लंदन (सौम्यता मिश्रा). कोरोना की लगातार मिल रही निराशाजनक और डरावनी खबरों के बीच एक अच्छी खबर आई है. कोरोना को हराने के लिए इंसानों पर ब्रिटेन में दुनिया का सबसे बड़ा ड्रग ट्रायल शुरू हो गया है. युद्ध स्तर पर शुरू हुए इस परीक्षण पर पूरे विश्व की नजरें हैं. और हर कोई एक बड़ी उम्मीद इससे लगाए हुए है. ब्रिटेन के वैज्ञानिकों को भरोसा है कि ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन 'ChAdOx1 nCoV-19' से आने वाले कुछ सप्ताह में चमत्कार और सुखद परिणाम दुनिया के सामने आ सकते हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ब्रिटेन में 165 अस्पतालों में करीब 5 हजार मरीजों पर 30 दिनों तक यह परीक्षण चलेगा. इसी तरह से यूरोप और अमेरिका में भी सैकड़ों लोगों पर इस वैक्सीन का परीक्षण होगा. इस वैक्सीन का परीक्षण सबसे पहले युवाओं पर किया जा रहा है. सबकुछ ठीक रहा तो जल्द अन्य आयु वर्ग पर भी इस वैक्सीन का परीक्षण होगा. कोरोना वैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल के लिए 2.25 करोड़ पाउंड की राशि उपलब्ध कराई जा रही है.
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में जेनर इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर आड्रियान हिल की माने तो 'ब्रिटेन किसी भी कीमत पर सितंबर तक 10 लाख डोज तैयार करना चाहता है. एक बार वैक्सीन के परिणाम सकारात्म रूप से सामने आ जाएं, इसके बाद डोज की संख्या जरुरत के मुताबिक और बढाई जाएगी क्योंकि पूरी दुनिया को इसकी जरुरत है.' साथ ही आड्रियान हिल ने कहा कि 'सोशल डिस्टेंसिंग से सिर्फ कोरोना संक्रमण से बचा जा सकता है लेकिन इस वायरस को खत्म करने के लिए वैक्सीन ही सबसे कारगर उपाय हो सकता है.'
बताया जा रहा है कि वैक्सीन बनाने के लिए सबसे सटीक तकनीक का प्रयोग किया गया है जिससे पहले ही डोज से दमदार रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर सकती है. ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी के संक्रामक रोग विभाग के प्रोफेसर और इबोला की दवा के ट्रायल का नेतृत्व कर चुके पीटर हॉर्बी कहते हैं 'यह दुनिया का सबसे बड़ा ट्रायल है.'
इस रिसर्च टीम के लीडर प्रोफेसर साराह गिलबर्ट कहते हैं कि 'वो पहले से ही एक संभावित संक्रामक बीमारी पर काम कर रहे थे, जिससे कोविड-19 पर तेजी से काम करने में मदद मिली. खासकर लास्सा बुखार और मर्स पर यह टीम पहले ही सक्रिय थी जिससे कोविड-19 की वैक्सीन बनाने में उन्हें जल्दी हुई. इस वैक्सीन को बनाने में ChAdOx तकनीक का प्रयोग किया गया है. यह एक ऐसी तकनीक है जिससे अन्य अन्य बीमारियों में भी इलाज संभव है.'
ब्रिटेन के हेल्थ मिनिस्टर मैट हैनकॉक ने कहा है कि 'दो वैक्सीन इस वक्त सबसे आगे है. उन्होंने कहा कि एक ऑक्सफर्ड और दूसरी इंपीरियल कॉलेज में तैयार की जा रही है. आमतौर पर यहां तक पहुंचने में सालों लग जाते हैं और अब तक जो काम किया गया है उस पर मुझे गर्व है.'
जेनर इंस्टीट्यूट के मुताबिक ज्यादा इंतजार नहीं करना होगा 2 माह में ही पता चल जाएगा कि वैक्सीन कोरोना के इलाज में कितना कारगर है. किसी वैक्सीन को तैयार करने का प्रोटोकॉल 12 से 18 महीने का होता है. WHO की गाइडलाइन यही है.
ब्रिटेन के चीफ मेडिकल एडवाइजर क्रिस विह्टी के मुताबिक ' वैसे पूरी दुनिया में 70 से ज्यादा कंपनियां और रिसर्च टीम कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने पर काम कर रही हैं. ब्रिटेन में दुनिया के जाने माने वैक्सीन वैज्ञानिक हैं, बावजूद इसके डवलपमेंट प्रोसेस का पूरा ध्यान रखना है. टास्क फोर्स कम से कम समय में डोज को तैयार करने में लगी है जिसका मकसद जल्दी से जल्दी Covid-19 के इलाज के लिए वैक्सीन तैयार करना है.'