भारत की कभी सबसे लोकप्रिय एयरलाइन Jet Airways का सफर आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को Jet Airways के परिसमापन का आदेश जारी किया, जिससे एयरलाइन के पुनरुद्धार की आखिरी उम्मीद भी टूट गई। एक समय भारत के विमानन उद्योग में अग्रणी रहने वाली इस एयरलाइन ने अप्रैल 2019 में नकदी संकट के चलते अस्थायी रूप से परिचालन बंद कर दिया था। इसके बाद से एयरलाइन पर लगभग 8,500 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है, और हजारों करोड़ रुपये एजेंटों, यात्रियों और कर्मचारियों का अटका हुआ है।
Jet Airways का संचालन अप्रैल 2019 में अमृतसर से मुंबई की आखिरी उड़ान के बाद से बंद हो गया था, जिससे 20,000 से अधिक कर्मचारी बेरोजगार हो गए। यह एयरलाइन नरेश गोयल द्वारा स्थापित की गई थी, जिन्होंने इसे 1990 के दशक में एक एयर टैक्सी ऑपरेटर के रूप में शुरू किया था। Jet Airways ने जल्द ही भारत की प्रमुख निजी एयरलाइन के रूप में अपनी जगह बनाई, और एक समय कंपनी के पास 120 से अधिक विमानों का बेड़ा था। लेकिन बढ़ते वित्तीय संकट और प्रबंधन के मुद्दों के कारण यह एयरलाइन गिरावट की ओर बढ़ने लगी।
2019 में परिचालन बंद होने के बाद Jet Airways के लिए राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) में दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू की गई। इस प्रक्रिया में 2021 में जालान कलरॉक गठजोड़ (JKC) ने Jet Airways को पुनर्जीवित करने के लिए सफल बोली लगाई। लेकिन Jet Airways को पुनर्जीवित करने के प्रयासों में लगातार रुकावटें आईं, और ऋणदाताओं तथा JKC के बीच मतभेदों के कारण समाधान योजना ठप हो गई।
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने NCLAT के आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें JKC को Jet Airways का अधिग्रहण करने की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने अपने फैसले में JKC द्वारा जमा किए गए 200 करोड़ रुपये जब्त करने का निर्देश दिया और ऋणदाताओं को 150 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी भुनाने की अनुमति दी। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के साथ Jet Airways की पुनरुद्धार की सभी संभावनाएं खत्म हो गई हैं।
Jet Airways की धरोहर अब केवल कुछ धूल खाते विमानों और अधूरे वित्तीय दायित्वों में सिमट कर रह गई है। इस एयरलाइन का सफर एक युग का अंत है, जिसने भारतीय विमानन उद्योग में एक विशेष पहचान बनाई थी। अब Jet Airways का नाम भारतीय विमानन इतिहास का हिस्सा बनकर रह गया है, जिसमें कर्मचारियों, यात्रियों और ऋणदाताओं के लिए केवल अनुत्तरित प्रश्न बचे हैं।