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अब जमकर उड़ाओ ड्रोन, नई ड्रोन नीति की घोषणा, PM मोदी बोले- स्टार्ट अप्स सेक्टर को मिलेगी काफी मदद

नई दिल्ली. भारत में 26 अगस्त को नई ड्रोन नीति की घोषणा कर दी गई. इसके तहत अब अब ड्रोन संचालित करने के नियमों में कुछ परिवर्तन किये हैं, जिसमें ड्रोन का कवरेज 300 किलोग्राम से बढ़ाकर 500 किलोग्राम कर दिया गया है, और इसमें भारी पेलोड ले जाने वाले ड्रोन और ड्रोन टैक्सी शामिल होंगे. इतना ही नहीं किसी भी पंजीकरण या लाइसेंस जारी करने से पहले किसी सुरक्षा मंजूरी की आवश्यकता नहीं है. इस बारे में जानकारी देते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा कि उसने यूएएस नियम 2021 को निरस्त करने और इसे उदार ड्रोन नियम 2021 से बदलने का फैसला किया है. प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा है कि ड्रोन संबंधी नए नियमों से भारत में इस क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक क्षण की शुरुआत हो गई है. उन्होंने यह भी कहा कि ड्रोन संबंधी नए नियमों से स्टार्ट-अप्स के साथ-साथ इस सेक्‍टर में काम करने वाले हमारे युवाओं को भी काफ...

आंत की बीमारी लीशमैनियासिस के उपचार के लिए एक आसान, सस्ता, मौखिक बायोफर्मासिटिकल विकसित

नई दिल्ली. भारतीय शोधकर्ताओं ने अब तक उपेक्षित एक उष्णकटिबंधीय बीमारी काला अजार (विसरल लीशमैनियासिस) के खिलाफ एक बड़ी सफलता प्राप्त की है. शरीर में बिना सुई के प्रविष्ट हो सकने वाली कम लागत की प्रभावी और रोगी के अनुरूप संभावित चिकित्सीय रणनीति विकसित की है. विटामिन बी12 के साथ लेपित नैनो कैरियर-आधारित मौखिक दवाओं पर आधारित शोधकर्ताओं की इस रणनीति ने मौखिक जैव-उपलब्धता और उपचार की प्रभावकारिता को 90% से अधिक बढ़ा दिया है. काला अजार अर्थात् विसरल लीशमैनियासिस (वीएल) एक जटिल संक्रामक रोग है जो मादा फ्लेबोटोमाइन सैंडफ्लाइज़ (मक्खियों) के काटने से फैलता है। यह एक उपेक्षित उष्णकटिबंधीय बीमारी है जो प्रति वर्ष लाखों लोगों को प्रभावित करती है, जिससे यह मलेरिया के बाद दूसरा सबसे आम परजीवी प्राणघातक रोग बन जाता है। वीएल की पारंपरिक उपचार चिकित्सा में मुख्य रूप से रक्त वाहिनियों में दर्दनाक सुइय...

केन्द्र ने माना मोबाईल टावर से हो रहा गंभीर रेडिएशन! 5 सालों में 21.76 करोड़ का जुर्माना भी लगाया लेकिन वसूली मात्र 3.67 करोड़ की 

नई दिल्ली. राजस्थान से राज्यसभा सांसद नीरज डांगी ने मोबाईल टावर रेडिएशन (विकिरण) एवं इससे होने वाली गंभीर बीमारियों की आशंका पर सरकार की स्थिति स्पष्ट करने हेतु अतारांकित प्रश्न के माध्यम से संचार मंत्रालय, भारत सरकार से यह प्रश्न किया था कि देश में कितने मोबाइल टावर स्थापित किए गए हैं और उनके लिए विकिरण संबंधी मानदंड क्या है? और सरकार द्वारा इस संबंध में उठाए गए अन्य सुधारात्मक कदमों का ब्यौरा क्या है? इनके साथ ही यह भी प्रश्न किया कि क्या दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (टएसपी) द्वारा उक्त मानदंडों के उल्लंघन के मामले सरकार के संज्ञान में आए हैं और सरकार द्वारा विगत पांच वर्षों में उन सेवा प्रदाताओं पर कितनी राशि का जुर्माना लगाया गया है एवं कितनी जुर्माना राशि संग्रहित की गई है, उसका वर्ष-वार ब्यौरा क्या है? संचार राज्य मंत्री देवुसिंह चैहान ने प्रश्न के लिखित उत्तर में सदन को अवगत कराया कि ...

जिनोम सिक्वेन्सिंग की सुविधा विकसित करने में राजस्थान बना  देश का पहला राज्य, कोरोना के खिलाफ होगा यह फायदा

जयपुर। राजस्थान के सबसे बड़े सरकारी एसएमएस मेडिकल कॉलेज में जिनोम सिक्वेन्सिंग की सुविधा प्रारम्भ कर दी गई है। राज्य स्तर पर टोटल जिनोम सिक्वेन्सिंग की सुविधा उपलब्ध होने की दृष्टि से राजस्थान देश का पहला राज्य बन गया है।  कोविड-19 की रोकथाम को दृष्टिगत रखते हुये प्रदेश में जिनोम सिक्वेन्सिंग की यह सुविधा उपलब्ध कराई गई है। जिनोम सिक्वेन्सिंग की तकनीक से वॉयरस के नये वेरियेन्ट के बारे में जानकारी प्राप्त हो सकेगी। एसएमएस मेडिकल कॉलेज में करीब 1 करोड रूपये व्यय कर जिनोम सिक्वेन्सिंग की व्यवस्था प्रारम्भ की गई है।  चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने बताया कि जिनोम सिक्वेन्सिंग के लिये अब तक प्रदेश से सेम्पल केन्द्र सरकार की इण्डियन कौसिंल ऑफ मेडिकल रिसर्च द्वारा राजस्थान के लिये निर्धारित दिल्ली स्थिति आईजीआईबी लैब में भिजवाये जा रहे थे। प्रदेश से प्रतिदिन 10...

अब वेंटिलेटर की आवश्यकता है या नहीं, ऐसे रोगियों की पहचान करेगा विशेष सॉफ्टवेयर

नई दिल्ली. कोरोना संकटकाल में एक और नया इनोवेशन देखने को मिला है. एक सॉफ्टवेयर अब उन रोगियों की पहचान कर सकता है जिन्हें आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत है. समय रहते मरीज को रेफर करने से आपात स्थिति से पहले आवश्यक व्यवस्था करने में मदद मिलेगी. कोविड सेविरिटी स्कोर (सीएसएस) सॉफ्टवेयर नामक सॉफ्टवेयर में एक लेएल्गोरिथ्म है जो कारोना मरीजों को मापदंडों के एक सेट से मापता है. यह प्रत्येक रोगी के लिए एक पूर्व-निर्धारित डायनेमिक एल्गोरिथ्म के सहारे कई बार स्कोर करता है और एक ग्राफिकल ट्रेंड में इसे मैप करने के लिए एक कोविड सेविरिटी स्कोर (सीएसएस) देता है. इस सॉफ्टवेयर प्रौद्योगिकी का उपयोग कोलकाता और उपनगरों में तीन सामुदायिक कोविड देखभाल केंद्रों में किया जा रहा है, जिसमें कोलकाता के बैरकपुर में एक 100-बेड का सरकारी कोविड देखभाल केंद्र भी शामिल है. कोरोना महामारी के दौरान अचानक आई...

आकाश गंगाओं का इंधन खत्म! 8-10 अरब वर्ष पहले जहां तारों की उत्पत्ति अपने उच्चतम स्तर पर थी वह अब नगण्य

नई दिल्ली। लगभग 8-10 अरब वर्ष पहले आकाश गंगाओं में तारों की उत्पत्ति अपने उच्चतम स्तर पर थी और उसके बाद उसमें लगातार गिरावट आई है। इसके पीछे के कारणों की खोज करने पर पाया गया है कि तारों की उत्पत्ति संबंधी गिरावट का कारण संभवत: आकाश गंगाओं में ईंधन का खत्म होना रहा होगा। अरबों साल पहले युवा ब्रह्मांड में तारों की उत्पत्ति संबंधी गतिविधियों पर नजर रखने वाले खगोलविद लंबे समय से इस तथ्य की खोजबीन कर कर रहे हैं। खगोलविदों के मुताबिक हाइड्रोजन निर्माण के लिए महत्वपूर्ण ईंधन आकाशगंगाओं में मौजूद परमाणु हाइड्रोजन सामग्री है। करीब 9 अरब साल पहले और 8 अरब साल पहले आकाशगंगाओं में परमाणु हाइड्रोजन सामग्री को मापने वाले दो अध्ययनों ने उन्हें इस निष्कर्ष पर पहुंचने में मदद की है। पुणे के नेशनल सेंटर फॉर रेडियो एस्ट्रोफिजिक्स (एनसीआरए-टीआईएफआर) और बेंगलूरु में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्ग...

ब्लैक फंगस के इलाज के लिए अब महज 1200 रु में मिलेगा Amphotericin B Emulsion इंजेक्शन, नहीं खरीदने पड़ेंगे कई गुना महंगे दाम के इंजेक्शन

नई दिल्‍ली। कोरोना महामारी के बाद जानलेवा साबित हो रहे हैं ब्लैक फंगस को लेकर एक राहत की खबर आई है। ब्लैक फंगस इंफेक्शन के इलाज के लिए वर्धा में जेनेटेक लाईफ सायन्सेस ने Amphotericin B Emulsion इंजेक्शन का बहुत कम दामों पर उत्पादन शुरू किया हैं। इससे पहले जहां भारत में एक ही कंपनी इसका उत्पाद करती थी वहीं अब उत्पादन के बाद इसी सोमवार से इस इंजेक्शन का वितरण शुरू हो जाएगा। इसकी कीमत 1200 रुपये होगी जबकि अभी यह इंजेक्शन 7000 रुपये तक मिल रहा था। कई लोग मांग ज्यादा होने से मनमाने दाम भी वसूल रहे थे। बता दें कि इस पूरे प्रोजेक्ट में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी मदद कर रहे थे। इससे पहले कंपनी रेमडेसिवीर इंजेक्शन का भी उत्पादन शुरू कर चुकी है। गड़करी के ट्वीटर पर इसकी जानकारी देते हुए कहा गया कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की कोशिशों से कोविड के बाद तेज़ी से फैल रहे ब्लैक फंगस इन...

अब खुद ही घर पर कीजिए कोरोना टेस्ट, और मोबाइल एप से पाएं अपनी रिपोर्ट

दिल्ली। कोराना की जांच के लिए अब लैब जाने या लाइन में लग कर टेस्ट करवाने की जरूरत नहीं है। अब घर पर ही कोरोना टेस्ट किया जा सकेगा। आईसीएमआर ने एक किट को मंजूरी दी है। इस किट के जरिये घर में ही नाक से कोरोना जांच के लिए सैंपल ले सकते हैं। यह एक होम रैपिड एंटीजन टेस्टिंग (आरएटी) किट है। इसका यूज कोरोना के हल्के लक्षण या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हुए लोग कर सकते हैं। ICMR ने कोरोना टेस्ट किट को लेकर नई एडवाइजरी भी दी है। आईसीएमआर ने साफ कहा है कि होम टेस्टिंग सिर्फ सिम्प्टोमेटिक मरीजों के लिए है। यह उनके लिए भी है जो लोग लैब में कन्फर्म केस के सीधे संपर्क में आए हों। होम टेस्टिंग के लिए गूगल प्ले स्टोर और एपल स्टोर से मोबाइल ऐप डाउनलोड करना होगा। मोबाइल ऐप के जरिये पॉजिटिव और निगेटिव रिपोर्ट मिलेगी। जो लोग होम टेस्टिंग करेंगे उन्हें टेस्ट स्ट्रिप पिक्चर खींचनी होगी और उसी फो...

कोरोना के खात्मे के लिए रामबाण DRDO की एंटी Covid दवा 2DG लॉन्च

दिल्ली। कोरोना के खात्मे के लिए रामबाण दवा लॉन्च हो गई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने कोरोनावायरस (Coronavirus) के मरीजों के लिए DRDO की एंटी Covid दवा 2DG की पहली खेप लॉन्च की। इस कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ.हर्षवर्धन और AIIMS के डायरेक्टर डॉ.रणदीप गुलेरिया भी मौजूद थे। 2DG पहली ऐसी दवा है, जिसे एंटी-Covid दवा कहा गया हैं और DCGI ने पिछले हफ्ते ही इस दवा के इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दी थी। इस दवा को एक गेम-चेंजर के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि ये अस्पताल में भर्ती मरीजों की तेजी से रिकवरी में मदद करती है और ऑक्सीजन सपोर्ट को भी कम करती है। एक मरीज को इसकी 5-7 डोज की जरूरत होगी। माना जा रहा है इस दवा के प्रयोग से कोरोना संक्रमित मरीज तेजी से ठीक होता है। और यह कोरोना के खिलाफ जंग में एक बड़ी गेम चेंजर भारत के लिए साबित होगी। इस दवा के इस्तेमाल...

कोरोना के खिलाफ DRDO की भारतीय संजीवनी '2DG' दवा कल होगी लॉन्च . जानें क्यों कारगर है यह दवा

दिल्ली। कोरोना के खिलाफ जंग में भारत ने एक मजबूत संजीवनी तैयार कर ली है। शरीर में पहुंचकर नुकसान पहुंचाने वाले कोरोना वायरस का मुकाबला करने के लिए डीआरडीओ (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) के सहयोगी संस्थान आइएनएमएस (इंस्टीट्यूट आफ न्यूक्लियर मेडिसीन एंड एलाइड साइंसेज) के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार 2डीजी (2 डीआक्सी-डी ग्लूकोज) 17 मई की सुबह लांच की जाएगी। माना जा रहा है इस दवा के प्रयोग से कोरोना संक्रमित मरीज तेजी से ठीक होता है। और यह कोरोना के खिलाफ जंग में एक बड़ी गेम चेंजर भारत के लिए साबित होगी। इस दवा के इस्तेमाल से कोरोना मरीजों की ऑक्सजीन पर निर्भरता काफी कम हो जाती है। बस इसे पानी में घोल कर लेना होता है। ​​​​​​ दवा को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की लैब इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड अलाइड साइंस (INMAS) ने हैदराबाद के डॉ. रेड्डी लेबोरेटरी के साथ मिलकर तैयार कि...