जयपुर सर्जिकल फेस्टिवल -2022 का आगाज, लिवर व गाॅल ब्लैडर की समस्याओं को नजरअंदाज न करें


जयपुर। महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी में तीन दिवसीय जयपुर सर्जिकल फेस्टिवल का शुक्रवार को आगाज हुआ। इस अवसर पर यूनिवर्सिटी के संस्थापक चेयरमैन डाॅ. एम एल स्वर्णकार, चेयरपर्सन डाॅ. विकास स्वर्णकार, वाइस चांसलर डाॅ. सुधीर सचदेव, प्रो-वाइस चांसलर डाॅ जी एन सक्सैना, इंटरनेशनल फैकल्टी डाॅ. डेन जी डूडा, डाॅ. डेनियर एज्यूले, डाॅ. एस जी अय्यर, डाॅ. मसूरा मियाजाकी ने सर्जरी की दुनिया में नए प्रयोग पर विस्तार से जानकारी दी। समारोह की जानकारी देते हुए आयोजन समिति के संयोजक एवं हिपेटोबिलियरी सर्जरी विभागाध्यक्ष डाॅ वी के कपूर ने बताया कि द्वितीय जयपुर सर्जिकल फेस्टिवल में पहले दिन दर्जन भर विषयों पर पेपर प्रेजेन्टेशन तथा चर्चा हुई। सोनोग्राफी जाॅंच में लिवर में अगर किसी प्रकार की खराबी सामने आये तो तुरन्त सीटी स्कैन अथवा एमआरआई जैसी जाॅंचों के माध्यम से कैंसर की संभावना का पता लगाया जा सकता है। एक साधारण समझी जाने वाली गांठ कैंसर में तब्दील हो सकती है। ऐसे रागियों को समय समय पर जाॅंच कराते रहना जरूरी होता है। लिवर कैंसर का उपचार ज्यादातर मामलों में ऑपरेशन होता है किन्तु आजकल लिवर में खून की नस को बंद करके, खून की नस में कीमोथैरेपी दवा के जरिये तथा रेडियो फ्रिक्वेंसी एब्लेशन के जरिये कैंसर सैल्स को जलाकर भी उपचार किया जाता है। लिवर कैंसर का एक बडा कारण लिवर सिरोसिस भी होता है। ऐसे में लिवर ट्रांसप्लांट ही श्रेष्ठ उपचार होता है। काॅन्फ्रेंस में गाॅल ब्लैडर कैंसर पर भी विस्तृत चर्चा हुई। देश में खासकर राजस्थान सहित उत्तर भारत में गाॅल ब्लैडर कैंसर अधिक पाया जाता है। अनुमानित आंकडों के अनुसार प्रति एक लाख महिलाओं में से दस को गाॅल ब्लैडर के कैंसर की शिकायत होती है। उपचार की नई विधियों में इम्यूनोथैरेपी तथा तकनीकों जैसे लैप्रोस्कोपिक तथा रोबोटिक लिवर ट्रांसप्लांट सम्बन्धित प्रेजेन्टेशन भी किये गए। कार्यक्रम में डाॅ. विजय आनन्द सारस्वत, डाॅ. नेमिष मेहता, डाॅ. रमेश रूपराय, डाॅ. संदीप निझावन, डाॅ. अतुल शर्मा, डाॅ. अनुश्री लाॅयल, डाॅ. शालिन अग्रवाल, डाॅ. दीपक छाबड़ा, डाॅ इलांगो सेथू, डाॅ. अजय शर्मा, डाॅ. आरपी चोबे, डाॅ. आनन्द नागर, डाॅ. श्वासत सरीन, डाॅ. विनय महला, डाॅ. करण कुमार, डाॅ. गिर्राज बोरा सहित अन्य नामवर चिकित्सक विशेष रूप से मौजूद थे।