टोंक। ओए ज्यादा ज्ञान मत दे...एक सभ्य जनप्रतिनिधि कभी एक RPS पुलिस अफसर से ऐसे बात नहीं कर सकता। और किसी बजरी माफिया द्वारा दो ट्रैक्टर टोलियां बीच रास्ते में लाकर खड़ा करने और आमजन को परेशान करने के कार्य का तो एक सभ्य जनप्रतिनिधि कभी भी समर्थन नहीं करेगा। लेकिन टोंक में कुछ ऐसा घटनाक्रम हुआ जहां नेताजी बजरी माफियाओं के समर्थन में और परेशान हो रहे लोगों के विरोध में पुलिस को ही पाठ पढ़ाने लगे और खुद के राजनीतिक रासुखातों हवाला देने लगे। और पुलिस से असभ्य भाषा में बहस करते नजर आए जिसके बाद पुलिस ने बार-बार नेताजी को समझाने का प्रयास किया लेकिन नेताजी नहीं माने तो उसके बाद पुलिस ने सख्त रवैया अख्तियार करते हुए नेताजी को गाड़ी में बैठा लिया। हालांकि मौके पर नेताजी जिस का समर्थन कर रहे थे भीड़ उसका विरोध कर रही थी। ऐसे में नेताजी की सुरक्षा को भी खतरा नजर आने लगा और तुरंत उन्हें गाड़ी में धकेला गया। बस फिर क्या था मामला इतना बढ़ गया कि एक CO और SHO को सस्पेंड कर दिया गया। इस पूरे मामले में सीओ को सुनवाई का मौका भी नहीं दिया गया जिसके बाद आहत हुए सीओ ने अपनी पीड़ा सोशल मीडिया पर कुछ इस तरह लिखी।
"इस वर्दी को पाने का जूनून कुछ ऐसा था, कॉलेज में प्रवेश करते 18 वर्ष की आयु में सिपाही बना, पापा भी सिपाही थे तो बड़ा प्राउड फील करते थे कि बच्चा अपने पैर पर खड़ा हो गया। कहीं न कहीं उनकी एक शिकन रही जीवन में की एक अफसर घर में हो। मैं जाने अनजाने यह महसूस कर रहा था और निकल पड़ा अपनी राह पर। और आज कुछ बन पाया तो सिर्फ उन सपनों की वजह से जो मेरे पापा ने देखे और उस मार्ग पर मैं चल सका। कभी आँख नीचे नहीं की मैंने, लोग आँखों में आँख मिला कर बात करते हैं, मैं जमीर निकल कर बात करता हूँ। सत्य, निष्ठा और ईमानदारी से कभी समझौता नहीं किया। इसलिए आज कोई भय नहीं है किसी का। एक बेग लेकर आया था,कल उसी को लेकर निकलूंगा। गर्व है आज मैंने लोगो के लिए कुछ किया। जो जाम में फंसे थे वो यात्री जरूर दुआ दे रहे होंगे जो समय पर सुरक्षित अपने घर जा पाए। वो सामने नहीं आएंगे क्योंकि उनकी कोई जात, धर्म और सम्प्रदाय नहीं है, वो आम लोग हैं।
खास होते तो शायद वो कुछ बोलते और उनकी सुनी भी जाती। जो सवाल खड़े कर रहे हैं न, उनको प्रश्न का उत्तर पता है बस स्वीकार नहीं कर पा रहे। अजीब बात है वो बड़ी गाडी से चलने वाले मेरी टूटी चप्पल से परेशान हैं। किसी के खिलाफ नहीं लिख रहा मैं बहुत छोटा हूँ इन सबके लिए। मेरे मन में कोई द्वेष, ईर्ष्या, घृणा भी नहीं। बस प्रार्थना है की अपने जमीर से पूछे वो जो कुछ बनने का खवाब रखते हैं, क्या पुलिस गालिया देने के लिए है? क्या कल आपका भाई भर्ती होगा तो वो जिल्लत खाने के लिए? मैंने जो किया वो उनके ध्यान में रख के किया जिनका कोई नहीं था। और करता रहूँगा।
मिलते रहेंगे सितम खुद्दारी की राह में, मैंने भी जीवन जीने का सलीखा सीख लिया बिना किसी चाह में, बस एक गम रह गया आज दशहरा था, रावण को नहीं जिताना था।"
बता दें कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डोटासरा ने इस मामले को लेकर ट्वीट किया था और सरकार से ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। डोटासरा के ट्वीट के बाद सीएम गहलोत के निर्देश पर गृह विभाग ने तत्काल कार्रवाई की। इस मामले में जनप्रतिनिधि के साथ हुई अभद्रता को लेकर प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर वृताधिकारी निवाई रुद्र प्रकाश शर्मा और थानाधिकारी सदर निवाई आशुसिंह गुर्जर को निलंबित कर दिया गया। महानिदेशक पुलिस इंटेलिजेंस उमेश मिश्रा ने बताया कि मामले की अग्रिम जाँच अजमेर रेंज महानिरीक्षक रुपिंदर सिंघ को सौंपी गई है। टोंक ज़िले में पूर्व ज़िला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष एवं पूर्व ज़िला प्रमुख रामविलास चौधरी से पुलिस अधिकारी द्वारा व्यवहार उनके पद के आचरण के विरुद्ध था। प्रदेश कांग्रेसअध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने गम्भीरता से लेते हुए सरकार के ऐसे अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्यवाही करने को कहा था । डोटासरा के इस ट्वीट के बाद सीएम गहलोत ने सीओ और एसएचओ को तत्काल निलंबित कर दिया।
हालांकि पुलिस अधिकारी रूद्र प्रकाश कितने पाक साफ हैं इसका पता जांच रिपोर्ट आने के बाद ही चल पाएगा। बहरहाल उनकी सोशल मीडिया पर शेयर की गई यह पोस्ट जमकर वायरल हो रही है, वही जनप्रतिनिधि रामविलास चौधरी को जबरन जिस तरह से कार में बैठाया गया, एक पक्ष उसकी भी कड़े शब्दों में निंदा कर रहा है।