22 और 23 मई को पीएम मोदी के जापान दौरे पर चीन और रूस की पैनी नजर, जानें क्या है कारण


नई दिल्‍ली। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 और 23 मई को जापान का दौरा करेंगे। जापानी दौरा क्‍वाड देशों की बैठक के लिए आयोजित किया जा रहा है. बैठक में क्‍वाड नेताओं को हिंद-प्रशांत से जुड़े घटनाक्रम, साझा हितों से जुड़े समसामयिक वैश्विक मुद्दों पर विचारों के आदान-प्रदान का अवसर मिलेगा। बैठक में प्रधानमंत्री मोदी,जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन एवं आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री हिस्सा लेंगे। 

गौरतलब है कि मार्च 2021 में डिजिटल माध्यम से हुई पहली बैठक के बाद क्‍वाड नेताओं के बीच यह चौथी वार्ता है। वाशिंगटन में सितंबर 2021 में क्‍वाड नेताओं ने उपस्थित होकर बैठक में हिस्सा लिया था, जबकि मार्च 2022 में डिजिटल माध्यम से बैठक हुई थी। यह इस लिहाज से भी काफी अहम है, क्‍योंकि रूस यूक्रेन जंग के दौरान तीन देशों के राष्‍ट्राध्‍यक्ष एक मंच साझा करेंगे। इस दौरे में वह अमेरिका, जापान व आस्‍ट्रेलिया के राष्‍ट्राध्‍यक्षों के साथ अलग-अलग मुलाकात करेंगे। इन नेताओं की मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब यूक्रेन जंग के दौरान भारत और क्‍वाड देशों (Quad Summit) के बीच मतभेद गहरे हुए थे। क्‍वाड की इस बैठक में अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडन भी सम्‍मलित हो रहे हैं. कूटनीतिक लिहाज से क्‍वाड की यह बैठक काफी अहम है. भारत चीन सीमा विवाद को देखते हुए भारत के लिए क्‍वाड बेहद उपयोगी मंच है। वहीं रूस यूक्रेन वॉर के बीच बाइडेन और मोदी के बीच बातचीत के क्या नतीजे निकलते हैं इस पर भी रूस की चिंता बढ़ी हुई है. रूस किसी भी सूरत में नहीं चाहता कि भारत अमेरिका के दवाब में आकर कुछ ऐसा करे कि जिससे संकट की इस घड़ी में रूस को किसी भी तरह का नुकसान हो. क्योंकि यूक्रेन जंग को लेकर अमेरिका व क्‍वाड देशों के संबंधों में थोड़ा खिंचाव बना हुआ है. आलम यह है कि अमेरिका व आस्‍ट्रेलिया ने रूस के प्रति भारत की तटस्‍थता नीति की खुलकर निंदा कर चुके हैं. इस बैठक में अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडन भी भाग ले रहे हैं। इस लिहाज से यह बैठक और उपयोगी हो जाती है।

बैठक में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जापानी प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे। ऐसे में माना जा रहा है कि रिश्तों की कड़वाहट कम हो सकती है और मिठास फिर बढ़ सकती है. भारत और क्‍वाड देशों के संबंध एक बार फ‍िर मधुर होने की होने में मदद मिलेगी। खासकर अमेरिका और आस्‍ट्रेलिया से संबंध सामान्‍य होंगे। प्रो पंत ने कहा कि रूस यूक्रेन जंग के दौरान क्‍वाड के प्रमुख देशों (अमेरिका, आस्‍ट्रेलिया और जापान) के राष्‍ट्राध्‍यक्षों के साथ पीएम मोदी एक मंच साझा करेंगे। तीनों देशों के बीच यूक्रेन जंग के दौरान रूस के साथ संबंधों को लेकर मतभेद उत्‍पन्‍न हुए थे। खासकर अमेरिका और आस्‍ट्रेलिया ने प्रत्‍यक्ष या अप्रत्‍यक्ष रूप से भारत का रूस के प्रति झुकाव का आरोप लगाया था।


हालांकि, भारत ने अपने स्‍टैंड को क्‍लीयर कर दिया था। भारत का कहना है कि वह किसी भी तरह के जंग के खिलाफ है। भारत का मत है दोनों देशों को वार्ता के जरिए अपने मतभेदों का समाधान करना चाहिए। अमेरिका ने संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में रूस के खिलाफ हुए मतदान में भाग नहीं लेकर अमेरिका को और नाराज कर दिया था। भारत ने इस मामले में अपने दृष्टिकोण को साफ किया था। भारत ने साफ कर दिया था कि भारत और रूस के द्विपक्षीय संबंध काफी मायने रखते हैं। इसलिए वह रूस के खिलाफ मतदान में भाग नहीं ले सकता है। भारत ने यह भी कहा था कि अमेरिका को भारत के हितों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए।

उन्‍होंने कहा कि भारत के सामरिक जरूरतों के लिए रूस जितना उपयोगी है, उतना ही चीन की चुनौतियों से निपटने के लिए अमेरिका और क्‍वाड देशों का भी उसे साथ चाहिए। उन्‍होंने कहा भारत चीन सीमा विवाद को देखते हुए क्‍वाड भारत के लिए काफी अहम है। इसके अलावा दक्षिण चीन सागर और हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन की आक्रामकता भारत समेत दुनिया के लिए चिंता का व‍िषय है। ऐसे में क्‍वाड भारत के लिए काफी अहम है।

ऐसे में रूस की नजर जहां भारत और अमेरिका की वार्ता पर है वहीं चीन की नजर भारत की अमेरिका के साथ जापान के बड़े नेताओं की मुलाकात पर है.