सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश संजीव खन्ना को गुरुवार को देश का 51वां प्रधान न्यायाधीश (CJI) नियुक्त किया गया है। वह 11 नवंबर 2024 को शपथ ग्रहण करेंगे, जब मौजूदा प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ 10 नवंबर को 65 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर सेवानिवृत्त हो जाएंगे। केंद्र सरकार ने न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी है, जो सीजेआई के रूप में छह महीने का कार्यकाल पूरा करेंगे और 13 मई 2025 को सेवानिवृत्त होंगे।
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पृष्ठभूमि और कार्यकाल
न्यायमूर्ति खन्ना का कानूनी करियर 2005 में दिल्ली उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शुरू हुआ। 2006 में उन्हें स्थायी न्यायाधीश बनाया गया। इसके बाद, 18 जनवरी 2019 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया। न्यायमूर्ति खन्ना का जन्म 14 मई 1960 को हुआ था, और उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से कानून की पढ़ाई की।
न्यायमूर्ति खन्ना के कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई ऐतिहासिक निर्णय दिए हैं। इनमें से एक प्रमुख निर्णय चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) के इस्तेमाल को बरकरार रखना था। वे पांच जजों की उस बेंच का भी हिस्सा थे, जिसने राजनीतिक दलों के वित्तपोषण के लिए बनाई गई चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक घोषित किया था।
अनुच्छेद 370 और अन्य महत्वपूर्ण निर्णय
न्यायमूर्ति खन्ना ने संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के केंद्र के 2019 के फैसले को बरकरार रखने वाली पांच जजों की बेंच में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह फैसला तत्कालीन जम्मू और कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा समाप्त करने से संबंधित था, जिसे भारत की न्यायिक और राजनीतिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है।
न्यायमूर्ति खन्ना के सुप्रीम कोर्ट में उनके कार्यकाल को उनके संतुलित और विस्तृत न्यायिक दृष्टिकोण के लिए याद किया जाएगा। उनकी फैसलों में संवैधानिक महत्व के मामलों पर उनका स्पष्ट दृष्टिकोण और संवेदनशीलता झलकती है। न्यायमूर्ति खन्ना का सीजेआई के रूप में कार्यकाल छोटा होगा, लेकिन उनकी न्यायिक यात्रा के अनुभवों ने उन्हें देश के सर्वोच्च न्यायालय में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला न्यायाधीश बनाया है।
सीजेआई चंद्रचूड़ की सेवानिवृत्ति
न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने 8 नवंबर 2022 को प्रधान न्यायाधीश के रूप में पदभार ग्रहण किया था। उनके कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई संवैधानिक और महत्वपूर्ण मामलों पर निर्णय दिए। उनके कार्यकाल के दौरान सुप्रीम कोर्ट में कई बड़े और ऐतिहासिक फैसले हुए। उनकी सेवानिवृत्ति के बाद, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट नई दिशा में काम करेगा।
न्यायमूर्ति खन्ना की नियुक्ति को भारत के न्यायिक तंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। उनके फैसलों की स्पष्टता और निष्पक्षता के चलते, उनसे अपेक्षा है कि वे न्यायालय की प्रतिष्ठा को और ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।