यूपी के फतेहपुर जिले में एक वीवीआईपी गाय चर्चा का विषय बन गई है। चूंकि गाय की देखरेख के लिए 7 पशु चिकित्सक जो लगा दिए गए हैं। और भला इसमें बुराई भी क्या है? क्योंकि गाय किसी किसान या आप हम जैसे आमजन की नहीं बल्कि डीएम साहिबा अपूर्वा दुबे की जो ठहरी। इसलिए जिलाधिकारी के आवास में गाय के इलाज के लिए 7 डॉक्टरों की ड्यूटी लगा दी गई। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी की ओर से इससे जुड़ा एक सरकारी आदेश जमकर वायरल हो रहा है। लाजमी है डीएम साहिबा इससे परेशान हैं तो पशुपालन विभाग के आला अधिकारियों के भी तोते उड़े हुए हैं। क्योंकि उन्हें भी अंदाजा नहीं था कि इस तरह का आदेश जारी करके वो कहीं हंसी का पात्र तो कहीं गुस्से का पात्र बन जाएंगे। सरकारी महकमे में फिलहाल इस आदेश के वायरल होने के बाद हड़कंप मचा हुआ है।
उधर अपर मुख्य पशुधिकारी का कहना है कि आदेश तो जारी किया है, लेकिन किसी सरकारी कर्मचारी ने इस लेटर को शरारतपूर्ण ढंग से वायरल कर दिया है।

उन्होंने अपने आदेश में कहा है कि जिलाधिकारी महोदय की गाय की चिकित्सा करने हेतु निम्नांकित पशु चिकित्सा अधिकारी की प्रतिदिन सुबह शाम की ड्यूटी लगाई जाती है और साथ ही डॉक्टर दिनेश कुमार अतिरिक्त पशु चिकित्सा अधिकारी सनगांव संबंधित पशु चिकित्सा अधिकारी से समन्वय स्थापित कर प्रतिदिन सुबह-शाम देखने की सूचना अधोहस्ताक्षरी के कार्यालय में शाम 6:00 बजे तक दूरभाष के माध्यम से अवगत कराएंगे।
इसके बाद इस आदेश में नोट लिखा गया है कि किसी भी पशु चिकित्सा अधिकारी की अनुपस्थिति में उस दिन का कार्य डॉक्टर सुरेश कुमार कनौजिया पशु चिकित्सा अधिकारी दमापुर करेंगे। उक्त कार्य में शिथिलता अक्षम्य है।
लोग कह रहे हैं वाह अब डीएम की एक गाय की देखभाल करेगी डॉक्टरों की फौज।
इस संबंध में डीएम अपूर्वा दुबे का भी बयान सामने आया है। उन्होंने साफ कहा है कि उनके द्वारा ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया गया कि उनकी गाय के लिए ऐसे चिकित्सक लगाने के आदेश जारी किए जाएं। यह एक साजिशपूर्ण तरीके से किया गया कृत्य है जिस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है। हालांकि यह आदेश रद्द भी कर दिया गया है। बता दें कि डीएम अपूर्वा दुबे के पति भी आईएएस हैं। फिलहाल यह मामला यूपी सीएमओ तक भी पहुंचा जिसके बाद अपूर्वा दुबे ने मामले में तथ्यात्मक बयान भी जारी किया।
डीएम ने क्या कहा?
फतेहपुर डीएम ने बयान जारी करते हुए कहा, "इस लेटर के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है, यह लेटर संयोजित तरीके से मेरी छवि धूमिल करने के लिए जारी किया गया है." "पशु चिकित्सा विभाग खुद जारी करता है और खुद ही इसे निरस्त कर देता है. 544 डाक नंबर से जारी किया गया लेटर अगले ही दिन डाक नंबर 545 संख्या से निरस्त किया गया." "ट्विटर के माध्यम से मेरे संज्ञान में मामला आया. मैंने सीवीओ और डिप्टी सीवीओ के खिलाफ निलंबन के लिए पत्र लिखा है." "मेरे और मेरे परिवार में किसी ने गाय नहीं पाली है. गाय की बीमारी के बारे भी मुझे जानकारी नहीं है."
