कारगिल। सशस्त्र बलों के साथ दिवाली मनाने की अपनी परंपरा को कायम रखते हुए, प्रधानमंत्री ने यह दिवाली भी कारगिल में सशस्त्र बलों के साथ मनाई।
वीर जवानों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कारगिल की धरती के प्रति श्रद्धा उन्हें हमेशा सशस्त्र बलों के वीर पुत्र-पुत्रियों की ओर खींचती है। प्रधानमंत्री ने कहा, "वर्षों से, आप मेरे परिवार का एक हिस्सा रहे हैं।” प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि जवानों की उपस्थिति में दिवाली की मिठास बढ़ जाती है और उनके बीच मौजूद दिवाली की रोशनी उनके हौसले को बुलंद करती है।
उन्होंने कहा, “एक तरफ देश की संप्रभु सीमा हैं, और दूसरी ओर समर्पित सिपाही, एक ओर मातृभूमि की ममतामयी मिट्टी है तो दूसरी ओर वीर जवान। मैं कहीं और इस तरह की दिवाली की उम्मीद नहीं कर सकता था। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत वीरता और बहादुरी की इन गाथाओं का जश्न मनाता है जो हमारी परंपराओं और संस्कृतियों का हिस्सा हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा, "आज, कारगिल की विजयी भूमि से, मैं सभी देशवासियों और दुनिया में सभी लोगों को दिवाली की बहुत-बहुत बधाई देता हूं।" प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि पाकिस्तान के खिलाफ ऐसा कोई युद्ध नहीं हुआ है जब कारगिल ने विजयी होकर तिरंगा नहीं फहराया। आज की दुनिया में भारत की अभिलाषा के बारे में, प्रधानमंत्री ने कामना करते हुए कहा कि रोशनी का त्योहार आज के वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में शांति और समृद्धि का मार्ग रोशन करे।
दिवाली के महत्व के बारे में बताते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा, "यह आतंक के अंत का उत्सव है।" दिवाली की उपमा देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कारगिल ने ठीक वैसा ही किया था और जीत के जश्न को आज भी याद किया जाता है।