सुप्रीम कोर्ट ने पराली जलाने पर कड़ा रुख अपनाया, अधिकारियों से पूछे सख्त सवाल


सुप्रीम कोर्ट ने पराली जलाने के मामले में कड़ी सख्ती दिखाते हुए संबंधित अधिकारियों और प्रदूषण नियंत्रण समिति के एक्सपर्ट्स से सवाल किया है कि अब तक पराली जलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की गई। अदालत ने वायु प्रदूषण की गंभीरता को देखते हुए यह चिंता जताई कि इसके बावजूद किसानों द्वारा पराली जलाने की घटनाओं में कमी क्यों नहीं आ रही है।

पराली जलाने से हर साल खासकर उत्तर भारत में वायु प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुंच जाता है, जिससे दिल्ली-एनसीआर सहित कई राज्यों में हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंच जाती है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि पराली जलाने पर लगाम लगाने में नाकामी प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने में सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। इस मामले में कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से जवाबदेही तय करने की बात कही।

हालांकि, वायु प्रदूषण के मुद्दे पर आज सुनवाई टाल दी गई, लेकिन अदालत ने प्रदूषण नियंत्रण कमिटी के विशेषज्ञों की जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े किए। कोर्ट ने पूछा कि अब तक किस तरह के कदम उठाए गए हैं और क्यों स्थिति में सुधार देखने को नहीं मिल रहा है।

यह मामला हर साल सर्दियों के मौसम में होने वाले गंभीर वायु प्रदूषण से जुड़ा है, जिसमें पराली जलाने का प्रमुख योगदान होता है। अदालत ने साफ किया कि इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने की जरूरत है, ताकि लोगों को साफ और स्वच्छ हवा मिल सके और पर्यावरण को भी नुकसान से बचाया जा सके।