नई दिल्ली. पूरा भारत देश 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस के जश्न में डूबा है. यह वही दिन है जब सन् 1950 को भारतीय संविधान लागू हुआ था. इस 72 वें गणतंत्र दिवस समारोह को लेकर जहां पूरे देश में उत्साह परवान पर है वहीं कोविड संकट के बीच इस बार गणतंत्र दिवस कोई चीफ गेस्ट नहीं रहा. ऐसा 50 सालों में पहली बार होगा जब कोई चीफ गेस्ट इस आयोजन में नहीं है. हालांकि पहले ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन को भारत आने के लिए आमंत्रित किया गया था लेकिन ब्रिटेन में एक नए कोविड स्ट्रेन के बढ़ते प्रकोप के चलते उन्हें अपनी यात्रा रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा. ऐसा नहीं है कि ऐसा पहली बार हुआ है लेकिन इससे पहले भारत के पास 1952, 1953 और 1966 में परेड के लिए मुख्य अतिथि नहीं थे.

गणतंत्र दिवस परेड राष्ट्रपति भवन से शुरू हुई जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी. परेड में भारत की पहली महिला फाइटर पायलट भावना कंठ और बांग्लादेश सशस्त्र बलों की एक टुकड़ी भी शामिल हुई.
नई दिल्ली में मुख्य समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ध्वजारोहण किया. पिछले साल जहां डेढ लाख लोग गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल हुए थे वहीं इस बार 25 हजार लोगों को ही शामिल करने का निर्णय लिया गया था. मीडिया प्रतिनिधियों की संख्या को भी 300 से घटाकर 200 किया गया. 15 साल से कम उम्र के बच्चों को उपस्थित होने की परमिशन नहीं दी गई. सुरक्षा मानदंडों के चलते मोटरसाइकिल करतब दिखाने वाले जवाब इस बार परेड में नहीं दिखे. इसके अलावा वीरता पुरस्कारों की परेड और बहादुरी पुरस्कार हासिल करने वाले बच्चे भी 72वें गणतंत्र दिवस समारोह में नहीं आए. उधर स्कूल्स में भी कार्यक्रम हुए लेकिन ये कार्यक्रम वर्चुअल आयोजन हुए, बावजूद इसके बच्चों ने पूरे उत्साह से कार्यक्रमों में प्रस्तुतियां दी.
