हैदराबाद। उपराष्ट्रपति एम. वेंकया नायडु ने कहा है कि थेलेसीमिया और सिकलसेल एनीमिया की रोकथाम में बड़ी बाधा, इस बारे में जानकारी का अभाव है। उच्च गुणवत्तावाली और सहज-सुलभ स्वास्थ्य देखभाल मुहैया कराना सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की साझा जिम्मेदारी है।
देश में अणुवांशिक बीमारियों के भारी दबाव से निपटने के लिए निवारक उपायों पर ध्यान केन्द्रित करने की जरूरत है।
साथ ही उन्होंने ग्रामीण भारत में स्वास्थ्यकर्मियों के अभाव को पूरा करने के लिए युवा चिकित्सकों के लिए ग्रामीण सेवा को अनिवार्य बनाने का सुझाव दिया।
उपराष्ट्रपति ने हैदराबाद के थेलेसीमिया तथा सिकलसेल सोसाइटी में ब्लड ट्रांस्फ्यूजन यूनिट और एक अत्याधुनिक डायग्नॉस्टिक प्रयोगशाला का उद्घाटन किया और इस मौके पर यह बात कही।
उपराष्ट्रपति एम. वेंकया नायडु ने आज देश में थेलेसीमिया और सिकलसेल एनीमिया जैसी अणुवांशिक बीमारियों के भारी दबाव से निपटने के लिए निवारक उपायों की महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने राज्यों को अनुवांशिक बीमारियों की समय से पहचान करने और उसका प्रबंधन करने के लिए बच्चों की बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग कराने का सुझाव दिया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि आजादी के बाद से देश में विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों में पर्याप्त सुधार आया है, लेकिन अभी भी सभी लोगों के लिए गुणवत्तापूर्ण और वहनीय स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था कायम करना एक चुनौती बनी हुई है। स्वास्थ्य देखभाल क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन के अभाव को पूरा करने की जरूरत पर बल देते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि पीजी कोर्सेस में प्रवेश से पहले युवा चिकित्सकों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा को अनिवार्य किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं तक सबकी पहुंच सुनिश्चित करने का कम लागत वाला एक अन्य तरीका ग्रामीण इलाकों में डिजिटल माध्यम से ई-हेल्थ पहलों को बढ़ाना हो सकता है।
आज हैदराबाद स्थित थेलेसीमिया तथा सिकलसेल सोसाइटी में दूसरे ब्लड ट्रांस्फ्यूजन यूनिट तथा एक अत्याधुनिक डायग्नॉस्टिक प्रयोगशाला का उद्घाटन करते हुए उपराष्ट्रपति ने निजी क्षेत्र और स्वयंसेवी संस्थाओं से अपील की कि वे अनुवांशिक बीमारियों से निपटने के लिए किए जा रहे सरकार के प्रयासों में सहयोग करें। श्री नायडु ने इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि इन अनुवांशिक बीमारियों के लिए उपलब्ध उपचार के दो विकल्प- अस्थिमज्जा प्रतिरोपण तथा नियमित तौर पर ब्लड ट्रांस्फ्यूजन करना हैं, जो कि काफी महंगे और बच्चों के लिए परेशानी भरे हैं। उपराष्ट्रपति ने थेलेसीमिया तथा सिकलसेल एनीमिया की चुनौती से निपटने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की अपील की।