झारखंड में गुरुवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ। इस दौरान 11 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही राज्य कैबिनेट में अब मुख्यमंत्री समेत कुल 12 सदस्य हो गए हैं। इस मंत्रिमंडल में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के छह, कांग्रेस के चार और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के एक विधायक को शामिल किया गया है।
हेमंत सोरेन ने 28 नवंबर को झारखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। यह उनका चौथा कार्यकाल है। वे झामुमो के संस्थापक और झारखंड के तीन बार मुख्यमंत्री रहे शिबू सोरेन के बेटे हैं। साहेबगंज जिले की बरहेट विधानसभा सीट से हेमंत ने भाजपा उम्मीदवार गमलील हेम्ब्रोम को 39,791 वोटों के बड़े अंतर से हराया। उनकी पत्नी, कल्पना सोरेन, ने भी गांडेय सीट से जीत दर्ज की।
झारखंड के 24 साल के इतिहास में हेमंत सोरेन ऐसे पहले नेता बन गए हैं जिन्होंने चौथी बार मुख्यमंत्री पद संभाला है। इससे पहले तीन बार मुख्यमंत्री बनने वाले नेताओं में उनके पिता शिबू सोरेन, भाजपा नेता अर्जुन मुंडा और खुद हेमंत सोरेन शामिल हैं।
मंत्रिमंडल गठन में क्षेत्रीय संतुलन का विशेष ध्यान रखा गया है। सबसे अधिक प्रतिनिधित्व संथाल परगना को दिया गया है। इस क्षेत्र से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (साहेबगंज), दीपिका पांडेय सिंह (कांग्रेस, गोड्डा), संजय यादव (राजद, गोड्डा), हफीजुल हसन (झामुमो, देवघर), और इरफान अंसारी (कांग्रेस, जामताड़ा) को कैबिनेट में शामिल किया गया है।
उत्तर छोटानागपुर क्षेत्र से गिरिडीह के सुदिव्य कुमार (झामुमो) और बोकारो के योगेंद्र प्रसाद (झामुमो) को मंत्री बनाया गया। दक्षिण छोटानागपुर से लोहरदगा के चमरा लिंडा (झामुमो) और रांची की शिल्पी नेहा तिर्की (कांग्रेस) को स्थान मिला।
कोल्हान से पश्चिमी सिंहभूम जिले के रामदास सोरेन (घाटशिला, झामुमो) और दीपक बरुआ (चाइबासा, झामुमो) को मंत्री बनाया गया। पलामू क्षेत्र को एकमात्र प्रतिनिधित्व छतरपुर से कांग्रेस विधायक राधा कृष्ण किशोर के रूप में मिला।
हेमंत सोरेन ने मंत्रिमंडल विस्तार में क्षेत्रीय और जातीय प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता दी है। आदिवासी बाहुल्य इलाकों को अधिक स्थान देकर उन्होंने सरकार की प्राथमिकताएं स्पष्ट की हैं। इस विस्तार को उनके नेतृत्व में झारखंड के संतुलित विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।