सिविल लाइन्स वाले जो कांग्रेसी जयचंद अपने को राम का वंशज बता रहे हैं, उनके कृत्य रावण जैसे: गोपाल शर्मा


बीजेपी सत्ता में आएगी तो जयपुर के हसनपुरा का नाम हरीपुरा और रामगंज का नाम प्रभु रामगंज करवाएंगे।

जयपुर। सिविल लाइंस विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार गोपाल शर्मा ने क्षेत्र में कांग्रेस के प्रत्याशी प्रताप सिंह खाचरियावास पर खुलेआम लोकतंत्र का चीरहरण करने का आरोप लगाया है। गोपाल शर्मा ने एक पत्रकार वार्ता कर कहा कहने को तो सिविल लाइन से जयचंद कांग्रेसी प्रत्याशी खुद को राम का वंशज बताते हैं लेकिन उनकी हरकतें रावण से कम नहीं हैं। रावण को जैसे उसकी हरकतें और अहंकार ले डूबा था ठीक वैसा ही इनके साथ भी होगा। वो एक बार जरा यह पता कर लें कि राम की राह छोड़कर गलत कृत्य करने पर कौनसी धाराएं लगती हैं और जमानत भी होती है या नहीं। 

यदि प्रताप सिंह स्वयं को राम का वंशज बता रहे हैं तो वह यह भी जान ले कि गोपाल शर्मा भी राम के गुरु वशिष्ट के वंशज हैं। ऐसे में वह समझ लें कि राम ने ना तो कभी अपने गुरु पर न तो ब्लैकमेलर होने का आरोप लगाया ना ही कभी उनकी गाय चुराते थे। 

गोपाल शर्मा ने कहा कि यह विडंबना ही है कि चुनाव आयोग के अधिकारी और रिटर्निंग ऑफिसर भी सरेआम चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन होते हुए देख रहे हैं, फिर भी आंखें मूंदे बैठे हैं। गोपाल शर्मा ने कहा कि प्रताप सिंह ने शासन में रहते हुए जिन अधिकारियों और पुलिस की नियुक्ति अपने क्षेत्र में करवाई थी, वह अधिकारी और पुलिस भी उनका खुलेआम साथ दे रही है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में अपराधियों का एक ऐसा गिरोह सक्रिय हो चुका है जो भाजपा के कार्यकर्ताओं को उनके घर पर देर जाकर रात को धमकता है और चुनाव के बाद देख लेने की धमकी देता है। उन्होंने कहा कि हसनपुरा क्षेत्र में हाल ही में देर रात एक मंदिर की छज्जे पर बालकनी का निर्माण कर लिया गया और उसे बालकनी में शौचालय बनाकर उसकी नाली मंदिर में खोल दी गई। इसकी शिकायत प्रशासन को करने के बावजूद अब तक किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं की गई है। 

गोपाल शर्मा ने कहा कि भाजपा के झंडे और बैनर जिस तरह से प्रचार के लिए लगाए गए थे, उन्हें कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने प्रताप सिंह की बौखलाहट के चलते देर रात हटाने का काम किया है। उनका कहना था कि राजस्थान की राजनीति का इतिहास गौरवशाली रहा हैए यहां पक्ष और विपक्ष के नेता भले ही एक मत ना हो लेकिन उनमें मनभेद कभी नहीं रहे हैं, पूर्व उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत इसका उदाहरण है।