जयपुर. राजस्थान की सियासत में एक नया गेम शुरू हो चुका हैं. राजनीति रोमांच और संभावनाओं का खेल है. साम, दाम, दण्ड, भेद, झूठ, फरेब वो सार दाव पेच यहां इस्तेमाल किए जा रहे हैं जो कई दशकों बाद राजस्थान की सियासत में देखने को मिले हैं. राजस्थान में कांग्रेस की सियायत का विवाद अब न्यायालय तक पहुंच गया है. राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट सहित 19 समर्थकों ने राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष के नोटिस के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंच कर याचिका लगाई हालांकि हाईकोर्ट में याचिका पर गुरुवार को सुनवाई टल गई. पायलट कैंप ने राजस्थान विधानसभा द्वारा अयोग्य करार दिए गए विधायकों की याचिका में संशोधन करने के लिए समय मांगा है. हाईकोर्ट में याचिका सचिन पायलट का समर्थन वाले विधायक पृथ्वीराज मीणा ने दाखिल की थी. इस बीच राजस्थान की गहलोत सरकार भले ही खुद के पास 109 और पायलट खेमा खुद के पास 30 विधायकों का दावा कर रहा हो लेकिन दोनों के ही दावे फिलहाल अधूरे नजर आ रहे हैं.
इन सबके बीच राजनीतिक गलियारों से जुड़े जानकार सूत्रों से एक बडी खबर यह निकलकर आई है कि गहलोत खेमे के पास विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को मिलाकर कुल ही 98 विधायक हैं. किसी भी सूरत में गहलोत सरकार के दावे के मुताबिक 109 का आंकड़ा फिलहाल नजर नहीं आ रहा है. इसको समझने के लिए एक बार पहले आपको विधायकों की पूरी गणित समझाते हैं. जिसके आधार पर यह दावा किया जा रहा है.
राजस्थान में कुल 200 विधायक हैं. इनमें 107 कांग्रेस, 72 बीजेपी, 13 निर्दलीय, 1 आरएलडी जिसके सुभाष गर्ग हैं, 3 हनुमान बेनवाली की आरएलपी, 2 बीटीपी, 2 कम्यूनिस्ट पार्टी के विधायक हैं.
अब सबसे पहले कांग्रेस की ही बात कर लेते हैं. कांग्रेस की गहलोत सरकार के पास खुद की पार्टी के 107, 13 निर्दलीय और 1 आरएलडी के विधायकों का सपोर्ट था. यानी यह संख्या हुई कुल 121. अब इनमें से 3 उन निर्दलीय विधायकों जिनका पार्टी से संबंध समाप्त कर दिया गया है, जिनमें खुशवीर सिंह, ओम प्रकाश हुडला, सुरे टांक को हटा दिया जाता है तो संख्या बची 118.
अब इस 118 की संख्या में से पायलट खेमे के उन 19 विधायकों को हटा दिया जाता है जो पायलट खेमे के हैं और उन्हे विधानसभा अध्यक्ष को व्हीप के तहत नोटिस भेजा गया तो संख्या बची 99.
गहलोत खेमे में चूंकि मास्टर भंवरलाल मेघवाल भी अभी मौजूद नहीं हैं क्योंकि वो अस्पताल में भर्ती हैं तो उनको भी हटा दिया जाए तो 99 में से एक विधायक और कम किया जाता है तो कुल संख्या बची 98. यानी इस केलकुलेशन से साफ है कि अशोक गहलोत सरकार के पास इस वक्त 98 का आंकड़ा स्पष्ट तौर पर है.
अब बात आती है 2 बीटीपी और 2 कम्यूनिस्ट पार्टी के विधायकों की. जिनकी पार्टी ने व्हीप जारी कर रखा है कि वो इस खेमे की राजनीति से दूर रहेंगे, किसी भी गुट में नहीं जाएंगे ना ही किसी भी तरह के फ्लोर टेस्ट में शामिल होंगे तो इसके बाद उन्होंने इससे दूरी बना ली है. यदि यह चार विधायक भी एक बारगी गहलोत सरकार के साथ मान लिए जाएं जिसकी हालांकि संभावना काफी कम है तो भी गहलोत के पास 102 ही विधायक होते हैं यानी 109 विधायक तो किसी भी सूरत में सरकार के पास नहीं हैं जिसके दावे गहलोत खेमे द्वारा लगातार किए जा रहे हैं.
यही कारण है कि सचिन पायलट खेमा अभी तक अपनी बात पर काबिज है और सरकार गिेराने को लेकर कॉन्फिडेंट है. वहीं यही कारण है कि फ्लोर टेस्ट की मांग से अशोक गहलोत सरकार फिलहाल बचना चाहती है.
बड़ी बात यह है कि खुद पायलट खेमा अपने पास 30 विधायक होने की बात कह रहा था. वहां भी यह आंकड़ा पूरा नहीं है. अब पायलट खेमा अपने पास 25 विधायक होने का दावा कर रहा है. जिसमें 2 बीटीपी, कांग्रेस की ओर से जिन तीन विधायकों खुशवीर सिंह, ओम प्रकाश हुडला, सुरेश टांक का पार्टी से संबंध समाप्त कर दिया गया वो विधायक शामिल है, तो यह आंकड़ा खुद के 19 विधायकों को मिलाकर कुल चौबिस पहुंचता है. वहीं कम्यूनिस्ट पार्टी के दो विधायकों को भी एकबारगी गहलोत सरकार के खिलाफ मान लिया जाए तो पायलट के पास एक तरह से 26 विधायक माने जा सकते हैं. हालांकि कम्यूनिस्ट पार्टी के एक विधायक बलवान पूनिया लगातार गहलोत खेमे में सक्रिय हैं जिससे पायलट खेमा उनका नाम हटाकर अपने पास कुल 25 विधायकों का जुगाड़ बता रहा है. पर बड़ी बात यह है कि BTP और माकपा ने अभी तक पूरी तरह से अपने पत्ते नहीं खोले हैं.जिससे पायलट और गहलोत दोनों ही खेमे चिंतित हैं.
हालांकि गुरुवार को BTP के पदाधिकारियों ने एक प्रेसवार्ता कर साफ कहा कि उनके दोनों विधायक सरकार को गिराने वालों के साथ नहीं बल्कि सरकार के साथ रहेंगे. ऐसे में गहलोत सरकार के लिए यह राहत की खबर कही जा सकती है.