राजस्थान के जयपुर विकास प्राधिकरण शहरभर में सैकड़ों रिहायशी, व्यावसायिक और अन्य लैण्ड यूज वाले भूखण्ड नीलाम करने जा रहा है। जिससे जेडीए को सैकड़ों करोड़ रूपए की आमदनी भी होने वाली है और दावा है शहरी विकास में इजाफा होने का। लेकिन खास बात यह हैं कि इन कॉलोनियों को जेडीए ने कागजी तौर पर अप्रूव तो किया है लेकिन विकास नाम की कोई चीज नहीं है। मसलन, पानी, बिजली, सड़क और सीवरेज का इन कॉलोनियों में दूर-दूर तक नामोनिशान नहीं है। और निकट भविष्य में मूलभूत सुविधाओं का कोई प्लान भी जेडीए के पास नहीं है। इन कॉलोनियों के लोगों से जेडीए ने विकास शुल्क वसूल तो लिया है लेकिन सुविधाएं दी नहीं।
जेडीए की विकसित योजनाओं की ऐसी लम्बी चौड़ी लिस्ट हैं देखिए ये रिपोर्ट ग्राफिक्स इन- रोहिणी नगर, जेडीए जोन-14 सूर्यनगर, जेडीए जोन-14 पत्रकार कॉलोनी, जेडीए जोन-8 शिव एनक्लेव, जेडीए जोन-8 एपीजे अब्दुल कलाम नगर, जेडीए जोन-11 वेस्ट-वे हाइट्स योजना, जेडीए जोन-8 अभिनव विहार, जेडीए जोन-14 अमृत कुंज योजना, जेडीए जोन-12 आनंद लोक, जेडीए जोन-12 अनुपम विहार, जेडीए जोन-11 डेयरी योजना, जेडीए जोन-14 दस्तकार नगर, जेडीए जोन-13 हीरालाल शास्त्री नगर, जेडीए जोन- 14 लोहा मण्डी योजना, माचेड़ा, जेडीए जोन-6 ग्राफिक्स आउट वाक्थ्रू- वीओ-1 जयपुर विकास प्राधिकरण की ये वो योजनाए हैं जिन्हे जेडीए ने कॉलोनियां काटकर जनता को आवंटित तो कर दीं और मोटा विकास शुल्क भी वसूल लिया लेकिन लोग इन योजनाओं में मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं।
नई-नई आवासीय, व्यावसायिक व अन्य योजनाएं लॉन्च कर रेवेन्यू जुटाने के कीर्तिमान बनाकर जेडीए एक ओर अपनी पीठ थपथपा रहा है तो दूसरी ओर वेस्ट-वे हाइट्स, एपीजे अब्दुल कलाम नगर, शिव एन्क्लेव, पत्रकार कॉलोनी, रोहिणी नगर, सूर्य नगर जैसी कॉलोनियों की लंबी फेहरिस्त है जो अभी भी विकास की राह तक रही हैं। मूलभूत सुविधाओं के नाम करोड़ों रुपये विकास शुल्क लेकर जनता को ठेंगा दिखा रहा है। जयपुर विकास प्राधिकरण की बसायी गई योजनाओं के ऐसे हालात शहरी विकास को पलीता लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं। लोग विकास शुल्क जमा कराने के बावजूद ठगा-सा महसूस कर रहे हैं।
मजे की बात तो यह है कि यदि कोई निजी डेवलपर इस तरह की बिना मूलभूत सुविधाओं वाली कॉलोनी बसा कर बेचना चाहे तो उस योजना पर जेडीए भारी पेनल्टी लगा देगा। और जेडीए की प्रवर्तन शाखा उस योजना को निरस्त करने की कार्यवाही तक कर डालती है। वहीं जयपुर विकास प्राधिकरण यह काम पूरी मुनादी के साथ कर रहा हैं। कानूनन भी यदि देखा जाए तो विकास शुल्क जमा करवाकर सालों तक सुविधाएं न देना भी आमजन के साथ धोखाधड़ी ही तो है। फिर चाहे यह काम जेडीए जैसी बड़ी सरकारी एजेंसी ही क्यों ना कर रही हो।