जयपुर. राजस्थान में दूध में की जाने वाली मिलावट और गुणवत्ता से छेड़छाड़ को लेकर राजस्थान सरकार सख्त है. राज्य सरकार के गोपालन मंत्री प्रमोद जैन भाया ने शुक्रवार को विधानसभा में दावा किया कि दूध की गुणवत्ता के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं हो, इसके लिए दूध की आधुनिक मशीनों से विभिन्न मानकों पर जांच की जाती है। उन्होंने बताया कि जयपुर दुग्ध संघ के एक टैंकर में निम्न गुणवत्ता का दूध पाया गया था तथा यह प्रकरण वर्तमान में एसओजी में लम्बित है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे शीघ्र जांच पूरी करने के लिए एसओजी को लिखेंगे।
भाया प्रश्नकाल में विधायकों द्वारा इस संबंध में पूछे गये पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने बताया कि दूध की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए तीन स्तरों पर दूध की जांच की जाती है। पहला जहां एकत्र किया जाता है फिर बीएमसी पर तथा अंत में डेयरी प्लांट पर। उन्होंने बताया कि दूध की जांच आधुनिक मशीनों से विशेषज्ञों द्वारा की जाती है।
इससे पहले विधायक कालीचरण सराफ के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में भाया ने बताया कि विगत दो वर्षों में जयपुर जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लि., जयपुर के दौसा स्थित अवशीतन केन्द्र, पर 18 दुग्ध समितियों/ संकलन केन्द्रों का निम्न स्तर का दूध पकड़ा गया है। उन्होंने बताया कि विगत 2 वर्षों में जयपुर दुग्ध संघ के एक टैंकर आरजे-29 जीए-7871 दिनांक 2 जुलाई 2020 को डेयरी डॉक पर आया था, जिसकी जांच करने पर निम्न गुणवत्ता का दूध पाया गया। जांच में आर.एम. वैल्यू 19.2 थी जो कि निर्धारित मापदण्डोें से कम थी, जिसे अस्वीकार कर नष्ट करवा दिया गया था। यह दूध दो बी.एम.सी. चांदुसा एवं नायला की ढाणी का था। दोनों बी.एम.सी. से प्राप्त दूध की जांच करने पर गुणवत्ता में सही पाए गये थे। बी.एम.सी. का दूध सही था, टैंकर मालिक नायला की ढाणी का था। नायला की ढाणी बी.एम.सी. को तुरन्त प्रभाव से बन्द कर दिया गया था।
उन्होंने बताया कि इस प्रकरण की जांच एस.ओ.जी. द्वारा की जा रही है। संघ के रिकार्ड के अनुसार जांच का अन्तिम रूप से कोई परिणाम प्राप्त नहीं हुआ है। प्रकरण से सम्बन्धित वाद उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
भाया ने बताया कि विगत दो वर्षों में जयपुर जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लि., जयपुर के एक ही टैंकर में निम्न स्तर का दुग्ध पकड़ा गया था। शेष जिला दुग्ध संघों के अवशीतन केन्द्रों पर निम्न स्तर के दूध का टैंकर नहीं पकड़ा गया है। उन्होंने बताया कि निम्न स्तर का दूध भेजने वाली 18 दुग्ध समितियों/ संकलन केन्द्रों से तत्काल दूध लेना बन्द कर दिया गया। निम्न गुणवत्ता का दूध देने वाले दुग्ध उत्पादकों की पहचान कर उनके विरूद्ध कार्यवाही सम्बन्धी दुग्ध उत्पा्दक सहकारी समिति द्वारा की जाती है। जिससे समिति सिर्फ उच्च गुणवत्ता का दूध भेजे। जयपुर डेयरी संयंत्र में समिति नायला की ढाणी का दूध निम्न गुणवत्ता का प्राप्तः हुआ इसका वाद उच्च न्यायालय में लंबित है ।