राजस्थान सरकार के मंत्री ने पेश की मानवता की मिसाल, पद और प्रभाव का घमण्ड छोड़ फुटपाथ पर गरीब को तड़पते देख खुद पहुंचे मदद को


जयपुर (आलोक शर्मा). कहते हैं इंसान तभी इंसान कहलाता है, जब वह अपनी मानवता दिखाता है. मानवता की सेवा करने वाले हाथ उतने ही धन्य होते हैं, जितने परमात्मा की प्रार्थना करने वाले होंठ। कई बड़े लोग जहां पद और प्रभाव के घमण्ड में मानव सेवा तो दूर की बात गरीबों, जरूरतमंदों, पीड़ितों और असहायों की ओर देखना तक पसंद नहीं करते, उस दौर में आज भी कई लोगों के दिलों में पद और प्रभाव प्राप्त करने के बाद भी इंसानियत नजर आती है. ऐसा ही नायाब और दिल को छू लेने वाला उदाहरण पेश किया राजस्थान सरकार के परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने. 

जो बुधवार शाम 4:00 बजे अपने निवास से सुभाष नगर में एक तीये की बैठक में जा रहे थे, तभी उनकी नजर खासा कोठी पुलिया के नीचे तड़पते हुए एक गरीब, असहाय व्यक्ति पर पड़ी और तुरंत गाड़ी को रूकवाकर उस व्यक्ति तक पहुंचकर उसके हाल जाने. तो पता चला कि उस व्यक्ति ने तीन दिन से अन्न का दाना तक पेट में नहीं डाला जिससे वो तड़प रहा था. मरीज ने अपना नाम अनिल बताया, उसकी हालत इतनी गंभीर थी कि पैरों पर हरे जख्मों में किड़े अपना डेरा डालने लगे थे, घाव कम होने के बजाए नासूर सा नजर आ रहा था. 

जिसके बाद मंत्री खाचरियावास ने तुरंत कांवटिया हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. हर्षवर्धन को एंबुलेंस सहित मौके पर बुलाया और मरीज को हॉस्पिटल में इलाज हेतु तुरंत एडमिट करने के लिए निर्देशित किया. और अपनी जेब से तुरंत आर्थिक मदद देते हुए, अस्पताल के अधीक्षक को गरीब के लिए प्राथमिकता से निशुल्क भोजन और स्वास्थ्य इलाज देने के निर्देश दिए. इतना ही नहीं मरीज को एंबुलेंस में पहुंचाने में भी खुद स्टाफ की मदद की.

मंत्री खाचरियावास ने इस पूरे प्रकरण मे हॉस्पिटल अधीक्षक डॉक्टर हर्षवर्धन, पुलिस प्रशासन एवं एनजीओ को भी मौके पर बुलाकर तुरंत इलाज और मदद के निर्देश दिए. वे स्वयं 1 घंटे तक वहीं खड़े होकर मरीज को एंबुलेंस में भिजवाने और भोजन की व्यवस्था में लगे रहे. और उन्होंने अपने प्रस्तावित कार्यक्रम पोस्टपोंड कर पूरा समय गरीब की मदद में लगाया. मौके पर मंत्री की इस सक्रियता और मानवीय पहल को देखकर राहगीर भी मंत्री का आभार जताते नजर आए. और इस पुण्य काम के लिए जिंदाबाद के नारे लगाने लगे. 

बता दें कि मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने उस वक्त कोरोना संकटकाल की दूसरी लहर में जब कई मंत्री, विधायक, नेता और सांसद आमजन की जरूरत के वक्त घरों में कहीं आइसोलेट हुए बैठे थे तब भी कोविड केयर सेंटर से लेकर अस्पतालों तक का जायजा लेते देखे गए थे. उन्होंने अपनी जान की परवाह किए ​बिना अस्पतालों में बेहतर व्यवस्था के लिए और लोगों की पूरी मदद में समय लगाया. निजी अस्पतालों द्वारा मनमाने पैसे वसूलने वाले अस्पतालों के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोला. तक भी उनके कार्य को सराहना मिली थी, क्योंकि यह वो वक्त था जब लोगों को अपने चुने हुए नेताओं की सबसे ज्यादा जरूरत थी और अधिकांश नेता उस वक्त व्य​वस्थाओं का जायजा लेना तो दूर की बात मदद के लिए फोन तक नहीं उठाते थे. जबकि मंत्री प्रतापसिंह मरीजों और उनके परिजनों को किसी भी तरह की मदद के लिए अपने नम्बर लिखवाकर आते थे. मानवीयता की मिसाल पेश की. 


 

अपने लिए जिए तो क्या जिए...
मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि जिस जनता ने उन्हें चुना ही जन सेवा के लिए है और यदि वो ऐसे जरूरतमंदों की मदद ही नहीं कर पाए तो ऐसे जनप्रतिनिधि होने पर लानत है. उन्होंने कहा कि दूसरों के लिए जिया जाने वाला जीवन ही लाभप्रद है, बाकि पद और प्रभाव कभी भी जा सकता है लेकिन मानव सेवा के लिए किया गया पुण्य हमेशा भगवान के आशीर्वाद के समान है. और फिर वैसे भी अपने लिए जिए तो क्या जिए.