जयपुर। राजस्थान के वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल से जुड़े 40 विला-कॉटेज खरीद प्रकरण में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) अब इस पूरे मामले की विस्तृत जांच करेगा। राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-A के तहत जांच एवं अनुसंधान के लिए पूर्वानुमोदन प्रदान कर दिया है। ACB की प्रारंभिक जांच में शिखर अग्रवाल पर पद और प्रभाव का कथित दुरुपयोग कर निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने तथा स्वयं और परिजनों के नाम पर संपत्तियां खरीदने से जुड़े गंभीर सवाल सामने आए हैं।
ACB के महानिदेशक पुलिस गोविन्द गुप्ता ने 30 अक्टूबर को जारी जानकारी में बताया कि 27 अक्टूबर को दैनिक भास्कर के जयपुर संस्करण में प्रकाशित खबर, उद्योग विभाग से प्राप्त तथ्यात्मक रिपोर्ट और गोपनीय सूत्रों से मिली जानकारी का ब्यूरो ने समग्र परीक्षण किया। इसके बाद मामले में प्राथमिक जांच दर्ज कर विस्तृत पड़ताल करना उचित पाया गया।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, शिखर अग्रवाल ने उदयपुर जिला कलेक्टर, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अध्यक्ष और अतिरिक्त मुख्य सचिव, उद्योग सहित विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए कथित रूप से अपने पद एवं प्रभाव का दुरुपयोग किया। आरोप है कि उन्होंने गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों से मिलीभगत कर कंपनी को रिसॉर्ट निर्माण की शर्तों में अनुचित छूट, आवश्यक प्रमाण-पत्रों की समुचित जांच के बिना स्वीकृतियां और विशेष रियायती आर्थिक पैकेज दिलाने में भूमिका निभाई।
कंपनी राजस्थान सहित विभिन्न स्थानों पर 'अनंता' ब्रांड के नाम से होटल और रिसॉर्ट संचालित करती है।
ACB की प्रारंभिक पड़ताल में सामने आया कि शिखर अग्रवाल और उनके परिजनों ने गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड के अनंता रिसॉर्ट में कुल 40 विला-कॉटेज खरीदे। इनमें उदयपुर के बुझड़ा स्थित रिसॉर्ट में 20 कॉटेज और अलवर जिले के अजबगढ़ स्थित रिसॉर्ट में 20 विला शामिल हैं।
जांच में इन संपत्तियों की खरीद कीमत और कथित बाजार मूल्य के बीच अंतर को भी महत्वपूर्ण बिंदु माना गया है। आरोप है कि संपत्तियां बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर खरीदी गईं।
जांच में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया है कि 27 मार्च 2026 को वित्त विभाग ने गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को विशेष रियायती आर्थिक पैकेज जारी किया था। इसी तारीख को शिखर अग्रवाल द्वारा 20 विला की रजिस्ट्री कराए जाने की जानकारी भी सामने आई है। ACB इस पूरे घटनाक्रम और दोनों के बीच संभावित संबंधों की जांच करेगी।
ACB के अनुसार, मामले में केवल कंपनी को कथित लाभ पहुंचाने तक जांच सीमित नहीं रहेगी, बल्कि शिखर अग्रवाल और उनके परिजनों के नाम पर अर्जित संपत्तियों तथा आय के ज्ञात स्रोतों के बीच संबंधों की भी पड़ताल की जाएगी। आय से अधिक परिसंपत्तियां अर्जित किए जाने के आरोपों की भी विस्तृत जांच होगी।
अब जांच के दायरे में IAS शिखर अग्रवाल, गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक और अन्य संबंधित व्यक्ति रहेंगे। सरकार की मंजूरी के बाद इस प्रकरण में ACB की विस्तृत जांच का रास्ता खुल गया है। हालांकि, फिलहाल ये प्रारंभिक जांच में सामने आए आरोप और तथ्य हैं। संबंधित पक्षों की भूमिका और आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।