डॉ. वीरेन्द्र अग्रवाल और उनके हॉस्पिटल के खिलाफ बजाज नगर थाना पुलिस जांच में जुटी। परिजनों ने सख्त कार्रवाई की मांग की। पीड़िता की गलत ऑपरेशन से आंख की रोशनी की भी क्षति हुई।
जयपुर। प्राइवेट अस्पतालों में इलाज की लापरवाही के मामले तो खूब देखे हैं लेकिन जयपुर के जाने माने डॉ. वीरेन्द्र लेजर आई हॉस्पिटल का कारनामा अलग ही है। जहां एक बालिका का उसके परिजन लेफ्ट आई का ऑपरेशन कराने गए थे और डॉक्टर साहब ने कर दिया राइट आई का। इतना ही नहीं ऑपरेशन थिएटर में मरीज को पहले ही अस्पताल प्रशासन की लापरवाही और गलती का अहसास हो गया था, उसने भी टोका कि शायद आप राइट साइड की आंख का ऑपरेशन करने जा रहे हो लेकिन मेरी लेफ्ट आंख का ऑपरेशन होना है लेकिन डॉक्टर और उनकी टीम ने एक ना सुनी और लेफ्ट के बजाए राइट आंख का ऑपरेशन कर दिया।
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जब मामले में पीडिता और परिजनों ने ऑपरेशन के बाद अस्पताल प्रशासन को शिकायत की तो बालिका की पीड़ा सुनने के बजाए उल्टा मरीज और उसके परिजनों को ही रौब दिखाने लगे। दुर्व्यवहार किया। थक हार कर पीडिता और उसके परिजन बजाज नगर थाना पहुंचे और मामले में डॉक्टर और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है।
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बजाज नगर के किसान मार्ग पर रहने वाले शिकायर्ता अरविंद लवानियां ने लिखा कि मेरी पुत्री शिखा लवानियां के उपचार के दौरान हुई गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही के संबंध में बताना चाहता हूं कि मेरी पुत्री का इलाज डॉ. वीरेन्द्र लेजर आई हॉस्पिटल में जनवरी माह से चल रहा था। अस्पताल द्वारा जांच किए जाने पर, दाहिनी आंख में लेंस प्रत्यारोपित करने की सलाह दी गई, जिसके लिए मैंने 28/01/26 को अपनी बेटी को भर्ती कराया। डॉ. वीरेंद्र ने उनकी दाहिनी आंख की सर्जरी की और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी। उसे बाईं आंख के भेंगापन के इलाज के लिए बाद में आने को कहा गया था।
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हम समय-समय पर डॉ. वीरेंद्र से सलाह लेते रहते थे। 17/4/26 को मैंने अपनी बेटी शिखा लावणिया को बाईं आंख की भेंगापन की सर्जरी के लिए भर्ती कराया। मैंने अपनी बेटी शिखा लावणिया की बाईं आंख की भेंगापन की सर्जरी के लिए सभी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। जब मेरी बेटी शिरखा ऑपरेशन रूम से बाहर आई, तो पता चला कि उन्होंने बाईं आंख के बजाय दाहिनी आंख का ऑपरेशन कर दिया था। यह वही आंख थी जिसका पहले ही ऑपरेशन हो चुका था। जब हमने इस बारे में शिकायत की, तो कर्मचारियों ने अपनी गलती स्वीकार कर ली। जब हमने डॉ. वीरेंद्र से संपर्क किया, तो उन्होंने अपनी गलती स्वीकार नहीं की और हमें अन्य दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव डालना शुरू कर दिया, लेकिन हमने किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। डॉ. वीरेंद्र की लापरवाही के कारण मेरी बेटी शिरखा की बाईं आंख की सर्जरी नहीं हो पाई और इसके बजाय दाहिनी आंख पर गलत ऑपरेशन कर दिया गया, जिससे उसे स्थायी क्षति हुई। उपरोक्त घटना के कारण पूरा परिवार मानसिक रूप से परेशान है। अतः आपसे अनुरोध है कि मेरी रिपोर्ट पर ध्यान दें और कृपया कानूनी कार्रवाई करें।
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बहरहाल अस्पताल प्रशासन मामले में चुप्पी साधे हुए है लेकिन लापरवाही से एक तो जिस आंख में भेंगापन था उसका इलाज करना था उसका इलाज नहीं हो पाया दूसरा जो आंख सही थी उसकी और रोशनी चली गई। जिससे परिजनों पर दुखों का पहाड़ सा टूट गया है उधर बालिका को भी अपने भविष्य का डर सता रहा है। मामले में पीड़ित पक्ष ने सख्त कार्रवाई डॉ. वीरेन्द्र अग्रवाल और उनके अस्पताल स्टाफ के खिलाफ करने की मांग की है।