसा और कहा कि यही हालात रहे तो कहीं कांग्रेस पार्टी विलुप्त ना हो जाए. राजीव गांधी, इंदिरा गांधी के बाद एक्टिव रुप से 1991 से गांधी परिवार से जुड़े पंकज शंकर ने एबीपी न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में पहली बार गांधी परिवार के खिलाफ जुबान खोलते हुए ऐसे कड़वा सच बोला कि कई लोगों की नींद उड़ गई है. बड़ी बात यह है कि गांधी परिवार और कांग्रेस की इस दुर्गति पर जल्द ही पंकज शंकर एक बेव सीरिज भी ला रहे हैं. पंकज शंकर ने कहा कि 'अपनी बातें एक छोटी फिल्म के माध्यम से रखूंगा, जिसमें बताउं...

भारत में गधों की संख्या घटी, 18% बढ़ कर गाय की आबादी 14.51 करोड़ हुई

नई दिल्ली.भारत में गधों की आबादी 61.23 फीसदी घटकर महज 1.2 लाख रह गई.गायों की संख्या में 18% बढ गई है. अब देश में गायों की संख्या बढ़ कर 14.51 करोड़ हो गई है. 20वीं पशुगणना रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है. बड़ी बात यह है कि देश में मुर्गियों की संख्या 85.18 करोड़ हो गई है, तो देश में भैंसों की संख्या महज 1% बढ़ी है. पहली बार भारत में टैबलेट की मदद से पशुगणना की गई थी. गौरतलब है कि भारत में हर पांच साल पर पशुगणना होती है. भारत में पहली बार 1919-20 में पशुगणना हुई थी. इसके बाद दूसरी पशुगणना 1924-25 में. आजादी के बाद प्रथम पशुधन गणना 1951 में आयोजित की गई. 2007-12 में हुई 19वीं यानी पिछली पशुगणना के मुकाबले 20वीं पशुगणना में सभी पशुधन की आबादी 4.6 फीसदी की वृद्धि के साथ 53.57 करोड़ हो गई है. हालांकि यह वृद्धि उस स्तर की नहीं जितने प्रयास पशुधन संवर्द्धन के लिए किए गए लेकिन यह बढ़ोत्तरी देश के लिए...