जयपुर. राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने अगले 8 माह में 10 लाख और महिलाओं को राजीविका से जोड़ने का मिशन तय किया है। इसके बाद राजीविका के जरिए रोजगार पाने वाली महिलाओं की संख्या 30 लाख से बढ़कर 40 लाख हो जाएगी। राजीविका के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए यह अहम लक्ष्य तय किया गया है।
राजीविका की साधारण सभा की प्रथम बैठक की अध्यक्षता करते हुए ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री रमेश चन्द मीना एक्शन मोड में नजर आए। उन्होंने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि यह महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने का एक बडा मिशन है इसमें भ्रष्टाचार और लापरवाही दोनों बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राजीविका में नवाचारों के जरिए प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक रूप से अक्षम अधिक से अधिक महिलाओं की आय बढाकर उनके सशक्तिकरण का यह प्रयास है। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को जैविक खेती से जोड़ना, महिला बैंक की स्थापना, दुग्ध डेयरी, शहद निर्माण, सोलर ऊर्जा उपकरण, अनाज ग्रेडिंग जैसे व्यवसाय, ऑनलाइन मार्केंटिंग, डिजिटल वीडियो बनाने का प्रशिक्षण, सूचना सखियों के जरिए लोक कल्याणकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार जैसे प्रमुख प्रयास इसमें शामिल हैं।
शासन सचिवालय स्थित कॉन्फ्रेंस हाल में सम्पन्न बैठक में उन्होंने निर्देशित किया कि जहां जमीन और पशुओं की उपलब्धता है, वहां की गरीब महिलाओं को प्राथमिकता के साथ जैविक एवं उन्नत कृषि से जोड़ने के प्रयास किए जाएं। उन्होने साधारण सभा की बैठक हर छह माह में एवं शासी समिति की बैठक प्रतिवर्ष आयोजित करने के अधिकारियों को निर्देश दिए।
उन्होंने निर्देश दिए कि जिला कलक्टर्स की बीस सूत्री कार्यक्रम जैसी बैठकों में राजीविका को भी एजेंण्डे में आवश्यक रूप से शामिल किया जाए। साथ ही पंचायत समिति एवं जिला परिषद की साधारण सभा में भी इसके सम्बन्ध में चर्चा हो एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों को समय-समय पर इन योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जावे।
ग्रामीण विकास मंत्री ने कन्वर्जेंस की योजनाओं के लिए लाभार्थी महिलाओं के चयन के परम्परागत तरीके में बदलाव, बाजार से खरीदकर अनाज विक्रय करने के बजाय अनाज की ग्रेडिंग एवं प्रोसिंग से महिलाओं की आय बढाने का सुझाव दिया। उन्होंने मंत्रीगण से राजीविका की महिलाओं द्वारा उत्पादित सामग्री की आरटीपीपी एक्ट के दायरे में विभिन्न विभाग में सीधी खरीद को अनुमत किए जाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि जल्द ही महिला बैंक भी स्वरूप ले लेगा जिसके लिए महिला कॉपरेटिव बैंक के लिए तेलंगाना के साथ एमओयू किया गया है।
उन्होंने सभी विभागों से अनुरोध किया कि वे अपनी योजनाओं का प्रचार-प्रसार राजीविका के स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं से कराएं। सोशल ऑडिट, प्रधानमंत्री आवास योजना, समाज कल्याण की विभिन्न योजनाओं का वे प्रभावी प्रचार कर सकती हैं एवं इससे महिलाओं की आय भी बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 30 लाख महिलाएं राजीविका के स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं जो अगले वर्ष मार्च तक 40 लाख हो जाएंगी।
शिक्षा मंत्री बी.डी. कल्ला ने हर्बल एवं हॉर्टीकल्चर कृषि, अनाजों को रोस्टेड कर ब्राण्डिंग, एवं करीब 70 लाख विद्यार्थियों के लिए यूनिफॉर्म स्वयं सहायता समूहों के जरिए तैयार करवाने जैसे सुझाव एवं प्रस्ताव दिए। चिकित्सा मंत्री परसादीलाल मीणा ने राजीविका के माध्यम से सेनेट्री पैड निर्माण की हर जिले में 10 इकाई लगाने की योजना पर जल्द अमल किए जाने एवं जिलों की बैठकों के एजेण्डे में राजीविका कार्यों को शामिल कराने को कहा।
श्रम मंत्री सुखराम विश्नोई ने कमाण्ड क्षेत्र में महिलाओं को जैविक कृषि एवं सब्जियों के उत्पादन से जोड़ने एवं राजीविका के अन्तर्गत क्षेत्र में स्वयं सहायता समूहों द्वारा किए जा रहे कार्यों का अवलोकन कराने को कहा। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री टीकाराम जूली ने उत्पादों को प्रमोट करने के लिए राजीविका को एग्रेसिव मार्केटिंग से जोड़ने की आवश्यकता बताई। हर जिले में एक बड़ा बिक्री केन्द्र एवं उपयुक्त स्थानों पर उत्पादो के बोर्ड लगाए जाने का सुझाव दिया।
बैठक में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की प्रमुख शासन सचिव अपर्णा अरोरा, राज्य मिशन निदेशक राजीविका मंजू राजपाल, सचिव ग्रामीण विकास के. के. पाठक सहित विभिन्न सम्बन्धित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।