हिसार. यह वाकया मूल रूप से हिसार के दड़ौली गांव निवासी गाजियाबाद की एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में काम करने वाले युवक के साथ घटा. वह 23 अप्रैल को गाजियाबाद से अपने गांव पहुंचा तो 25 अप्रैल को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में पहुंचते ही युवक का पहला कोरोना टेस्ट कराया जो पॉजिटिव आया. तुरंत युवक को उपचार के लिए अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया गया. लेकिन असली पीड़ा यहीं से शुरू हुई. युवक का 30 अप्रैल को दोबारा टेस्ट कराया गया तो पॉजिटिव आया और 6 मई को तीसरी रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई.
उपचार देने के बाद 10 मई के चौथे टेस्ट में रिपोर्ट नेगेटिव आ गई. पहले से ही तनाव में रहे युवक को कुछ राहत मिली. 5वीं रिपोर्ट भी नेगेटिव आई. लेकिन फिर युवक की छठी, सातवीं, आठवीं रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई. परेशान युवक ने फिर टेस्ट करवाया तो नवीं रिपोर्ट फिर नेगेटिव आई है, पर एहतियातन फिर मेडिकल टीम ने 10वीं रिपोर्ट के लिए टेस्ट किया है और अब फिर रिपोर्ट का इंतजार है.
बहरहाल इस तरह की दुविधा में युवक अवसाद में चला गया है. खुद को काफी तनाव में महसूस कर रहा है. कभी पॉजिटिव, कभी नेगेटिव, तो कभी फिर पॉजिटिव रिपोर्ट आने से परेशान युवक अब राज्य सरकार से गुहार लगाता नजर आ रहा है. उसने इस जांच रिपोर्ट की प्रक्रिया पर ही सवाल उठा दिया है. उसने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री को इस मामले में दखल देकर उसकी सही जांच करवाने की गुहार लगाई है.
इससे पहले युवक अपने सैंपल हिसार से बाहर जांच करवाने की प्रशासन से गुहार लगा चुका है. युवक का कहना है कि उसके सैंपल की हिसार से बाहर यदि जांच करवाई जाए तो सही रिपोर्ट मिल सकती है. स्थानीय स्तर पर होने वाली जांच रिपोर्ट से तो उसका भरोसा ही उठ गया है.
बहरहाल प्रशासन खुद नेगेटिव और पॉजिटिव रिपोर्ट के इस खेल में चिंतित और उलझा हुआ नजर आ रहा है. देखना होगा दसवीं रिपोर्ट में क्या सामने आता है. पर एक बात तो साफ है कि देश में और भी कई ऐसे मामले सामने आए हैं जो कोरोना को लेकर होने वाली जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाते नजर आ रहे हैं.