जयपुर. राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक गंदे पानी के नाले को द्रव्यवती रिवर फ्रंट के रूप में डवलप किया गया था। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के ड्रीम प्रोजेक्ट के मेंटेनेंस का काम ठप हो गया है। इसके काम में जुटी टाटा कंपनी ने प्रोजेक्ट के मेंटेनेंस का काम बंद कर दिया है। जयपुर विकास प्राधिकरण से हुए विवाद के बाद कंपनी ने पिछले दिनों काम बंद करने की चेतावनी दी थी। कंपनी के इस कदम से अब वहां बने एसटीपी प्लांट समेत अन्य रखरखाव का काम बंद हो गया है। यहां बने 5 एसटीपी से इस नदी में ट्रीट किया हुआ पानी बहाया जाता है। इन एसटीपी के बंद होने से अब यहां पानी फिर से पहले की तरह सड़ने लग गया है। आम आदमी की परेशानियां बढती जा रही है। इतना ही नहीं कई बड़े रियल एस्टेट कारोबारियों के बड़े प्रोजेक्टस इसके आसपास बन रहे हैं, उनकी भी चिंताएं बढ गई हैं। क्योंकि द्रव्यवति रिवर व्यू के नाम पर ही कई प्रोजेक्ट्स बेचे जा रहे हैं। दिवाली के मौके पर यह एक बड़ा झटका निवेशकों के लिए भी होगा।
बताया जा रहा है कि कंपनी की मांग थी कि जेडीए इस प्रोजेक्ट का ऑफिशियल मेंटेनेंस शुरू करें, लेकिन जेडीए इसे तब तक शुरू नहीं करना चाहता जब तक कंपनी प्रोजेक्ट का फाइनल वर्क पूरा नहीं कर ले। जेडीए अधिकारियेां के मुताबिक अब भी गोनेर के पास कई काम बाकी है और सीतापुरा के पास जमीन को लेकर जो कोर्ट में विवाद चल रहा है वहां भी कई जगहों पर कंपनी ने काम नहीं किया है। ऐसे में साल ही नहीं उठता कि जेडीए के स्तर पर मेंटिनेंस किया जाए।
द्रव्यवती नदी प्रोजेक्ट का काम देख रहे जेडीए के अधिशाषी अभियंता (एक्सईएन) दीपक माथुर ने बताया कि कंपनी ने जेडीए से मेंटेनेंस के पेटे 110 करोड़ रुपए मांगे है। उन्होंने बताया कि जब तक कंपनी प्रोजेक्ट फाइनल नहीं कर देती तब तक नियमानुसार मेंटेनेंस ऑफिशियली जेडीए शुरू नहीं कर सकता है।
जेडीए ने साल 2016 में इस प्रोजेक्ट का काम वसुंधरा सरकार के समय शुरू करवाया था। तब टाटा कंपनी को इस प्रोजेक्ट को बनाने के लिए 1470.85 करोड़ रुपए का कॉन्ट्रैक्ट दिया था। इसके अलावा 206 करोड़ रुपए इस प्रोजेक्ट को अगले 10 साल तक मेंटेनेंस रखने के लिए निर्धारित किए थे। नाहरगढ़ की तलहटी ग्राम जैसलिया से शुरू होकर ढूंढ नदी गोनेर के पास स्थित रामचंद्रपुरा डेम तक 47.50 किलोमीटर लम्बे इस प्रोजेक्ट में 170MLD क्षमता के 5 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बने है। इसके अलावा यहां वॉक-वे, साईकिल ट्रैक के अलावा 3 बड़े पार्क भी बने है, जिनका रखरखाव अभी कंपनी की ओर से किया जा रहा है। 100 फीसदी काम टेंडर की शर्तों के मुताबिक अभी तक नहीं किया गया है।