सुरेश प्रभु बने भारतीय खाद्य एवं कृषि चैंबर (ICFA) के नए चेयरमैन, कृषि निर्यात में अभूतपूर्व वृद्धि की दिशा में योगदान


भारतीय खाद्य और कृषि चैंबर (ICFA) ने पूर्व रेल मंत्री सुरेश प्रभु को अपना नया चेयरमैन नियुक्त किया है। ICFA के 24 सदस्यीय बोर्ड ने उनकी नियुक्ति पर सहमति जताई, जिससे यह निश्चित हुआ कि कृषि क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता और नेतृत्व की दिशा में एक नई शुरुआत होगी। सुरेश प्रभु की यह नियुक्ति भारतीय कृषि और खाद्य उद्योग के विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, क्योंकि उनके पास इस क्षेत्र में सुधार और नीति निर्माण का व्यापक अनुभव है।

सुरेश प्रभु के नेतृत्व में 2018 में भारत ने अपनी पहली कृषि निर्यात नीति लागू की थी, जो आज एक महत्वपूर्ण सफलता का प्रतीक मानी जाती है। इस नीति के चलते भारतीय कृषि निर्यात में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। पहले जहां कृषि निर्यात 15 मिलियन मीट्रिक टन था, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 38 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। उनके योगदान ने भारत को वैश्विक कृषि बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने में मदद की, जिससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि हुई, बल्कि कृषि उत्पादों की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ।

नए पद पर नियुक्त होने के बाद सुरेश प्रभु ने कहा, "मैं ICFA का चेयरमैन बनने पर गर्व महसूस कर रहा हूं और मुझे विश्वास है कि हम इस क्षेत्र में और अधिक सुधार कर सकते हैं। हमारी प्राथमिकता किसानों की आय को बढ़ाना, कृषि निर्यात को नई ऊंचाइयों तक ले जाना और भारतीय कृषि को वैश्विक बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना होगी।" उनका मानना है कि कृषि क्षेत्र के विकास के लिए सरकार और निजी क्षेत्र दोनों को मिलकर काम करना चाहिए ताकि यह क्षेत्र तेजी से विकास कर सके।

सुरेश प्रभु ने वाणिज्य, उद्योग, और रेल मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार संभाला है। उनके कार्यकाल में कई नीतियां और योजनाएं लागू की गईं, जिनका प्रभाव भारतीय कृषि और खाद्य क्षेत्र पर व्यापक था। उनकी कृषि निर्यात नीति ने भारतीय उत्पादों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद की और साथ ही गुणवत्ता सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए।

अब उनके नए पद पर आने से यह उम्मीद जताई जा रही है कि वह ICFA के माध्यम से और अधिक सुधारात्मक कदम उठा सकते हैं। उन्हें विश्वास है कि ICFA का समर्थन और उनके नेतृत्व में कृषि निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, जिससे भारतीय किसानों को लाभ होगा और खाद्य सुरक्षा के मुद्दे पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

उनकी नियुक्ति से यह भी संभावना जताई जा रही है कि कृषि क्षेत्र के लिए नई नीतियां और योजनाएं तैयार की जाएंगी, जो भारतीय कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने में मदद करेंगी। ICFA की इस नियुक्ति से भारतीय कृषि क्षेत्र में नई उम्मीदों का जन्म होता है, और सुरेश प्रभु के नेतृत्व में भारतीय खाद्य और कृषि उद्योग में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।