जयपुर. केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने जयपुर में उत्तरी क्षेत्रीय परिषद की 30वीं बैठक की अध्यक्षता की। क्षेत्रीय परिषदें, केंद्र तथा राज्य के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध, विवादित अंतर्राज्यीय मुद्दों का आम सहमति से समाधान निकालने, राज्यों के बीच क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने और देशभर में लागू किये जाने वाले साझा राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर विचार विमर्श का यह एक महत्वपूर्ण मंच बना। अमित शाह ने कहा कि देश में 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री मोदी जी का इस बात पर जोर रहा है कि क्षेत्रीय परिषद की बैठकें नियमित हों, परिणामलक्षी हों और लंबित मुद्दों का समाधान निकालने में सफल हों। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में अंतर्राज्य परिषद, केंद्रीय गृह मंत्रालय और भारत सरकार के सभी मंत्रालय राज्य सरकारों के साथ मिलकर इस कार्य को गति देने का काम कर रहे हैं।
शाह ने कहा कि 2006 से 2013 के बीच क्षेत्रीय परिषद की 6 और इसकी स्थायी समिति की 8 बैठकें हुईं, जबकि 2014 से 2022 तक क्षेत्रीय परिषद की 19 और स्थायी समिति की 24 बैठकें हुईं, गृह मंत्री ने कहा कि हमने परिषद की बैठकों की गति को काफी बढ़ाया है और इन्हें परिणामलक्षी भी बनाया है, इस गति और परिणाम लाने के रिकार्ड को जारी रखना चाहिए।
उत्तरी क्षेत्र में राज्यों के परस्पर और केंद्र तथा राज्यों के बीच मुद्दों का समाधान देश के विकास और संघीय ढ़ांचे को मजबूत करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि वैसे तो परिषद की भूमिका सलाहकारी है, लेकिन मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि मेरे तीन साल के अनुभव में परिषद में 75 प्रतिशत से ज्यादा मसलों का आम सहमति से समाधा न किया गया।
इस प्रकार से एक बहुत अच्छी प्रक्रिया शुरू हुई है और हम सबको इसे जारी रखना चाहिए, हम राष्ट्रीय सहमति के मुद्दों पर शत-प्रतिशत परिणाम हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
उत्तरी क्षेत्रीय परिषद की 30वीं और इसकी स्थायी समिति की 19वीं बैठक में कुल 47 मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें से 4 मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण विषयों के रूप में चिन्हित किया गया।
कुल 47 मुद्दों में से 35 मामलों का समाधान निकाल लिया गया, यह सहकारी संघवाद की भावना से राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के प्रति मोदी सरकार के संकल्प और कटिबद्धता को दर्शाता है। बैठक में साइबर अपराध से निपटने के लिए सभी स्टेकहोल्डर को मिलकर एक प्रभावी रणनीति बनाने पर बल दिया गया, गृह मंत्री ने केंद्रीय गृह सचिव की अध्यक्षता में वित्तीय धोखाधड़ी और सोशल मीडिया के जरिए किये गये साइबर अपराधों को रोकने के लिए एक ऐसी रणनीति बनाने के लिए एक समिति गठित करने को कहा कि साइबर अपराध के बढ़ते खतरों और इनकी रोकथाम की रणनीति और विभिन्न माध्यमों के जरिए साइबर सावधानी संबंधी जागरूकता अभियान चलाने पर ज़ोर दिया।
संगठित और समन्वित साइबर हमलों से राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और आर्थिक गतिविधि पर गहरा प्रभाव पड़ता है, इसके मद्देनज़र राष्ट्रीय साइबर स्पेस और समग्र नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सबको मिलकर कार्य करने की जरूरत बताई।
यह बैठक जयपुर के होटल रामबाग पैलेस में आयोजित की गई। बैठक में उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा सहित उत्तर भारत के आठ राज्यों के प्रतिनिधि के रूप में मुख्यमंत्री और उप राज्यपाल शामिल हुए। बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की जगह वित्त मंत्री शामिल हुए हैं। परिषद में हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ शामिल रहे।