मणिपुर हिंसा: सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता, 10 उग्रवादी ढेर, जिरीबाम में कर्फ्यू, कुकी-जो काउंसिल ने बंद का किया आह्वान


मणिपुर में जातीय संघर्ष और उग्रवादियों के हमलों के बीच सुरक्षा बलों को सोमवार को एक बड़ी सफलता मिली, जब उन्होंने जिरीबाम जिले के बोरोबेक्रा क्षेत्र में 10 उग्रवादियों को मार गिराया। इस ऑपरेशन के दौरान सीआरपीएफ के एक जवान को गंभीर चोटें आईं। इसके बाद, कुकी-जो काउंसिल ने इस घटना के विरोध में 12 नवंबर को राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है। हिंसा और अफवाहों को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने जिरीबाम जिले में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू कर दिया है।

मणिपुर में पिछले कुछ महीनों से जातीय संघर्ष की स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है, और उग्रवादी हमले अब भी जारी हैं। सुरक्षा बलों की इस सफलता के बावजूद, उग्रवादियों द्वारा किसानों पर हमले जारी हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भय का माहौल है। सोमवार को इंफाल घाटी के आसपास के इलाके में उग्रवादियों ने गोलीबारी की, जिससे एक किसान घायल हो गया। यह हमला पिछले तीन दिनों में किसानों पर किया गया तीसरा हमला था।

पुलिस के मुताबिक, उग्रवादियों ने कांगपोकपी जिले में भी गोलीबारी की, जिसमें एक और किसान घायल हुआ। घायल किसान को इलाज के लिए याइंगंगपोकपी स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। इससे पहले शनिवार को चुराचांदपुर जिले और रविवार को इंफाल पूर्व जिले में भी उग्रवादियों द्वारा हमले किए गए थे। इस प्रकार के हमलों की बढ़ती संख्या ने मणिपुर के कई हिस्सों में सुरक्षा स्थिति को और जटिल बना दिया है।

सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई के बावजूद, मणिपुर में हिंसा और असुरक्षा की स्थिति लगातार बनी हुई है। मणिपुर में पिछले वर्ष से शुरू हुए जातीय संघर्ष में अब तक 200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, और स्थिति के जल्द सामान्य होने की कोई संभावना नहीं दिख रही है।

इस हिंसा के बीच कुकी-जो काउंसिल ने 12 नवंबर को राज्यव्यापी बंद का ऐलान किया है, जो इस घटना के विरोध और अपनी मांगों को लेकर एक बड़ा प्रदर्शन होगा। बंद के दौरान सरकारी और निजी प्रतिष्ठानों के बंद रहने की संभावना है, और यातायात प्रभावित हो सकता है। इसके साथ ही प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पूरी तरह से तैयार रहने का दावा किया है।

कुल मिलाकर, मणिपुर में हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं और राज्य सरकार के लिए उग्रवाद और जातीय संघर्ष की स्थिति को संभालना एक बड़ी चुनौती बन गई है।