देश को आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने में कृषि वैज्ञानिकों की महती जवाबदारी: तोमर


मध्यप्रदेश। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि हमारे कृषि वैज्ञानिकों ने अनुसंधान से बहुत प्रगति की है। भारत आज अधिकांश खाद्य उत्पादों के मामले में पहले या दूसरे क्रम पर है। तोमर ने कहा कि यहां तक पहुंचने में किसानों के परिश्रम, सरकार की किसान हितैषी नीतियों व वैज्ञानिकों के अनुसंधान का योगदान है और कृषि उत्पादों की दृष्टि से हम सारी दुनिया में सीना तानकर खड़े हुए हैं।

अब जलवायु स्थितियां बदल रही है, इस चुनौती के मद्देनजर काम करना होगा। अब दलहन.तिलहन में भी आत्मनिर्भरता होना चाहिए। इसके लिए सरकार मिशन मोड में काम कर रही हैए लेकिन नीतियों व फंडिंग के साथ ही बीजों का आविष्कार ही ऐसा होना चाहिए जो उत्पादकता बढ़ाएं व देश को आत्मनिर्भरता की ओर ले जाएं। इसमें महती जवाबदारी कृषि वैज्ञानिकों की है, जिन्हें और काम करने की आवश्यकता है।

तोमर ने यह बात राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विण्विण्ए ग्वालियर द्वारा आयोजित 11वीं राष्ट्रीय बीज कांग्रेस.2022 के शुभारंभ में कहीं।

कार्यक्रम में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया वर्चुअल जुड़े, वहीं मण्प्रण् के कृषि मंत्री  कमल पटेल मंच पर उपस्थित थे। इस अवसर पर विण्विण् के नवनिर्मित सभागार का नामकरण स्वण् श्री दत्तोपंत ठेंगड़ी के नाम पर किया गया है। साथ ही स्टेट अकादमी ऑफ़ एग्रीकल्चरल एंड अलाइड साइंसेस का शुभारंभ किया गया। 

तोमर ने कहा कि स्वण् श्री ठेंगड़ी मौलिक चिंतक, राष्ट्रवादी विचारकए श्रमजीवी और ट्रेड यूनियन नेता थे। उन्होंने मजदूरों व किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा। ठेंगड़ी ने स्वदेशी भावना को बल दियाए जिससे स्थानीय उद्योगों के साथ राष्ट्र मजबूत हुआ, रोजगार के अवसर बड़ी संख्या में सृजित हुए। ठेंगड़ीजी के नाम पर सभागार बनना प्रेरणादायी है।