नई दिल्ली। खान मंत्रालय ने देश के विभिन्न प्रमुख खनिज राज्यों में वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान खनिज ब्लॉकों (एमएल-53, सीएल-52) की रिकॉर्ड संख्या में 105 नीलामियों की घोषणा की है, जिसके तहत 2015 में नीलामी व्यवस्था शुरू होने के बाद से अब तक कुल 259 नीलामियां हो चुकी हैं। राज्यों में से, मध्य प्रदेश 2022-23 के दौरान 29 नीलामियों की रिकॉर्ड के साथ सबसे आगे रहा और इस वर्ष के दौरान 33 नीलामी के साथ लौह अयस्क सबसे अधिक नीलामियों के साथ खनिज के रूप में उभरा। ये नीलामियां खनन पट्टों के साथ-साथ कम मूल्य के खनिजों, मध्यम मूल्य के खनिजों, उच्च मूल्य के खनिजों, महत्वपूर्ण खनिजों और कीमती धातुओं और पत्थरों सहित सभी श्रेणियों के खनिजों के लिए समग्र लाइसेंस के लिए थीं। खान और खनिज (विनियमन और विकास) अधिनियम, 1957 (एमएमडीआर अधिनियम, 1957) एक कानूनी ढांचा है जो भारत में खानों और खनिजों के विकास और विनियमन को नियंत्रित करता है। 12 जनवरी 2015 से प्रभावी, एमएमडीआर संशोधन अधिनियम, 2015 ने एमएमडीआर अधिनियम, 1957 में संशोधन किया था। संशोधन की मुख्य विशेषता नीलामी के माध्यम से खनिज रियायतें देने के प्रावधान को शामिल करना था, जो पहले "पहले आओ-पहले पाओ" पद्धति की जगह ले रहा था। इस संशोधन का उद्देश्य सभी स्तरों पर खनिज रियायतें प्रदान करने में पारदर्शिता को बढ़ाना और विवेकाधीन शक्तियों को समाप्त करना था। इसके अतिरिक्त, नीलामी पद्धति राज्य सरकार को अर्जित नीलामी खानों से उत्पन्न राजस्व की गारंटी देती है। नीलामी प्रणाली में दो प्रकार की रियायतें शामिल हैं, अर्थात् खनन पट्टों (एमएल) और समग्र लाइसेंस (सीएल), जिसमें पूर्वेक्षण लाइसेंसों के साथ-साथ खनन पट्टों को भी शामिल किया गया है।