वाशिंगटन. क्या दुनिया एक बार फिर वर्ल्ड वॉर की ओर आगे बढ रही है? क्या बारुद के ढेर पर दुनिया में कभी भी युद्ध की आग सुलग सकती है. एक तरफ अमेरिका और चाइना सहित दुनिया के कई देशों में चल रहा ट्रेड वॉर किसी से छुपा नहीं है वहीं अब हथियारों की होड़ ने इस जंग को हवा दे दी है. अमेरिकी रक्षा विभाग ने सोमवार को घोषणा की थी कि उसने जमीन से दागी जाने वाली एक मिसाइल का परीक्षण किया है, जो 1987 के INF समझौते के तहत प्रतिबंधित थी. दरअसल, यह समझौता परमाणु और मध्यम दूरी के पारंपरिक हथियारों के इस्तेमाल को सीमित करता है. यह समझौता जमीन से दागी जाने वाली 500 से 5,500 किमी की दूरी तय करने वाली सभी मिसाइलों को प्रतिबंधित करता था, ताकि परमाणु हथियारों से तत्कालीन यूरोप को बचाया जा सके. इस मिसाइल का परीक्षण कैलिफोर्निया तट से किया गया. अमेरिका के इस कदम दो अन्य महाशक्तियां खफा हो गईं, रूस और चीन ने मंगलवार को चेतावनी दी कि अमेरिका की एक नयी मिसाइल के परीक्षण ने सैन्य तनावों को बढ़ा दिया है और इससे हथियारों की होड़ शुरू हो सकती है. रूस के साथ किया गया शीत युद्ध के दौर का एक हथियार समझौता अमेरिका द्वारा रद्द किये जाने के कुछ हफ्तों बाद यह घटनाक्रम हुआ है. दोनों देशों ने एक दूसरे पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया था. इस पूरे घटनाक्रम के बाद सख्त हुए रूस ने सरकारी समाचार एजेंसी तास से कहा, 'अमेरिका ने स्पष्ट तौर पर सैन्य तनाव बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया है. हम उकसावे पर प्रतिक्रिया नहीं देंगे. हम खुद को हथियारों की होड़ में शामिल नहीं होने देंगे. इस परीक्षण से यह जाहिर होता है कि अमेरिका समझौते से आधिकारिक रूप से बाहर होने से काफी पहले से इस तरह की मिसाइलों पर काम कर रहा था.' उधर चीन भी कहां चुप बैठने वाला था, पहले से ही अमेरिका से ट्रेड वॉर को लेकर सख्त चीन ने कहा कि 'अमेरिका का यह कदम हथियारों की होड़ का एक नया दौर शुरू कर देगा, जिससे सैन्य टकराव बढ़ेगा. उन्होंने चेतावनी दी कि इस परीक्षण के अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति पर गंभीर असर पड़ेगा. अमेरिका को शीत युद्ध के समय की अपनी मानसिकता से बाहर निकलना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता में सहयोग करने वाली और अधिक चीजें करनी चाहिए.' खतरा तब और बढ जाता है जब खुद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस पर प्रतिक्रिया दे डाली और कहा फ्रांस में अपने दौरे के दौरान कहा कि 'यदि अमेरिका इस तरह की आक्रामक प्रणाली तैयार करता है, तो हम भी ऐसा करेंगे.' हालांकि इसी साल (2019) की शुरुआत में अमेरिका और नाटो ने रूस पर नए तरह की क्रूज मिसाइलें तैनात करने का आरोप लगाते हुए रूस पर संधि के उल्लंघन का आरोप लगाया था. जबकि इस क्रूज मिसाइल की तैनाती से रूस इनकार करता रहा. जिस पर अमेरिका ने कहा था कि उसके पास रूस की 9 एम 729 मिसाइलों की तैनाती के साक्ष्य हैं. यहीं से इस विवाद को हवा मिली और अब महाशक्तियां बारुद के ढेर पर दुनिया को ले जाने की होड़ में लगी है, देखना होगा महाशक्तियों का यह विवाद अब कहां जाकर थमता है.