पीएम मोदी ने कजान में पुतिन से की मुलाकात, द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देने की दिशा में उठाए कदम


BRICS Summit 2024: (आलोक शर्मा ) पीएम मोदी ने कजान में पुतिन से की मुलाकात, द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देने की दिशा में उठाए कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के कजान शहर में ब्रिक्स समिट 2024 में भाग लेने के लिए अपनी यात्रा शुरू की। मंगलवार को उनके आगमन पर भारतीय समुदाय ने एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत किया। प्रधानमंत्री मोदी की यह रूस यात्रा इस वर्ष में दूसरी बार हो रही है, इससे पहले वह जुलाई में मॉस्को गए थे। कजान में, प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। पुतिन ने भारत के कजान में वाणिज्य दूतावास खोलने के निर्णय का स्वागत किया, जिसे दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पुतिन ने कहा, "हमारी संयुक्त परियोजनाएं लगातार प्रगति कर रही हैं, और इस दूतावास से हमारे संबंधों को लाभ मिलेगा।" प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स का नेतृत्व करने के लिए रूस को बधाई देते हुए कहा, "पिछले 15 वर्षों में ब्रिक्स ने वैश्विक मंच पर अपनी छाप छोड़ी है। मैं कल होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए उत्सुक हूं।" उन्होंने कहा कि भारत संघर्ष का समाधान शांति के माध्यम से चाहता है और इस दिशा में हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार है। द्विपक्षीय वार्ता के दौरान, मोदी ने कजान शहर के साथ भारत के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा, "यह शहर हमारी सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।" उन्होंने पुतिन को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनकी गर्मजोशी और स्वागत ने उनके दौरे को खास बना दिया। संभावना है कि पीएम मोदी की इस ब्रिक्स समिट के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाकात हो सकती है, हालांकि इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कजान में होने वाले ब्रिक्स समिट का उद्देश्य विकासशील देशों के सहयोग को बढ़ावा देना और वैश्विक चुनौतियों का सामूहिक समाधान खोजने पर जोर देना है। यह सम्मेलन 23 और 24 अक्टूबर को आयोजित होगा, जिसमें विभिन्न देश अपने प्रतिनिधियों के साथ भाग लेंगे। इस तरह, प्रधानमंत्री मोदी की कजान यात्रा भारत-रूस के रिश्तों को और मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है, जिससे दोनों देशों के बीच सहयोग और स्थिरता में वृद्धि की उम्मीद की जा रही है।