नई दिल्ली. राज्यसभा चुनाव भी कभी इतने रोचक हो सकते हैं, जितना आज हो रहे हैं ऐसा शायद किसी ने सोचा भी नहीं होगा. जोड़-तोड़, अपना-पराया, खरीद-फरोख्त और सौदेबाजी की राजनीति ने इन चुनावों को इतना रोचक बना दिया कि देश में होली जैसे त्योंहार पर भी भारतीय मीडिया में राज्यसभा चुनाव ही छाए रहे. राज्यसभा चुनावों के पल-पल के अपडेट्स हेडलाइन्स और ब्रेकिंग न्यूज के रुप में स्क्रिन पर कब्जा जमाए नजर आए.
सबसे बड़ा सियासी संकट मध्यप्रदेश का था तो कई जगह राजनीतिक समीकरणों को साधकर बीच का रास्ता निकालने में राजनीतिक दलों के पसीने छूटते नजर आ रहे हैं. ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस्तीफे के बाद तो मध्यप्रदेश में कांग्रेस के लिए सरकार बचाना एक बड़ी चुनौति बन गई. राज्यसभा की 55 सीटों के लिए 26 मार्च को चुनाव होंगे.
17 राज्यों की 55 सीटों के लिए होने वाला यह चुनाव कांग्रेस और बीजेपी दोनों राजनीतिक दलों के लिए काफी अहम है. प्रतिष्ठा का सवाल है ऐसे में शह-मात देने की हर चाल और साजिश पर काम किया जा रहा है. कहा जाता है राजनीति अवसरवादिता और संभावनाओं का खेल है ऐसे में क्षेत्रीय राजनीतिक दलों भी इस दौड़ में पीछे नहीं हैं और अपनी पूरी ताकत झोंक दी. मध्य प्रदेश में सियासी संकट भी इन्हीं चुनावों की उपज माना जा रहा है.
राज्यसभा में कुल 258 सदस्य का चुनाव होता है, इनमें 12 सदस्य राष्ट्रपति नॉमिनेट कर सकते हैं. हर दो साल में से एक तिहाई सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होता है, और फिर खाली सीटों के लिए चुनाव कराया जाता है. राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया लोकसभा और विधानसभा चुनाव से अलग होती है और राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल पांच के बजाए 6 साल का होता है. राज्यसभा चुनाव के लिए आम आदमी वोट नहीं करता, जनता द्वारा चुने गए जन प्रतिनिधि यानी की विधायक ही इस चुनाव में हिस्सा लेते है.
राज्यसभा चुनावों में जीत हर राज्य के विधायकों की संख्या के आधार पर तय होती है. सीटों के आधार पर ये तय किया जाता है कि जीतने के लिए कितने वोट चाहिए. उदाहरण के तौर पर राजस्थान विधानसभा में 200 विधायक हैं और अगर यहां पर 9 सीटों पर राज्यसभा चुनाव होने हैं तो सदस्यों की संख्या में एक जोड़कर 200 को 10 से भाग कर दिया जाता है उसके बाद फिर उसमें एक जोड़ दिया जाता. यानी की जीतने के लिए कुल 21 सीटों की आवश्यकता होता है. चुनाव में सभी विधायक प्राथमिकता के आधार पर वोट देते हैं, और विधायकों को बताना होता है कि उम्मीदवारों में उसकी पहली, दूसरी और तीसरी प्राथमिकता क्या है.
राज्यसभा सांसद बनने के लिए 30 साल की उम्र होनी चाहिए. भारतीय नागरिक होना चाहिए.
एक परिसंघीय सदन होने के नाते राज्य सभा को संविधान के अधीन कुछ विशेष शक्तियां प्राप्त हैं, जिनमें तीन विशेष शक्तियां प्रमुख हैं. अनुच्छेद 249 के अंतर्गत राज्य सूची के विषय पर 1 वर्ष का बिल बनाने का हक है, तो अनुच्छेद 312 के अंतर्गत नवीन अखिल भारतीय सेवा का गठन 2/3 बहुमत से करने की शक्ति प्राप्त है. अनुच्छेद 67-ब के तहत उपराष्ट्रपति को हटाने वाला प्रस्ताव राज्यसभा में ही लाया जा सकता है.
17 राज्यों की 55 राज्यसभा सीटों के लिए यह चुनाव हो रह है, इन सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल में अलग-अलग तारीखों को पूरा हो रहा है.
महाराष्ट्र में 7, ओडिशा में 4, तमिलनाडु में 6, पश्चिम बंगाल में 5 सीटें दो अप्रैल को खाली हो रही हैं. आंध्र प्रदेश में 4, तेलंगाना में 2, असम में 3, बिहार में 5, छत्तीसगढ़ में 2, गुजरात में 4, हरियाणा में 2, हिमाचल प्रदेश में 1, झारखंड में 2, मध्य प्रदेश में 3, मणिपुर में 1 और राजस्थान में 3 सीटें 9 अप्रैल को खाली हो रही हैं. वहीं मेघालय की 1 सीट 12 अप्रैल को खाली हो रही है.
वर्तमान में जिन राज्यसभा सीटों पर चुनाव हो रहे हैं उनकी बात करें तो 55 सीटों में से 15 बीजेपी के खाते में हैं, 4 AIADMK के पास तो 3 जेडीयू (JDU) के पास हैं. बीजेडी के पास 2 सीटें हैं. कांग्रेस के पास 13 सीटें हैं. एनसपी, शिवसेना और टीएमसी जैसे विभिन्न दलों के पास 18 राज्यसभा सदस्य हैं.
राज्यसभा में उपसभापति हरिवंश सिंह, महाराष्ट्र से आरपीआई नेता और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा, दिग्विजय सिंह, कुमारी शैलजा, डॉ. संजय सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल और प्रभात झा, महाराष्ट्र से माजिद मेनन, कांग्रेस के हुसैन दलवी, शिवसेना के राजकुमार धूत, बीजेपी के अमर शंकर साबले, बिहार से हरिवंश सिंह यह वो प्रमुख नेता हैं जिनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है.
राजस्थान की जिन 3 सीटों पर हो रहे चुनाव को लेकर पूरे 200 विधायकों के मान्य वोट हैं. फिलहाल कांग्रेस के पास 107 विधायक हैं तो बीजेपी के पास 72 विधायक हैं. कांग्रेस के पास 13 निर्दलियों में से अधिकतर का समर्थन भी है. अन्य छोटी पार्टियों और निर्दलीय विधायकों की संख्या 21 है. इस लिहाज से बीजेपी के खाते में एक और कांग्रेस के खाते में दो सीट आएगी. वर्तमान में बीजेपी के पास तीनों सीटें हैं जिनमें राम नारायण डूडी, विजय गोयल और नारायण लाल पंचारिया फिलहाल राज्यसभा सदस्य हैं. राज्यसभा की 10 सीटों में से 9 सीटों पर बीजेपी का कब्जा है और 1 सीट पर कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सांसद हैं.
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की कुल 11 सीटों में से 8 भाजपा और 3 कांग्रेस के पास हैं. मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा और पूर्व केंद्रीय मंत्री सत्यनारायण जटिया का 9 अप्रैल को राज्यसभा में कार्यकाल पूरा होगा, इन तीनों सीटों के लिए भी 26 मार्च को चुनाव होगा. यहां इस बीच बड़ी राजनीति उठा पटक का दौर चल रहा है. ज्योतिरादित्य सिंधिया के पीएम से मुलाकात के बाद देश की राजनीति में एक नया खेल देखा जा रहा है, कांग्रेस की चिंताएं बढ गई हैं.