जयपुर डीसीपी साउथ राजर्षि राज ने स्पष्ट किया कि अस्पताल के खिलाफ इलाज में लापरवाही के मामले में कार्रवाई नहीं की गई है। दस्तावेज में फर्जीवाड़ा करने के मामले में यह एक्शन लिया गया है। मामले में विभाग ने भी फर्जीवाड़े की शिकायत की थी। जिस पर जांच के बाद निजी अस्पताल संचालक को गिरफ्तार किया गया है। उधर प्राइवेट हॉस्पिटल्स एंड नर्सिंग होम्स एसोसिएशन ने जताई नाराजगी
जयपुर। जयपुर। यह खबर जयपुर के मानसरोवर इलाके से सामने आई है, जहां एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान महिला की मौत के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया। दरअसल, निविक अस्पताल के संचालक डॉ. सोनदेव बंसल को पुलिस ने हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई उस मामले में की गई है, जिसमें कुछ दिन पहले अस्पताल में भर्ती एक महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। मृतका के परिजनों ने डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए थे। परिजनों का कहना है कि महिला का सही तरीके से इलाज नहीं किया गया, जिससे उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई और अंततः उसकी जान चली गई। घटना के बाद परिवार ने विरोध प्रदर्शन भी किया और न्याय की मांग की। शिकायत के आधार पर मानसरोवर थाने में मामला दर्ज किया गया, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। जांच के दौरान अस्पताल के रिकॉर्ड, इलाज से जुड़े दस्तावेज और स्टाफ की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। इसी सिलसिले में डॉक्टर को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। लेकिन बाद में पुलिस ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि आरजीएचएस में अनियमितता के मामले में यह गिरफ्तारी की गई है। हालांकि इस घटना के बाद निजी अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता और जिम्मेदारी को लेकर फिर से सवाल उठने लगे हैं, वहीं स्थानीय लोगों में भी आक्रोश का माहौल देखा जा रहा है। गौरलतब हैं अधिवक्ता जितेन्द्र शर्मा की मां के इलाज में कथित लापरवाही से हुई मौत के मामले में आरोपी डॉक्टर की गिरफ्तारी की मांग को लेकर किया जा रहा था। अधिवक्ताओं का आरोप था कि निजी अस्पताल में उपचार के दौरान गंभीर लापरवाही बरती गई, जिसके कारण महिला की मृत्यु हो गई। इस संबंध में पुलिस में रिपोर्ट दर्ज होने के बावजूद पांच महीने तक गिरफ्तारी नहीं होने से अधिवक्ताओं में भारी रोष था।
पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इलाज के दौरान कहीं आरजीएसएस मेडिकल गाइडलाइन का उल्लंघन तो नहीं हुआ। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो डॉक्टर और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ और सख्त कार्रवाई की जा सकती है। दरअसल पहले यह बात फेल गई की मरीज के ईलाज में लापरवाही से मौत के मामले में यह एक्शन लिया गया है क्योंकि इस मामले में वकील लगातार आंदोलन कर रहे थे। लेकिन बाद में पुलिस ने स्थिति साफ कर दी।
उधर जयपुर डीसीपी साउथ राजर्षि राज ने स्पष्ट किया कि अस्पताल के खिलाफ इलाज में लापरवाही के मामले में कार्रवाई नहीं की गई है। दस्तावेज में फर्जीवाड़ा करने के मामले में यह एक्शन लिया गया है। मामले में विभाग ने भी फर्जीवाड़े की शिकायत की थी। जिस पर जांच के बाद निजी अस्पताल संचालक को गिरफ्तार किया गया है।
प्राइवेट हॉस्पिटल्स एंड नर्सिंग होम्स एसोसिएशन ने जताई नाराजगी
प्राइवेट हॉस्पिटल्स एंड नर्सिंग होम्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. विजय कपूर ने डॉ. सोनदेव बंसल की गिरफ्तारी पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि इलाज के दौरान मरीज की मृत्यु होने पर सीधे चिकित्सक को गिरफ्तार करना सरकार द्वारा पूर्व में जारी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के खिलाफ है। इस तरह की कार्रवाई न केवल नियमों की अनदेखी है, बल्कि एक गलत परंपरा की शुरुआत भी कर सकती है, जिसके दूरगामी दुष्परिणाम सामने आएंगे।
डॉ. कपूर ने आरोप लगाया कि यह कदम वकीलों के दबाव में उठाया गया है, जो कि चिकित्सा व्यवस्था के लिए चिंताजनक संकेत है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इसी तरह डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई होती रही, तो निजी अस्पताल गंभीर मरीजों को भर्ती करने और उनका इलाज करने से हिचकिचाने लगेंगे। इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा असर पड़ेगा और गंभीर स्थिति वाले मरीजों को समय पर उचित इलाज मिलना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मरीज की मृत्यु होने पर जांच और कार्रवाई के लिए पहले से तय स्पष्ट दिशानिर्देश और प्रक्रियाएं मौजूद हैं, जिनका पालन करना जरूरी है। बिना उचित जांच के इस तरह की कार्रवाई से अंततः आम जनता को ही नुकसान उठाना पड़ेगा।