अब अजमेर की ख्वाजा साहब की दरगाह में हिन्दू प्रतीक चिन्ह होने का दावा, प्रशासन अलर्ट, दरगाह की सुरक्षा बढ़ाई गई


दिल्ली स्थित महाराणा प्रताप सेना द्वारा ट्वीट कर सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में हिन्दू प्रतीक चिन्ह होने का दावा किया गया। इसमें कथित तौर पर हिन्दू देवी-देवताओं से जुड़े चिन्ह बताए गए। ज्यों ही इसकी सूचना प्रशासन तक पहुंची एकाएक हड़कंप मच गया। जिला कलक्टर अंशदीप के निर्देश पर एडीएम सिटी भावना गर्ग तत्काल दरगाह पहुंची। उनके अलावा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण वैभव शर्मा सहित अन्य भी पहुंचे। महाराणा प्रताप सेना ने यह दावा किया है कि ख्वाजा साहब की दरगाह के स्थान पर पहले एक शिव मंदिर था। प्रताप सेना ने एक फोटो भी जारी किया है, फोटो को दरगाह की खिड़कियों का बताया जा रहा है। उन खिड़कियों पर स्वस्तिक के निशान बने हुए हैं। इसको लेकर सेना ने सीएम अशोक गहलोत और केंद्र में मोदी सरकार को भी पत्र लिखा है।

अंजुमन सैयद जादगान कमेटी के सचिव वाहिद हुसैन अंगारा शाह ने कहा कि ये बयान आज ही नहीं आया, बल्कि आते रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि ऐसे बयान आगे भी आते रहेंगे। मजहब व धर्म के नाम पर अराजकता फैलाने के लिए लोग ऐसा करते हैं। अजमेर ही नहीं, सभी सूफी संतों के आशियाने ऐसे हैं, जहां हर मजहब के लोग आते हैं। शांति कायम रहे, इसके लिए हम सभी को सोचना चाहिए।

 

दरगाह की सुरक्षार्थ हाड़ी रानी बटालियन तैनात है। लेकिन संवेदनशील मामला होने से प्रशासन ने तत्काल पुलिस का अतिरिक्त जाप्ता तैनात किया। प्रशासनिक और पुलिस टीम ने दरगाह परिसर का जायजा लिया। साथ ही लोगों को शांति और धैर्य रखने की अपील की। सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह विश्व प्रसिद्ध है। ख्वाजा साहब 11 वीं शताब्दी में ईरान के संजर प्रांत से अजमेर आए थे। उन्होंने अजमेर में रहकर इबादत की थी। प्रतिवर्ष रजब माह में छह दिन तक उनका सालाना उर्स भरता है। इसमें भारत सहित विभिन्न देशों के जायरीन शिरकत करते हैं। दरगाह परिसर में ख्वाजा साहब की पत्नी सहित कई लोगों की मजार है।