नई दिल्ली (अंजली दाधीच)। इज़राइल और हिज़बुल्लाह के बीच तनाव लंबे समय से चले आ रहे क्षेत्रीय, राजनीतिक, और धार्मिक संघर्षों का परिणाम है। हिज़बुल्लाह, लेबनान आधारित एक शिया मुस्लिम संगठन और इज़राइल के बीच टकराव कई दशकों पुराना है। इस संघर्ष की जड़ें 1980 के दशक में मिलती हैं, जब इज़राइल ने लेबनान पर आक्रमण किया था। तब से लेकर आज तक यह तनाव विभिन्न कारणों से समय-समय पर उभरता रहा है।
1. 1982 का इज़राइल-लेबनान संघर्ष
हिज़बुल्लाह का गठन 1982 में हुआ था, जब इज़राइल ने दक्षिणी लेबनान पर कब्ज़ा कर लिया था। हिज़बुल्लाह का मुख्य उद्देश्य इज़राइल की सेना को लेबनान से बाहर निकालना और इज़राइल के खिलाफ एक प्रतिरोधी शक्ति के रूप में उभरना था। इस संगठन को ईरान और सीरिया का समर्थन प्राप्त है, जो इज़राइल के साथ इसके संघर्ष को और जटिल बनाता है।
2. क्षेत्रीय प्रभुत्व की लड़ाई
हिज़बुल्लाह को ईरान का व्यापक समर्थन प्राप्त है, जबकि इज़राइल को अमेरिका और पश्चिमी देशों का समर्थन मिलता है। यह संघर्ष केवल दो संगठनों के बीच नहीं है, बल्कि इसे व्यापक रूप से ईरान और इज़राइल के बीच प्रभुत्व की लड़ाई के रूप में भी देखा जा सकता है। हिज़बुल्लाह की सैन्य क्षमताएं इज़राइल के लिए एक स्थायी खतरा बनी हुई हैं, खासकर जब से हिज़बुल्लाह के पास रॉकेट और मिसाइलों का बड़ा भंडार है जो इज़राइल के महत्वपूर्ण शहरों को निशाना बना सकता है।
3. फिलिस्तीनी मुद्दा
फिलिस्तीन का मुद्दा भी इस संघर्ष का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। हिज़बुल्लाह इज़राइल की फिलिस्तीनी क्षेत्रों में नीतियों और कब्ज़े का कड़ा विरोध करता है। संगठन फिलिस्तीनी स्वतंत्रता का समर्थन करता है और इसे इज़राइल के खिलाफ अपने संघर्ष का एक प्रमुख कारण मानता है।
4. 2006 का युद्ध
2006 में हिज़बुल्लाह और इज़राइल के बीच एक बड़ा युद्ध हुआ था, जो लगभग 34 दिनों तक चला। इस युद्ध ने दोनों पक्षों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया। युद्ध के बाद हिज़बुल्लाह ने अपनी सैन्य क्षमताओं को और मजबूत किया, जिससे इज़राइल के लिए यह एक स्थायी खतरा बन गया है।
5. सीमा विवाद
लेबनान-इज़राइल सीमा पर कई विवादित इलाके हैं, जैसे शेबा फार्म्स, जो हिज़बुल्लाह और इज़राइल के बीच लगातार टकराव का कारण बने हुए हैं। हिज़बुल्लाह इन क्षेत्रों में इज़राइल की सैन्य उपस्थिति का विरोध करता है और समय-समय पर सीमावर्ती इलाकों में हमले करता रहा है।
इन सब कारणों से इज़राइल और हिज़बुल्लाह के बीच तनाव गहराता जा रहा है, और यह संघर्ष पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।