भारी पड़ा विधायक को बड़बोलापन! दुर्व्यवहार के खिलाफ लामबंद हुए राजस्थान के प्रशासनिक अधिकारी, कई संगठनों ने दिया समर्थन


जयपुर. राजस्थान में अलवर के बहरोड़ से विधायक बलजीत यादव को 'डर्टी पॉलिटिक्स' भारी पड़ती नजर आ रही है. बहरोड़ में विधायक बलजीत यादव द्वारा लोगों की भीड़ लेकर उपखंड कार्यालय में उपखंड अधिकारी के साथ अभद्र व्यवहार के मामले में राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी लामबंद हो गए हैं. इतना ही नहीं राजस्थान प्रशासनिक सेवा परिषद अध्यक्ष शाहीन अली खान के नेतृत्व में प्रशासनिक अधिकारियों ने एक अर्जेंट मीटिंग बुलाकर विधायक पर ना केवल एसडीएम संतोष कुमार मीणा को बंधक बनाने का आरोप लगाया गया बल्कि विधायक द्वारा एसडीएम पर शराब पीकर कार्यालय आने के झूठे आरोप लगाने पर भी कड़ा आक्रोश जताया गया. और मामले में मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर तुरंत विधायक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई. 

बैठक में यह भी बता उठाई गई कि जल्द कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो राजस्थान के प्रशासनिक अधिकारी एक बड़ा आंदोलन का भी रूख अख्तियार करेंगे. 
परिषद के अध्यक्ष शाहीन अली खान ने बताया कि विधायक द्वारा पूर्व में भी अन्य अधिकारियों के साथ भी ऐसा व्यवहार किया गया, ऐसे में कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले समय में कर्मचारी और अधिकारी एकजुट होंगे, जिससे प्रशासनिक गतिरोध उत्पन्न होने की भी संभावना है. अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के साथ राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव निरंजन आर्य को भी ज्ञापन भेज कार्रवाई की मांग की है.

 

अन्य संगठन भी साथ


उधर राजस्थान कानूनगो संघ, राजस्थान पटवार संघ सहित कई सामा​जिक संगठन भी एसडीएम के समर्थन में आ गए हैं और विधायक बलजीत यादव के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. 

 

यह था मामला


बाइपास निर्माण में भूमि अवाप्ति मुआवजा देने में भ्रष्टाचार करने और कार्यालय में नहीं बैठने की शिकायतों पर सोमवार दोपहर को विधायक बलजीत यादव एसडीएम कार्यालय पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान कार्यालय पर ताला लगा मिलने और स्टाफ नहीं होने पर नाराज विधायक ने एसडीएम को मौके पर बुलाया तो वे ढाई घंटे देरी से आए। इस पर विधायक ने उन्हें लताड़ लगाई और कहा कि ऐसे अधिकारियों को नहीं बख्शा जाएगा।
इस दौरान उनका एसडीएम पर शराब पीकर आने, उनको सीट पर बंधक बनाए रखने का वीडियो भी वायरल हो गया. 
विधायक बलजीत यादव आ आरोप था कि बहरोड़ बाइपास निर्माण भूमि अवाप्ति का मुआवजा देने में भ्रष्टाचार करने, किसानों को चक्कर कटवाने, एक निजी बैंक में खाता खुलवाने के लिए बाध्य करने और कार्यालय में नहीं बैठकर निवास या बाहर होटलों में डील करने की शिकायतें मिल रही थी।
उधर एसडीएम ने इन आरोपों का खण्डन किया और खुद का मेडिकल भी करवाया जिसमें कही भी शराब पीने की बात साबित नहीं हुई और विधायक के आरोप गलत साबित हो गया.