जयपुर. सीनियर IAS और जयपुर संभागीय आयुक्त डॉ. समित शर्मा और सीकर के CMHO होने के साथ-साथ डॉक्टर्स के नेता डॉ. अजय चौधरी के बीच विवाद बढ़ गया है. मामला सिर्फ इतना सा था कि सीकर में आयोजित एक बैठक के दौरान संभागीय आयुक्त ने खुद सीएमएचओ द्वारा कोरोना गाइडलाइन की उल्लंघन करने पर उन्हें न केवल नसीहत दी बल्कि कलेक्टर द्वारा सीएमएचओ को इस गंभीर लापरवाही के लिए चार्जशीट भी जारी करने के निर्देश दिए.
मामले में सीएमएचओ डॉ अजय चौधरी को चार्जशीट दी तो सीएमएचओ ने इसे व्यक्तिगत विद्वेष बता दिया. और बिना संभागीय आयुक्त का नाम लिए कहा कि जिस मीटिंग में 150 लोग बैठे हुए हैं उसमें बगैर मॉस्क कौन उल्लंघन कर रहा है? साथ ही कहा कि 'कोरोना काल में दिन रात डयूटी देने वाले डॉक्टर्स एक जगह एकत्र होकर खुद को बूस्ट अप कर रहे थे. वो डीसी को नागवार गुजरा. जबकि, शाहजहांपुर बॉर्डर पर किसानों के बीच जाने वाले संभागीय आयुक्त को कोराेना गाइडलाइन नजर नहीं आई. इसके अलावा एक दिन पहले दौसा में महापंचायत में भीड़ भी डीसी साहब को नहीं दिखी. और बंद कमरे में चंद डॉक्टर्स बैठक कर रहे थे उनको वहीं दिख रहा था.'
डॉ. अजय चौधरी का आरोप है कि 'बैठक में एजेंडे से हटकर सेवारत चिकित्सकों का मनोबल बढ़ाने के लिए रखे गए सम्मान कार्यक्रम पर इतनी टीका टिप्पणी से हतप्रभ हूं. इतने वरिष्ठ अधिकारी की ओर से सार्वजनिक तौर पर सीकर के चिकित्सकों का मानमर्दन किया जाना उनके मनोबल को तोड़ने का प्रयास है.'
बता दे कि संभागीय आयुक्त ने सीकर दौरे पर जिला अधिकारियों की बैठक लेकर उसमें कोराेना काल के दौरान कार्यक्रम में एक भीड़ भरे कार्यक्रम में शामिल होने पर नाराजगी जाहिर करते हुए चार्जशीट थमाने के लिए कलेक्टर को कहा था. और जमकर फटकार भी लगाते हुए कहा था कि यदि CMHO स्तर के अधिकारी ही सरकारी गाइड लाइन्स का उल्लंघन करेंगे तो क्या मेसेज जाएगा. इस दौरान अजय चौधरी लगातार अपनी सफाई देने का प्रयास भी करते रहे लेकिन समित शर्मा के आगे उनकी एक न चली. शर्मा ने अजय चौधरी को कहा कि 'जिस समय आप कार्यक्रम में भाषण दे रहे थे उस दौरान सरकार की गाइडलाइन में पचास से अधिक लोग जमा नहीं हो सकते थे. सीएमएचओ जैसे जिम्मेदार पद पर होते हुए सरकार के आदेश का उल्लंघन कर रहे थे. इसका वीडियो भी मेरे पास है.'
उधर इस मामले में कलेक्टर अविचल चतुर्वेदी ने बताया कि मामले की जानकारी आते ही उन्होंने ने भी कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया था.
बैठक में मौजूद कुछ अधिकारियों का मानना है कि समित शर्मा ने जो कहा वो गलत नहीं था लेकिन अब अजय चौधरी ने भी इसे प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है और मामले में आगे की रणनीति बना रहे हैं. उधर कुछ जानकर लोगों का यह भी कहना है कि यह मामला असल में कहीं और से शुरू हुआ था. और संभागीय आयुक्त के साथ CMHO को भी इसी तरह के कुछ विवाद का पहले से ही इंतज़ार था और उसी कड़ी में यह सब हुआ.
बताया जा रहा है कि हाल ही में अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ (अरिस्दा) की ओर से जयपुर संभागीय आयुक्त डॉ. समित शर्मा द्वारा सरकारी चिकित्सालयों में निरीक्षण के दौरान चिकित्सकों के साथ असंसदीय भाषा का प्रयोग करने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ CM को शिकायत भेजी गई थी. संभागीय आयुक्त के व्यवहार को अपमानजनक और अमर्यादित आचरण बताते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को ज्ञापन प्रेषित कर कार्यवाही की माँग की गई थी.
इस ज्ञापन में अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ (अरिस्दा) अध्यक्ष डॉ अजय चौधरी ने मुख्यमंत्री को जयपुर संभागीय आयुक्त डॉ समित शर्मा द्वारा कुछ दिनों पहले दौसा के सरकारी अस्पताल का निरीक्षण के दौरान चिकित्सकों और चिकित्साकर्मियों को सरेआम जलील करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि अगर कोई अधिकारी कर्मचारी नियम विरुद्ध कार्य करता हो और जाँच में दोषी पाया जाता है तो उसे दंडित किया जाएं, इस से कोई गुरेज़ नहीं कोई आपत्ति नहीं, लेकिन उसके लिए शासन में सेवा नियमो के तहत निर्धारित प्रक्रिया है, उसके अंतर्गत कार्यवाही हो लेकिन बिना पूर्ण जाँच से पहले केवल शक और अपूर्ण तात्कालिक तथ्यों के आधार पर किसी चिकित्सक को सरेआम अपमानित करने और पूरे चिकित्सा समुदाय की छवि धूमिल करने का अधिकार किसी भी व्यक्ति को नहीं है, चाहे वो किसी भी हैसियत का हो या कोई भी पद धारित किए हो. चौधरी ने संभागीय आयुक्त के भ्रमण कर स्वयं को प्रचारित करने को आत्म मुग्धता का दौर करार देते हुए कहा कि किसी भी लोकसेवक को व्यक्तिगत प्रचार से दूर रहते हुए अपना क़र्म निष्काम तथा वस्तुनिष्ठ भाव के साथ समर्पित भाव से करना होता है, जबकि संभागीय आयुक्त के दौसा सहित पूर्व की कार्यशैली से ऐसा प्रतीत होता है कि वे राज्य शासन के बजाय अपनी खुद का छवि सुधार कार्यक्रम चला रहे है. इसके चलते वो आत्म मुग्धता के दौर में प्रवेश कर गए. अन्यथा लोकसेवक को निरीक्षण के दौरान मीडिया और कैमरा टीम को साथ लेकर चलने की क्या आवश्यकता है? यह बेहद खेदजनक स्थिति है.
बस इसी ज्ञापन के साथ ही यह विवाद पूर्व निर्धारित हो गया था. हालांकि सोशल मीडिया पर आईएएस समित शर्मा की इस बोल्डनेस को काफी सराहा जा रहा है लेकिन दूसरी तरफ एक वर्ग जो उनकी इस कार्यशैली से भयभीत है, सहमा है वो आलोचना में जुटा है क्योंकि यदि दौसा में निरीक्षण के दौरान लापरवाही पर लगाई गई लताड़ और सीकर की बैठक में अधिकारियों की बैठक में लगाई गई लताड़ को देखें तो नियमानुसार समित शर्मा ने कुछ गलत नहीं किया, नियमानुसार उनकी बात बिल्कुल सही कही जा सकती है क्योंकि दोनों ही जगह पर हुए घटनाक्रम का मकसद सिर्फ यह है कि इन उदाहरण के जरिए अन्य अधिकारियों को सीधे तौर पर मैसेज दें कि वह आगे से ऐसी लापरवाही या ना करें. बस थोड़ा कहने का लहजा बदला होता तो सब ठीक रहता. लेकिन दूसरी विचारधारा यह भी है कि बिना सख्ती के लापरवाह अधिकारी और कार्मिक सुधरते भी नहीं.
बहराल विवाद आगे बढ़ने की पूरी आशंका है. डॉ. अजय चौधरी को चिकित्सक वर्ग के एक बड़े तबके का समर्थन प्राप्त है. और वो अपने समर्थकों के साथ आगे की रणनीति बना रहे हैं क्योंकि उनके नेता के साथ संभागीय आयुक्त समित शर्मा का यह व्यवहार उनको नागवार गुजरा, वहीं दूसरी तरफ समित शर्मा हैं जो अपनी वर्किंग स्टाइल और बोल्डनेस के दम पर इस मुकाबले के लिए तैयार हैं. अब आगे आगे देखिए होता है क्या.