नई दिल्ली. आजाद भारत के इतिहास में वह होने जा रहा है जिसकी कभी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. लेकिन कहते हैं कानून के समक्ष सब अपराधी बराबर हैं. जाति, धर्म, लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता. और इसी कड़ी में आजाद भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि किसी महिला को फांसी के तख्ते पर लटकाया जाएगा. बड़ी बात यह है कि इस फांसी को देने की तैयारियां शुरू कर दी गई है क्योंकि राष्ट्रपति से इस महिला की दया याचिका खारिज हो चुकी है.
अपने अंधे प्यार में पागल होकर 7 हत्याएं करने वाली शबनम की सुप्रीम कोर्ट के बाद राष्ट्रपति भवन से भी दया याचिका खारिज हो चुकी है. 8वीं पास प्रेमी के प्यार में पागल इस महिला ने अपने माता-पिता भाई-बहन समेत 7 लोगों की बेरहमी से हत्या की थी. जिसका सिर्फ एक कारण था कि शबनम के माता पिता प्रेमी से उसकी शादी कराने के लिए तैयार नहीं थे. बस इसी के बाद शबनम और उसके प्रेमी ने अप्रैल 2008 में इस खूनी साजिश को अंजाम दिया. 10 माह के मासूम भतीजे को भी नहीं बख्शा उसकी भी कुल्हाड़ी से गला काटकर हत्या कर दी.
वैसे तो मथुरा जेल में 150 साल पहले महिला फांसीघर बनाया गया था. लेकिन आजादी के बाद से अब तक किसी भी महिला को फांसी की सजा नहीं दी गई. वरिष्ठ जेल अधीक्षक शैलेंद्र कुमार मैत्रेय के मुताबिक 'अभी फांसी की तारीख तय नहीं है, लेकिन हमने तयारी शुरू कर दी है. डेथ वारंट जारी होते ही शबनम को फांसी दे दी जाएगी. हम अपने स्तर पर तैयारियां समय रहते पूरी कर रहे हैं.'
जज ने अपने फैसले में लिखा था कि यह जघंन्यतम अपराध है, इसलिए शबनम और उसके साथी प्रेमी सलीम दोनों को तब तक फांसी के फंदे पर लटकाया जाए जब तक उनका दम न निकल जाए.