जयपुर। जलदाय एवं भूजल मंत्री डॉ. महेश जोशी की उपस्थिति में गुरुवार को शासन सचिवालय में अटल भूजल योजना के तहत प्रदेश में विभिन्न विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों की क्षमता संवर्द्धन के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों के सम्बंध में एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। सिंचाई प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान (इरिगेशन मैनेजमेंट एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट-आईएमटीआई), कोटा द्वारा चालू एवं अगले वित्तीय वर्ष में इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन किया जाएगा। इस एमओयू पर अटल भूजल योजना की स्टेट प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (एसपीएमयू) तथा भूजल विभाग की ओर से परियोजना निदेशक सूरजभान सिंह तथा आईएमटीआई, कोटा की तरफ से महानिदेशक श्री राजेन्द्र पारीक ने हस्ताक्षर किए।
इस अवसर पर जलदाय एवं भूजल विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) सुधांश पंत, अटल भूजल योजना के नोडल अधिकारी डॉ. वीएन भावे, मुख्य लेखाधिकारी श्री जेके जैन, प्रोक्योरमेंट अधिकारी रमाकांत मिश्रा, सहायक नोडल अधिकारी डॉ. विनय भारद्वाज सहित भूजल विभाग तथा आईएमटीआई, कोटा के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
इस एमओयू के तहत आईएमटीआई, कोटा द्वारा प्रदेश में राज्य, जिला, ब्लॉक एवं ग्राम पंचायत स्तर पर वर्ष 2021-22 में 56 तथा वर्ष 2022-23 में 336 प्रशिक्षण कार्यक्रमों को आयोजन किया जाएगा, जिन पर करीब 1.63 करोड़ रुपये व्यय होंगे। उल्लेखनीय है कि अटल भूजल योजना प्रदेश के 17 जिलों के 38 पंचायत समिति क्षेत्रों में लगभग 2 लाख हैक्टेयर भूमि पर क्रियान्वित की जा रही है। इससे करीब 1.55 लाख कृषकों को फायदा होगा। योजना में वर्षा जल संरक्षण को बढ़ावा देने एवं इसके न्यायसंगत उपयोग के लिए कृषि, उ़द्यानिकी, जलग्रहण एवं भूसंरक्षण, जल संसाधन, ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, वन, ऊर्जा तथा भूजल विभाग की योजनाओं द्वारा भूजल क्षेत्रों में कुशलतम जल प्रबंधन को प्रमोट करने एवं गिरते भूजल स्तर की रोकथाम का प्रमुख उद्देश्य निर्धारित किया गया है। अटल भूजल में सीधे जो दो घटक शामिल किये गये है, उनमें पहला संस्थागत सुदृढ़ीकरण एवं क्षमता संवर्धन द्वारा टिकाऊ भूजल प्रबंधन तथा दूसरा केन्द्र एवं राज्य की विभिन्न योजनाओं के समन्वय के साथ-साथ नवाचारों को बढावा देते हुए सामुदायिक सहभागिता से टिकाऊ भूजल प्रबंधन करना है। इनमें से प्रथम घटक के अंतर्गत योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए ये प्रशिक्षण आयोजित होंगे।