जयपुर। कोरोना संकट के बीच लगातार बढ़ रहे हैं ब्लैक फंगस के खतरे को देखते हुए राजस्थान सरकार ने इसे महामारी घोषित कर दिया है। राजस्थान सरकार के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख शासन सचिव अखिल अरोड़ा ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की। इसके साथ ही पूरे प्रदेश भर में प्रशासनिक अमले को भी अलर्ट कर दिया गया है और इस बीमारी के विशेष निगरानी के साथ विशेष इलाज के भी निर्देश दिए हैं।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख शासन सचिव अखिल अरोड़ा ने बताया कि म्यूकोरमायकोसिस (ब्लैक फंगस) मरीजों की संख्या में निरन्तर वृद्धि और कोरोना के साइड इफेक्ट के रूप में सामने आने तथा ब्लैक फंगस एवं कोविड का एकीकृत व समन्वित रूप से उपचार किए जाने के चलते पूर्व में घोषित महामारी कोविड-19 के अन्तर्गत ही राजस्थान महामारी अधिनियम के तहत (ब्लैक फंगस) को सम्पूर्ण राज्य में महामारी तथा नोटिफाएबल बीमारी घोषित कर दी है।

बता दें कि पिछले साल दिसंबर में सबसे पहले दिल्ली में इसके केस सामने आए थे। इसके बाद अहमदाबाद, राजस्थान, पंजाब के साथ उत्तर भारत के कई राज्यों में इसके मामले मिले।

यह एक फंगल बीमारी है, जो म्यूकरमायोसिस नाम के फंगाइल से पैदा होती है। यह ज्यादातर उन लोगों को होता है, जिन्हें पहले से कोई बीमारी हो या वो ऐसी दवा लेते हों जो इम्यूनिटी को कमजोर करती हो। इसके कारण चेहरे का एक तरफ से सूज जाना, सिरदर्द होना, नाक बंद होना, उल्टी आना, बुखार आना, चेस्ट पेन होना, साइनस कंजेशन, मुंह के ऊपर हिस्से या नाक में काले घाव होना जैसी समस्या होती है, जो जानलेवा भी साबित हो सकती है। हालांकि इसका इलाज संभव है।

उधर ब्लेक फंगस को देखते हुए आक्सीजन कन्सेन्ट्रेटर की गुणवत्ता, मापदण्ड और उपयोग के दिशा-निर्देशों की पालना सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस और राज्य सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय कोर ग्रुप के अध्यक्ष डा. सुबोध अग्रवाल ने आवश्यक दिशा निर्देश दिए हैं।
एसीएस डा. सुबोध अग्रवाल ने प्रदेश में आक्सीजन कन्सेन्ट्रेटर की आवश्ययकता, उपलब्धता और विदेशों से आ रहे आक्सीजन कन्सेन्ट्रेटर की प्रगति समीक्षा करते हुए कहा कि सरकार द्वारा ई-उपकरण पोर्टल के माध्यम से आक्सीजन कन्सेन्ट्रेटर की खरीद की जा रही है और उनमें निर्धारित मानकों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि दानदाताओं द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे आक्सीजन कन्सेन्ट्रेटरों व घरेलू उपयोग के लिए खरीदे जा रहे आक्सीजन कन्सेन्ट्रेटरों की खरीद व उपयोग के समय भी निर्धारित मानकों और उसके उपयोग के लिए जारी दिशा-निर्देशों की पालना सुनिश्चित की जानी आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केन्द्र सरकार ने भी इसके लिए गाईड लाइन जारी की है। एसीएस डा. अग्रवाल ने बताया कि आक्सीजन कन्सेन्ट्रेटर एक विद्युत चालित चिकित्सा उपकरण है जिसके द्वारा आसपास की हवा से आक्सीजन बनाया जाता है। इस उपकरण के माध्यम से रोगी को बिस्तर पर ही केनुला के माध्यम से आक्सीजन उपलब्ध कराया जाता है। आक्सीजन कन्सेन्ट्रेटर द्वारा 5 लीटर प्रति मीनट का फ्लो होना आवश्यटक है और इसमें 90 प्रतिशत से अधिक की शुद्धता व निरंतरता के साथ प्रवाह होना चाहिए। इस तरीके से आमतौर पर 21 प्रतिशत आक्सीजन होता है। उन्होंने बताया कि आक्सीजन कन्सेन्ट्रेटर में फिल्टर बोटल में डिस्टिल वाटर का ही उपयोग किया जाए। इसके साथ ही उपयोग के दिशानिर्देशों की सख्ती से पालना सुनिश्चित की जाए ताकि संभावित संक्रमण को रोका जा सके।
डा. अग्रवाल ने कहा कि निर्धारित मानकों के अनुसार आक्सीजन कन्सेन्ट्रेटर नहीं होने और आक्सीजन कन्सेन्ट्रेटर के उपयोग के दिशा निर्देशों के अनुसार उपयोग नहीं करने से ब्लेक फंगस जैसे संभावित संक्रमण होने की संभावना अधिक हो जाती है और इससे रोगी को लाभ होने के स्थान पर गंभीर संक्रमण की स्थिति होने के हालात भी कई बार बन जाते हैं।
उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमण के दौरान आक्सीजन की आवश्यिकता को देखते हुए लोगों द्वारा घरेलू उपयोग के लिए भी आक्सीजन कन्सेन्ट्रेटरों की खरीद की जा रही है। उन्होंने बताया कि आक्सीजन कन्सेन्ट्रेटर खरीदते समय उसके साथ उपयोग मेन्यूअल, मेंटिनेंस मेन्यूअल, डिस्पले बोर्ड, फिल्टर बोटल, डिस्टिल बोटल आदि आवश्यक सभी उपकरण व जानकारी से संबंधित सामग्री होना जरुरी है। उन्होने सभी चिकित्सा संस्थानों व घरेलू उपयोग में आवश्येक निर्देशों की सख्ती से पालना पर जोर दिया है।